Caste Survey: कर्नाटक में सीएम सिद्दारमैया ने स्वीकार की रिपोर्ट, क्या डीके शिवकुमार की गैर-मौजूदगी रही वजह?
Karnataka Caste Survey report: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने गुरुवार को विवादास्पद जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट की कॉपी स्वीकार कर ली है। उन्होंने इस फैसले के लिए राज्य की प्रभावशाली वीरशैव लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय ही नहीं अपने कुछ प्रभावशाली मंत्रियों के सख्त विरोध को भी नजरअंदाज कर दिया है।
कांग्रेस सरकार के कई विधायक भी इस रिपोर्ट का विरोध कर रहे थे। इस वजह से अलग-अलग वजहों से इसे अबतक लटकाया जाता रहा है। खुद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी वोक्कालिगा समुदाय से हैं और कहा जाता है कि यह रिपोर्ट अबतक लटकाए जाते रहने के पीछे उनका बड़ा प्रभाव रहा है।

कर्नाटक के सीएम ने जातिगत सर्वे रिपोर्ट की कॉपी स्वीकार की
लेकिन, शिवकुमार जिस समय हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस का संकट सुलझाने के लिए शिमला पर ध्यान खपा रहे थे, उसी दौरान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने रिपोर्ट की कॉपी स्वीकार कर ली है। हालांकि, राज्य के एक बड़े वर्ग ने हमेशा जातिगत सर्वे का समर्थन भी किया है।
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को कर्नाटक में पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के जयप्रकाश हेगड़े ने सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की 13 खंडों वाली रिपोर्ट सीएम को सौंपी है। हेगड़े के मुताबिक रिपोर्ट में जातिगत आधार पर जनसंख्या के विवरण के साथ ही उनके व्यापक सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण के निष्कर्ष भी शामिल किए गए हैं।
रिपोर्ट में कई तरह की गलतियों के लगते रहे हैं आरोप
लिंगायतों के प्रमुख धार्मिक पीठ सिद्दगंगा मठ के श्री सिद्दगंगा स्वामी ने कहा है कि उन्हें बताया गया था कि यह रिपोर्ट समुदायों बगैर उचित सर्वेक्षण के तैयार की गई है। हालांकि, उन्होंने इस विचार का समर्थन किया था कि समुदायों को सरकारी लाभ उनकी आबादी के हिसाब से मिलना चाहिए।
सिद्दारमैया सरकार के कई मंत्री भी रिपोर्ट के विरोध में
वहीं, राज्य की महिला और बाल विकास मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने इस रिपोर्ट को त्रुटिपूर्ण बताया, क्योंकि उनके मुताबिक सर्वे वाली टीम ने उनके अपने बेलगावी जिले के कई घरों का भी दौरा नहीं किया था।
उन्होंने फिर से सर्वे कराने की मांग करते हुए कहा कि लिंगायतों में 103 उप-जातियां हैं और सर्वेक्षण टीम को इन सभी का अध्ययन करने के बाद ही वैज्ञानिक आधार पर रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए।
लिंगायतों के एक प्रभावशाली नेता और राज्य के उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि उनके अपने ही समाज के लोगों को रिपोर्ट को लेकर चिंता थी। क्योंकि, कई लोगों ने गलती से खुद को वीरशैव-लिंगायत बताने की जगह अपनी-उपजातियों के नाम बता दिए। उन्होंने कहा कि वोक्कालिगा की भी यही चिंता थी और सरकार इसपर फैसला लेना होगा कि क्या रिपोर्ट स्वीकार करना है।
कैबिनेट की उप-समिति में भेजी जा सकती है रिपोर्ट
माना जा रहा है कि रिपोर्ट को लेकर उपमुख्यमंत्री समेत कांग्रेस के अन्य मंत्रियों के रुख को देखते हुए सीएम इस कुछ समय तक इसे और टालने के लिए इसे कैबिनेट के सामने रखेंगे और वहां से इसे मंत्रिमंडल की उप-समिति में राय देने के लिए भेज दिया जाएगा।
सिद्दारमैया ने लोकसभा चुनाव को देखकर चला दांव!
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कर्नाटक में ओबीसी समुदाय के प्रभाव को देखते हुए ही शायद सिद्दारमैया ने लोकसभा चुनावों से पहले पूरी रणनीति के तहत इस रिपोर्ट के इस्तेमाल की तैयारी की है।
दरअसल, आशंका जताई जा रही है कि इस सर्वे में कर्नाटक में अबतक सबसे ज्यादा प्रभावशाली माने जाने लिंगायतों और उसके बाद वोक्कालिगा की जनसंख्या कम बताई गई है।
इसी आशंका में ये दोनों समुदाय इस रिपोर्ट को जारी करने का विरोध करता रहा है। लेकिन, खुद सिद्दारमैया की राजनीति दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यकों तक सीमित रही है और शायद इस समय इस रिपोर्ट को स्वीकार करने के पीछे यही वजह हो सकती है।












Click it and Unblock the Notifications