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ओडिशा: जिला टॉपर लड़की 'मजदूरी' करने को मजबूर, किताब-कॉपी खरीदने तक के पैसे नहीं

Karma Muduli News In Hindi: ओडिशा के मलकानगिरी जिले की कर्मा मुदुली पढ़ाई में जिला टॉपर रही हैं। सीमित संसाधन होने के बावजूद कर्मा मुदुली ने जिले में टॉप कर पिछड़ी जनजाती के लड़कियों के लिए मिसाल पेश की थी।

Karma Muduli Topper
Karma Muduli: ओडिशा से एक ऐसी लड़की की कहानी सामने आ रही है जो कि पिछले साल 2022 में जिला टॉपर रही थीं लेकिन अभी मजदूरी करने के लिए मजबूर है। आगे की पढ़ाई के लिए भीषण गर्मी में पसीना बहाने के लिए मजबूर हैं। मलकानगिरी की बोंडा जनजाति की छात्रा कर्मा मुदुली (Karma Muduli) कभी पूरे जिले में 12वीं में टॉपर रही थीं। इसके बाद कर्मा ने भुवनेश्वर में अपने स्नातक के लिए रमा देवी महिला विश्वविद्यालय में दाखिला लिया लेकिन उन्हें यहां गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। फिर वापस मजबूरी में घर वापस लौटना पड़ा।

किताब-कॉपी खरीदने के लिए भी पैसे नहीं
पढ़ाई और अध्ययन सामग्री के लिए अपने खर्चों का प्रबंधन करने के लिए पैसे नहीं होने के कारण, कर्मा मुदुली (Karma Muduli) घर वापस चली गईं और मल्कानगिरी में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करना शुरू कर दिया। कर्मा खैरापुट ब्लॉक के मुदुलीपाड़ा पंचायत के पडीगुड़ा गांव के मूल निवासी हैं।

पिछले साल कॉमर्स में जिला टॉपर रही थीं
कर्मा मुदुली ने 2022 में +2 कॉमर्स में 82.66% अंक हासिल किए। कलेक्टर से लेकर राज्यपाल तक, सभी ने शानदार उपलब्धि के लिए बोंडा जनजाति की लड़की कर्मा मुदुली (Karma Muduli) की प्रशंसा की थी। लेकिन अभी उसे मजदूरी करता देख कई लोगों को हैरानी हो रही है। वहीं सरकार की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अन्य स्टेशनरी आइटम और अन्य खर्चों के लिए उसके पास पैसे नहीं
हालांकि, ऊंची उड़ान भरने का सपना देखने वाली युवा लड़की ने कहा कि वह बहुत सारी परेशानियों के बीच घिरी हैं। भुवनेश्वर के एक चैरिटेबल ट्रस्ट ने उन्हें रमा देवी महिला विश्वविद्यालय में दाखिला दिलाने में मदद की। ट्रस्ट की ओर से उसे हर महीने छात्रावास के खर्च के लिए एक हजार रुपये दिए जा रहे हैं। हालांकि, अन्य स्टेशनरी आइटम और अन्य खर्चों के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं।

आईएएस बनने का सपना
कर्मा मुदुली (Karma Muduli) ने कहा कि पैसे की तंगी की वजह से मैं गर्मी की छुट्टियों में घर वापस आ गई हूं और इन खर्चों के लिए कुछ पैसे कमा रही हूं, जबकि मैं भुवनेश्वर में स्नातक की पढ़ाई पूरी कर रही हूं। कर्मा ने कहा कि वह एक आईएएस अधिकारी बनने की इच्छा रखते हैं। जिला प्रशासन ने मुझे 10,000 रुपये दिए थे और कहा गया था कि मेरी उच्च शिक्षा मुफ्त होगी। लेकिन यह वादा नहीं रखा गया था।

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