कर्नाटक में अब 'राम भरोसे' कांग्रेस, बीजेपी की अयोध्या योजना के जवाब में बनाया मेगा प्लान
कर्नाटक के मुजराई विभाग ने राज्य में 100 राम मंदिरों को विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से बजट में विशेष फंड की मांग की है। 16 फरवरी को मुख्यमंत्री अपना रिकॉर्ड 15वां बजट पेश करने जा रहे हैं, उससे पहले ही इस फंड की जरूरत बता दी गई है।
कर्नाटक के परिवहन और मुजराई मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने ईटी को बताया है, 'सीएम की ओर से हाल ही में विभागीय अनुसार आवंटन पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक में हमने राज्य भर में राम मंदिरों के विकास के लिए धन की मांग की है। हम कुछ फंड प्राप्त होने के प्रति आशांवित हैं।'

भाजपा के जवाब में 'राम भरोसे' हुई कांग्रेस!
राज्य सरकार पर विपक्षी बीजेपी की ओर से लगातार हिंदू भावनाओं के अपमानित करने का आरोप लगाया जाता रहा है। ऐसे में बेंगलुरु के एक बड़े कांग्रेसी नेता और मंत्री की ओर से राम मंदिरों के विकास का एजेंडा भगवा दल की रणनीति की काट की तरह देखा जा रहा है।
मांड्या के मुद्दे पर भी हो रहा है विवाद
कांग्रेस सरकार के मंत्री की ओर से यह प्रस्ताव ऐसे समय में लाया गया है, जब मांड्या जिले में शनिवार रात को हनुमान ध्वज हटाए जाने के बाद से भारी विवाद हो रहा है और बीजेपी विरोध प्रदर्शन कर रही है।
उधर बीजेपी अयोध्या में 22 जनवरी को हुए भगवान राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से इस मुद्दे को लोकसभा चुनावों तक जीवित रखना चाह रही है। पार्टी की प्रदेश इकाई 25 मार्च तक लगभग 35,000 पार्टी कार्यकर्ताओं और भक्तों को अयोध्या में राम लला के दर्शन कराने की योजना पर काम कर रही है।
बीजेपी की रणनीति से सीधे टकराव से बचने की कोशिश
22 जनवरी को प्रदेश के मुजराई विभाग ने भी राज्य के हिंदू मंदिरों में विशेष पूजा के आयोजन का भी आदेश दिया था। कर्नाटक सरकार इंडिया ब्लॉक शासित एक और राज्य तमिलनाडु की डीएमके सरकार के ठीक विपरीत नीति अपना रही है। यह बीजेपी से टकराने के बजाए, उसी की दिशा में आगे बढ़ने की योजना पर काम करती नजर आ रही है।
वैसे राज्य सरकार ने दलील दी थी कि प्रदेश का मुजराई विभाग त्योहारों के मौके पर ऐसे विशेष पूजा का आयोजन करवाता रहा है और अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन भी एक ऐसा ही अवसर था।
बीजेपी सिद्दारमैया सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाती है। लेकिन, अगर 100 राम मंदिरों को विकसित करने की योजना को सिद्दारमैया सरकार की ओर से हरी झंडी मिल जाती है तो इससे साफ हो जाएगा कि कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ ऐसे मुद्दों पर सीधे टकराव की जगह उसके बहाव में बहकर चुनावों में उतरना चाह रही है।












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