कावेरी विवाद पर बीजेपी का कांग्रेस से सवाल, क्या 2024 के लिए DMK की मदद कर रही है?
कर्नाटक में तमिलनाडु को अतिरिक्त कावेरी का जल दिए जाने को लेकर मुद्दा गरम है। शुक्रवार को इसके खिलाफ कर्नाटक बंद भी बुलाया गया था। इस बीच बीजेपी ने सत्ताधारी कांग्रेस सरकार पर इस मामले को लेकर बहुत ही 'लापरवाह रवैया' अपनाने का आरोप लगाया है।
दक्षिण बेंगलुरु से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने आरोप लगाया है कि इस मामले को राज्य सरकार दोहरे तरीके से उठा रही है, ताकि तमिलनाडु में वह इंडिया ब्लॉक की अपनी सहयोगी सत्ताधारी डीएमके की मदद कर सके।

क्या 2024 के लिए डीएमके की मदद कर रही है?
भाजपा के युवा नेता ने कांग्रेस सरकार से पूछा है, 'मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री में कोई तालमेल नहीं है। राज्य सरकार अपने रवैए को लेकर बहुत ही लापरवाह है। क्या वे इस मुद्दे को दोहरे तरीके से इसलिए उठा रहे हैं, ताकि इससे 2024 में उनके INDI (इंडी) एलायंस की सहयोगी डीएमके को मदद मिलेगी।'
बेंगलुरु के लोगों के पास पीने का पानी नहीं रहेगा-तेजस्वी सूर्या
तेजस्वी सूर्या ने कहा, 'राज्य सरकार कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु को दे रही है। अगर कावेरी नदी का पानी इसी तरह से तमिलनाडु को जाता रहेगा, तो बेंगलुरु के लोगों के पास पीने का पानी नहीं रहेगा। कर्नाटक सरकार सीडब्ल्यूएमए (कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी) के सामने अपना केस रखने में नाकाम हो गई है।'
भाजपा नेता ने कहा कि तमिलनाडु को अतिरिक्त पानी देने से कर्नाटक के पेयजल की अपनी जरूरतें बहुत बुरी तरह से प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि इस 'बहुत ही गंभीर सच्चाई' को कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सामने रखने की आवश्कता है।
'राज्य में इस साल बारिश में 60% की कमी'
उन्होंने कहा, 'कर्नाटक में पानी की स्थिति बहुत ही गंभीर है। राज्य में इस साल बारिश में 60% की कमी रही है। राज्य को 106 टीएमसी पानी की जरूरत है और इसके पास सिर्फ 50 टीएमसी पानी है। कावेरी बेसिन के 34 तालुकाओं में से 32 को गंभीर रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। किसानों के पास अपनी खड़ी फसलों के लिए पानी नहीं है। इस परिस्थितियों में तमिलनाडु को अतिरिक्त पानी देने से राज्य के पेयजल आवश्यकताओं से बहुत ज्यादा समझौता करना पड़ेगा।'
कर्नाटक के साथ अन्याय नहीं होनी चाहिए-भाजपा सांसद
बीजेपी नेता का तर्क है, 'कावेरी राष्ट्रीय संपत्ति है। कोई अन्य राज्य संकट साझा नहीं कर रहा है, तो इसके लिए कर्नाटक के साथ अन्याय नहीं होनी चाहिए। यहां बारिश कम हुई है। जब आप सरप्लस साझा करते हैं तो आपको संकट साझा करने के लिए भी आगे आना होगा। यह कर्नाटक की दलील है, जो कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सामने दी गई है और मैं नहीं समझता कि इस स्थिति में कुछ भी अनुचित है। '
तमिलनाडु कर रहा है और पानी छोड़े जाने की मांग
एक तरफ कर्नाटक में इस मसले पर राजनीतिक भूचाल आया हुआ है, वहीं तमिलनाडु इससे भी ज्यादा पानी रिलीज करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कह रहा है। राज्य के जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन ने कहा है कि 5,000 क्यूसेक पानी रिलीज करने के लिए आदेश जारी करने को लेकर उनका राज्य सुप्रीम कोर्ट से अपील करेगा।
उन्होंने चेन्नई में कहा, 'हम कर्नाटक से फिर से 5,000 क्यूसेक पानी रिलीज करने की मांग करेंगे....हम सुप्रीम कोर्ट से अपील करेंगे और वो कर्नाटक सरकार को निर्देश जारी करेगा।' इससे पहले कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया ने कावेरी वॉटर रेग्यूलेशन कमेटी की ओर से कर्नाटक के बिलिगुंडलु से 28 सितंबर से 15 अक्टूबर, 2023 तक 3,000 क्यूसेक पानी जारी करने के आदेश पर जाने पर निराशा जताई थी। उन्होंने कहा था कि वे इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
कावेरी वॉटर रेग्यूलेशन कमेटी के इसी आदेश के खिलाफ किसान संगठनों और कन्नड़-समर्थक संगठनों ने शुक्रवार को कर्नाटक बंद बुलाया था। (इनपुट-एएनआई)












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