Kargil Vijay Diwas: हर रोज 3300 राउंड बमबारी, पाक सैनिक गिड़गिड़ाने को हो गए थे मजबूर
Kargil Vijay Diwas: हमें इस बात का पूरा यकीन है कि आपने कारगिल युद्ध पर बनी फिल्म बॉर्डर जरूर देखी होगी। इस फिल्म में सनी देओ की अगुवाई में जिस तरह से भारतीय सैनिक गोलियों और तोप के गोलों की बरसात करते हैं, उससे पाकिस्तान सैनिकों की चीखने की आवाज आने लगती है।
रील लाइफ में दिखाए गए ये दृश्य असल में युद्ध के मैदान में हुए थे। भारतीय सैनिक जिस तरह से हर रोज हजारों तोप के गोले पाकिस्तानी सैनिकों पर बरसा रहे थे, उससे उनके पसीने छूटने लगे थे। पाक सैनिकों की यह हालत हो गई थी कि उन्होंने यह तक कहना शुरू कर दिया था, कोई इस नर्क से उन्हें बचा ले।

धोखे से पाक घुसपैठियों ने चोटियों पर किया कब्जा
रिटायर्ड मेजर जनरल लखविंद सिंह ने युद्ध के दौरान की घटना को साझा करते हुए कहा कि हमारी सेना का मुख्य उद्देश्य यह था कि दुश्मन पर लगातार हमले करते हुए ऊंचाई पर पहुंचना था, जहां पर इन लोगों ने धोखे से कब्जा कर लिया था।
हर रोज ताबड़तोड़ बमबारी
भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि कारगिल युद्ध के दौरान सैनिक हर रोज तकरीबन 3300 गोले पाकिस्तानी सैनिकों पर दागते थे।
तकरीबन तीन महीने तक चले युद्ध में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानियों पर तोप के गोलों की बरसात कर डाली थी। भारतीय जवानों ने तीन महीने के भीतर पाक सैनिक और घुसपैठियों पर 2,93,600 राउंड तोप के गोले दागे थे।
मुश्किल हालात में डटे रहे जवान
कारगिल संघर्ष के दौरान भारतीय सेना को कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। उन्हें द्रास-कारगिल और बटालिक जैसे क्षेत्रों में 17,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर तैनात अच्छी तरह से प्रशिक्षित पाक घुसपैठियों और सैनिकों का सामना करना पड़ा था। अत्यधिक ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी की वजह से यहां हालात काफी मुश्किल भरे थे।
पैदल जवानों ने पाकिस्तानियों की कमर तोड़ी
मेजर जनरल लखविंदर सिंह युद्ध के दौरान की रणनीति को रणनीति साझा करते हुए कहा कि दुश्मन को कमजोर करना और नष्ट करना हमारा मुख्य उद्देश्य था ताकि हमारे पैदल सेना के जवान उन पर कब्जा कर सके।
हमारा मुख्य लक्ष्य अपनी टुकड़ियों को ऊपर ले जाने का तरीका खोजना था ताकि वे दुश्मन से सीधा लड़ सकें। बता दें कि मेजर जनरल सिंह 1999 में एक पर्वतीय युद्ध ब्रिगेड की कमान संभाल रहे थे इसी दौरान उन्हें श्रीनगर से द्रास-कारगिल जाना पड़ा था।
बोफोर्स तोपों ने बरपाया कहर
युद्ध के दौरान बोफोर्स 155 मिमी तोपों, मल्टी-बैरल रॉकेट लांचर और मोर्टारों की लगातार बमबारी ने पाकिस्तानी सेना में खलबली मचा दी थी। लगातार हो रही बमबारी से दुश्मनों की यह हालत हो गई थी कि पाक सैनिकों ने रेडियो प्रसारण को बीच में ही रोककर मदद की गुहार लगाई थी।
कोई तो बचा लो
पाकिस्तान के सैनिक अपने वरिष्ठों को संदेश देते थे, 'हमें बचाओ, हम नरक के बीच फंस गए हैं, लगातार यहां बमबारी हो रही है। जिस तरह से भारतीय सैनिकों ने ताबड़तोड़ बमबारी की उसने पाकिस्तान के घुसपैठियों और सैनिकों की कमर तोड़ने का काम किया था।
खुले मैदान से भारतीय जवानों ने बरसाया कहर
जनरल सिंह ने बताया ज़्यादातर तोपें 30 किलोमीटर लंबी सड़क पर तैनात की गई थीं। जबकि दुश्मन काफी ऊंची पहाड़ी पर तैनात था। इसके बावजूद भारतीय सेना की तोपें दुश्मन के लाइन ऑफ एक्शन को तोड़ने में सफल रहीं।
जनरल सिंह ने कहा कि अब हथियार बहुत बेहतर हैं, भारी हैं और लक्ष् को सटीक साधने में सक्षम हैं। हमें भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार रहने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने 155 मिमी कैलिबर पर ध्यान केन्द्रित करते हुए तोपों के चल रहे आधुनिकीकरण का समर्थन किया।












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