कर्नाटक में विधायकों की बल्ले-बल्ले! हर विधानसभा को 50 करोड़ की विकास निधि, फिर भी विपक्षी दल क्यों है नाराज?
Karnataka MLA fund allocation: कर्नाटक की राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से गूंज रही विधायकों की नाराज़गी अब आखिरकार रंग लाई है। विकास कार्यों के लिए फंड की भारी कमी से परेशान विधायकों, खासकर सत्तारूढ़ कांग्रेस की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने बड़ा ऐलान कर दिया है। अब राज्य के हर विधायक को अपने क्षेत्र में विकास योजनाएं शुरू करने के लिए सीधे 50 करोड़ रुपये की विशेष निधि मिलेगी।
इस ऐलान से जहां विधायकों के चेहरों पर रौनक लौट आई है, वहीं विपक्षी खेमे में हलचल भी तेज हो गई है। हालांकि यह घोषणा मुख्यमंत्री के आधारभूत संरचना विकास कार्यक्रम के तहत की गई है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इसमें सत्ताधारी पार्टी को प्राथमिकता दी जा रही है।

किस काम के लिए कितनी राशि?
15 जुलाई को लिखे गए पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य के बजट 2025-26 में घोषित मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास कार्यक्रम के अंतर्गत, आपके विधानसभा क्षेत्र को विशेष रूप से 50.00 करोड़ रुपये की निधि प्रदान की जाएगी।
विभाजन इस प्रकार है
- लोक निर्माण विभाग, सड़क और पुल कार्य (ग्रामीण व शहरी): ₹37.50 करोड़
- अन्य विभागीय कार्य, जिन्हें विधायक अपनी इच्छा से चुन सकते हैं: ₹12.50 करोड़
विधायकों को अपने क्षेत्र के कार्यों का विवरण एक निर्धारित प्रारूप में मांग पत्र के साथ मुख्यमंत्री को सौंपने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही, 30 और 31 जुलाई को विधान सौध में जिला-वार बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में विधायकों को कार्यों की जानकारी के साथ उपस्थित रहने को कहा गया है।
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विपक्ष का आरोप: क्या केवल कांग्रेस विधायकों को मिलेगा लाभ?
वहीं कर्नाटक सरकार के इस फैसले पर बीजेपी और जेडी(एस) ने भेदभाव का आरोप लगाया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी विधायक आर. अशोक ने कहा, पिछले दो वर्षों में कोई विकास नहीं हुआ। खुद कांग्रेस विधायक कह रहे हैं कि वे अपने क्षेत्र में मुंह नहीं दिखा सकते। अब ₹50 करोड़ की निधि की घोषणा हुई है, लेकिन हमारे पास जानकारी है कि बीजेपी और जेडी(एस) के विधायकों को सिर्फ ₹25 करोड़ दिए जाएंगे। अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
JDS ने भी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाया है। सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि, 'क्या सिद्धारमैया पूरे राज्य के मुख्यमंत्री हैं या केवल कांग्रेस विधायकों के? क्या सिर्फ कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों के लिए ₹50 करोड़ देना और अन्य विधायकों को अनदेखा करना उचित है?'
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