Karnataka Election: पीएम मोदी के ही मंत्र से कांग्रेस ने कर्नाटक में भाजपा को किया क्लीन बोल्ड
कर्नाटक में कांग्रेस को जबरदस्त जीत मिली है। कांग्रेस की इस जीत की कई वजहे हैं। पार्टी ने पीएम मोदी की राह पर चलते हुए अपनी सोशल मीडिया टीम को मजबूत किया, स्थानीय मुद्दों और स्थानीय नेताओं को बढ़ाया आगे।

Karnataka Election 2023: पिछले कई सालों से जिस तरह से कांग्रेस को एक के बाद एक चुनाव में निराशा का मुंह देखना पड़ रहा था, उसके बीच हिमाचल प्रदेश के चुनाव नतीजों ने कांग्रेस के लिए कुछ राहत की खबर जरूर दी थी। लेकिन कर्नाटक में प्रचंड जीत ने कांग्रेस के लिए उम्मीदों के नए दरवाजे खोले हैं।
कर्नाटक में कांग्रेस की जीत की सबसे बड़ी वजह क्या है, अगर इसकी चर्चा करें तो पार्टी ने पीएम मोदी के ही नक्शे कदम पर चलकर अपने चुनाव प्रचार को आगे बढ़ाया और पार्टी को जीत के दरवाजे तक पहुंचाया।
पीएम के मंत्र से ही भाजपा को घेरा
पीएम मोदी वोकल फॉर लोकल की बात करतें हैं, पीएम मोदी के इसी मंत्र को कांग्रेस अपना मूल मंत्र बनाया। पार्टी ने बिजली, सड़क और पानी जैसे मुद्दों को लेकर प्रचार के दौरान भाजपा सरकार को जमकर घेरा।
40 फीसदी कट का मुद्दा
सिद्धारमैया के तौर पर कांग्रेस के पास प्रदेश में जमीनी नेता था, जो लोगों के बीच ना सिर्फ लोकप्रिय है बल्कि कर्नाटक में गरीबों के नेता के तौर पर देखे जाते हैं। वही कांग्रेस के एक और दिग्गज डीके शिवकुमार ने लगातार भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाया और 40 फीसदी कट का मामला लोगों के बीच बढ़-चढ़कर उठाया।
आपसी मनमुटाव को किया दूर
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला जो प्रदेश में चुनाव अभियान शुरू होने से काफी पहले डेरा जमा चुके थे। उन्होंने डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया को स्पष्ट तौर पर यह समझाया कि पहले हमे चुनाव जीतना होगा, इसके बाद ही आप में से कोई मुख्यमंत्री बन सकता है।
भाजपा पर तीखा पलटवार
प्रदेश में कांग्रेस की महासचिव सुप्रिया श्रीनेत्र, जयराम रमेश, पवन खेड़ा ने भारतीय जनता पार्टी के उग्र बयानबाजी का जवाब उसी की भाषा में दिय़ा। तीनों ने मिलकर भाजपा के हर आरोप का जवाब दिया और हर फर्जी ट्वीट, सोशल मीडिया पर खबर का खुलकर ना सिर्फ विरोध किया बल्कि उसकी सच्चाई लोगों के सामने रखी।
इंस्टाग्राम पर जबरदस्त रीच
कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया तंत्र को काफी मजबूत किया। कांग्रेस ने इंस्टाग्राम पर खुद को बेहतर किया, यहां पर पार्टी ने खुद के बेस को काफी मजबूत किया, जबकि भाजपा यहां पिछड़ती नजर आई और उसका कंटेंट भी खास नहीं रहा।
सोशल मीडिया कहीं मजबूत
अगले साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों ही पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंकी। भाजपा के पास फंडिंग की कोई कमी नहीं है। लेकिन बावजूद इसके जिस तरह से कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर अपनी पकड़ मजबूत की बल्कि भाजपा को इस मायने में कहीं पीछे छोड़ दिया।
स्थानीय मुद्दों पर घेरा
भाजपा ने पहले टीपू सुल्तान के जरिए प्रदेश के चुनाव का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की, इसके बाद भगवान राम के नाम का भी मुद्दा छाया रहा। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस ने बजरंग दल को प्रतिबंधित करने की बात कही, उसका पार्टी को जबरदस्त फायदा मिला। कांग्रेस को इस बात का अंदाजा हो गया था कि यह चुनाव हिंदुत्व पर आगे नहीं बढ़ रहा है, यही वजह है कि पार्टी ने भ्रष्टाचार और जमीनी मुद्दों पर प्रचार को आगे बढ़ाया।
स्थानीय नेताओं को बढ़ाया
कांग्रेस ने प्रदेश में जमीनी और स्थानीय मुद्दों पर पूरा ध्यान दिया। साथ ही स्थानीय नेताओं को ही यहां मजबूत किया। उन नेताओं को आगे बढ़ाया जिन्हें यहां के लोग अच्छे से जानते थे। कांग्रेस ने भाजपा के हिंदुत्व की पिच से खुद को दूर रखा।
राहुल का जनसंपर्क
पीएम मोदी की ही तरह राहुल गांधी ने प्रदेश के लोगों के साथ सीधा संपर्क करने की कोशिश की। उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा की मदद से प्रदेश के लोगों के संपर्क साधा। राहुल ने जिन 21 सीटों पर अपनी यात्रा को प्रदेश में निकाला, उसमे से 17 पर पार्टी को जीत मिली है।












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