कर्नाटक कांग्रेस सरकार ने रद्द किया धर्मांतरण विरोधी कानून, भड़के तेजस्वी सूर्या, इसे बताया पीएफआई एजेंडा
धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द करने के कर्नाटक सरकार के कदम पर तेजस्वी सूर्या ने सरकार को आड़े हाथों लिया।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने गुरुवार को पिछली भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए धर्मांतरण विरोधी कानून को खत्म करने का ऐलान कर दिया है।
धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द किए जाने के कांग्रेस सरकार के फैसले पर भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस पर पीएफआई का समर्थक बताया है।

दिल्ली में तेजस्वी सूर्या ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पीएफआई के एजेंडे को बहुत तत्परता और लगन से पूरा कर रही है।
तेजस्वी ने कहा कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द करने का वादा किया है। जबकि धर्मांतरण विरोधी कानून का उद्देश्य धोखाधड़ी और जबरदस्ती धर्मांतरण को रोकना था।
तेजस्वी सूर्या ने कहा भाजपा सरकार द्वारा लागू किए धर्मांतरण विरोधी अधिनियम को निरस्त करके, कांग्रेस ने एक बार फिर दिखाया है कि वह अपने वोट बैंक हित को संविधान की भावना और देश के कानून से ऊपर रखती है।
बता दें कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने गुरुवार को बताया कि धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द करने के लिए 3 जुलाई से शुरू होने वाले आगामी विधानसभा सत्र में एक विधेयक पेश करेगी।
ये जानकारी देते हुए कर्नाटक के कानून और संसदीय मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि कैबिने मीीटिंगमें धर्मांतरण विरोधी विधेयक पर चर्चा की गई। इसके बाद हमने 2022 में भाजपा सरकार द्वारा लाए गए परिवर्तनों को रद्द करने के लिए विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसे 3 जुलाई से शुरू होने वाले सत्र के दौरान पेश किया जाएगा।
बता दें कांग्रेस और जेडीएस के विरोध के बावजूद कर्नाटक की पिछली भाजपा सरकार ने धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का कर्नाटक संरक्षण अधिनियम (धर्मांतरण विरोधी कानून) 2022 में लागू किया था।
धर्मांतरण विरोधी कानून धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की सुरक्षा और गलत बयानी, बल, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, प्रलोभन या किसी भी धोखाधड़ी के माध्यम से एक धर्म से दूसरे धर्म में गैरकानूनी रूपांतरण पर रोक लगाने का प्रावधान करता है।












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