Karnataka: 28 लोकसभा सीट जो न करवाए! कांग्रेस सरकार भी राम मंदिरों को देगी 100 करोड़, ये है मजबूरी

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार भी प्रदेश के राम मंदिरों के पुनर्निमाण और विकास के लिए सरकारी खजाना खोलने के लिए तैयार हो गई है।

वन इंडिया ने पिछले बुधवार को ही एक रिपोर्ट दी थी, जिसमें राज्य के मुजराई (मंदिर) विभाग की ओर से इसके लिए मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से फंड मांगे जाने की बात कही गई थी।

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करीब 100 राम मंदिरों के विकास के लिए खर्च होंगे 100 करोड़ रुपए
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री सिद्दारमैया 16 फरवरी को पेश किए जा रहे बजट में राज्य के लगभग 100 राम मंदिरों के नवीनीकरण और विकास के लिए 100 करोड़ रुपए आवंटित करने के लिए तैयार हो गए हैं।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार कर घिर चुकी है कांग्रेस
दरअसल, अयोध्या में भगवान राम की पवित्र जन्मभूमि पर बने भव्य राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह का कांग्रेस ने जिस तरह से बहिष्कार किया था, उसके बाद बीजेपी को कर्नाटक में कांग्रेस को हिंदू-विरोधी बताने का मौका मिल गया था।

कांग्रेस की ओर से 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण ठुकराए जाने के बाद से बीजेपी ने प्रदेश में इसे बड़ा मुद्दा बना रखा है। उसके बाद पार्टी ने हजारों राम भक्तों और श्रद्धालुओं को अयोद्या में राम लला के दर्शन करवाने का अभियान भी शुरू किया है।

राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से यह निमंत्रण कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और लोकसभा में पार्टी के नेता सदन अधीर रंजन चौधरी को दिया गया था। खड़गे खुद कर्नाटक के रहने वाले हैं, इसलिए बीजेपी को लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को घेरने का बड़ा हथियार मिल चुका है।

लोकसभा चुनावों से पहले डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस
अब सिद्दारमैया सरकार ने मुरजाई विभाग की ओर से प्रदेश के लगभग 100 राम मंदिरों के उत्थान के लिए जो कदम उठाए गए हैं, वह पार्टी के डैमेज कंट्रोल वाले प्लान का हिस्सा बताया जा रहा है।

यह इस वजह से भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि सीएम सिद्दारमैया नास्तिक तक बताए जाते हैं और हिंदू धर्म को लेकर प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों ने भाजपा का काम और आसान कर रखा है।

28 लोकसभा सीट जो न करवाए!
कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटें हैं। इनमें से 2019 में 25 बीजेपी अकेले जीती थी और 1 सीट पर उसके समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी। जबकि,तब प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की दोनों ही दलों को 1-1 सीट ही मिल सकी थी।

इस बार सियासी गणित पूरी तरह से बदला हुआ है और जेडीएस के साथ गठबंधन करने से भाजपा सभी 28 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

वहीं, कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बाद एक गुपचुप सर्वे करवाया है, उसने पार्टी को सोचने को मजबूर कर दिया है।

शायद यही वजह है कि हाल ही में सीएम सिद्दारमैया ने प्रदेश में कांग्रेस को जितनी सीटें मिलने की उम्मीदें जाहिर की थीं, वह भी विधानसभा चुनाव परिणामों के मुकाबले और पार्टी नेताओं की ओर से पहले किए गए दावों के मुकाबले काफी कम थी।

यही वजह है कि कांग्रेस सरकार की ओर से राम मंदिरों के लिए 100 करोड़ रुपए आवंटन की यह योजना को आने वाले लोकसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

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