Karnataka:समर्थकों के सामने छलका डीके शिवकुमार का दर्द, बताया क्यों नहीं बन पाए मुख्यमंत्री?
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पहली बार सीएम पद नहीं मिल पाने को लेकर अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने कहा है कि सोनिया-राहुल की वजह से उन्हें समझौता करना पड़ा।

कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी से एक सीढ़ी नीचे रह जाने की कसक को लेकर पहली बार उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का दर्द छलक आया है। कर्नाटक के रामनगर में अपने समर्थकों से शनिवार को उन्होंने कहा कि उन्हें गांधी परिवार (सोनिया गांधी, राहुल गांधी) और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सलाह पर सीएम पद पर अपना दावा छोड़ना पड़ा।

'मुझे सीएम बनाने के लिए वोट दिया, लेकिन क्या करूं?'
कर्नाटक में उपमुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद डीके शिवकुमार पहली बार अपने निर्वाचन क्षेत्र में लोगों के बीच थे। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा, 'आपने मुझे मुख्यमंत्री बनाने के लिए बहुत ज्यादा संख्या में वोट दिया, लेकिन क्या करूं? एक फैसला लिया गया। राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुझे कुछ सलाह दिए।'

अब धैर्य और इंतजार करना होगा- डीके शिवकुमार
डीके ने कहा कि 'उनकी बातों पर मुझे अपना सिर झुकाना पड़ा। अब मुझे धैर्य रखना होगा और इंतजार करना पड़ेगा।' उन्होंने समर्थकों को भरोसा दिलाया कि कभी न कभी उनके हाथों में सरकार की बागडोर देखने की उनकी इच्छा अधूरी नहीं रहेगी। उन्होंने कहा, 'मेरी तरह ही आप सब को भी धैर्य के साथ इंतजार करना चाहिए।'

सीएम पद को लेकर सिद्दारमैया से थी टक्कर
224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस को 135 सीटें मिलने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सीएम सिद्दारमैया और डिप्टी सीएम शिवकुमार के बीच तगड़ी आंतरिक प्रतियोगिता चली थी। इसकी वजह से भारी बहुमत के बावजूद सरकार बनाने में 'अप्रत्याशित देरी' का भी सामना करना पड़ा।

डीके के मंसूबों पर पानी फिरा
बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस नेताओं ने दोनों के बीच कोई सुलह का रास्ता निकालने के लिए दिन-रात एक कर दिए। शीर्ष नेतृत्व में भी दोनों के नाम पर आपसी मतभेद की खबरें सामने आईं। लेकिन, आखिरकार हाई कमान की नजरों में सिद्दारमैया को ज्यादा नंबर मिला और डीके शिवकुमार को अनिश्चित वेटिंग लिस्ट वाला टिकट लेकर सरकार में शामिल होने को मजबूर होना पड़ गया।
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अपनी मेहनत का इनाम चाहते थे डीके
डीके शिवकुमार का सीएम पद को लेकर यह दावा था कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने कड़ी मेहनत की; और पार्टी की शानदार जीत में उनका योगदान बहुत बड़ा रहा। इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री का पद मिलना चाहिए।
वोक्कालिगा समाज को लेकर दावा
उनका यह भी दावा है कि उन्हीं की वजह से उनकी जाति वोक्कालिगा का वोट कांग्रेस को मिला है, जो कि परंपरागत रूप से जेडीएस के समर्थक माने जाते हैं। वकुमार के मुताबिक उनके प्रभाव से ही वोक्कलिगा ने उनका और कांग्रेस का समर्थन किया, जिसके चलते पुराने मैसुरू के क्षेत्र में इस बार कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को मतदान हुआ था और 13 मई को मतगणना हुई थी। नतीजे आने के बाद कांग्रेस हाई कमान को सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार के बीच टकराव को दूर करने में चार दिन से ज्यादा लग गए। शिवकुमार के खिलाफ एक बात ये चली गई कि अधिकतर एमएलए सिद्दारमैया को सीएम बनाना चाहते थे और यहीं पर उन्हें झटका लग गया।












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