पाकिस्तान को धूल चटाने वाला वो कारगिल का हीरो, जिसकी गर्लफ्रेंड ने अब तक नहीं की शादी

नई दिल्ली, 27 जुलाई। कारगिल युद्ध में एक वीर सपूत को शहीद हुए 23 साल हो गए लेकिन ऐसा कभी नहीं लगा वो हमारे साथ नहीं है। मां भारती के इस वीर सपूत के जीवन के कुछ अनछुए पहलू हैं। जो हम सबके लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। शहीद की गर्लफ्रेंड अपने जीवन के 24 सावन बिता दिए हैं लेकिन अब तक शादी नहीं।

कौन थे विक्रम बत्रा?

कौन थे विक्रम बत्रा?

कारगिल युद्ध के 23 साल हो चुके हैं। जिसमें भारत के कई सैनिकों ने अपना बलिदान दिया। इन शहीदों में से कैप्टन विक्रम बत्रा का भी नाम शामिल है। बत्रा कारगिल वाल के वो हीरो हैं जिन्होंने कभी पाक सेना को धूल चटा दी थी। उन्होंने 5 सबसे महत्वूपर्ण प्वाइंट जीतने में अहम भूमिका निभाई थी। वो एक जख्मी अफसर को बचाते-बचाते शहीद हो गए।

रक्षाबंधन पर बहन ने कही ये बात

रक्षाबंधन पर बहन ने कही ये बात

सीमा बत्रा सेठी कारगिल हीरो कैप्टल विक्रम बत्रा की बहन हैं। वो कहती हैं कि 'हम हमेशा अपने सैन्य भाइयों को याद करते हैं, लेकिन कारगिल विजय दिवस पर भाई कैप्टन विक्रम बत्रा बहुत याद आते हैं। 23 साल हो गए लेकिन अभी भी ऐसा नहीं लगता कि वह हमारे साथ नहीं हैं।

1999 में कारगिल युद्ध में मोर्चा लेने गए बत्रा

1999 में कारगिल युद्ध में मोर्चा लेने गए बत्रा

हम्प और रॉकी नाब को जीतने के बाद विक्रम बत्रा को लेफ्टिनेंट से कैप्टन बनाया गया। विक्रम बत्रा को जून, 1999 में कारगिल युद्ध में भेजा गया। कश्मीर की 5140 नंबर की चोटी को पाकिस्तानी सेना से कब्जे से छुड़ाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई।

पाक आर्मी को चटाई धूल

पाक आर्मी को चटाई धूल

19 जून, 1999 की रात को कैप्टन विक्रम बत्रा ने इस चोटी को जीतने का प्लान बनाया। इसके लिए भारतीय तोपों की फायरिंग के बीच आधी रात में ही चढ़ाई शुरू कर दी गई। चोटी के करीब पहुंच कर तोपों से फायरिंग बंद कर दी गई। ये देख बंकरों में छुपे पाकिस्तानी सैनिक बाहर आए। इस पर भारतीय जवानों ने मशीनगनों से फायरिंग शुरु कर दी। बत्रा ने आर्टिलरी से कॉन्टैक्ट किया और दुश्मनों पर तोप से गोले दागते रहने को कहा। लेफ्टिनेंट विक्रम बत्रा ने अकेले ही नजदीकी लड़ाई में तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। 20 जून 1999 को सुबह साढ़े 3 बजे कैप्टन विक्रम बत्रा ने पाकिस्तानी सैनिकों को धूल चटाते हुए 5140 चोटी पर तिरंगा फहरा दिया। इसके बाद विकम बत्रा ने प्वाइंट 4700, जंक्शन पीक और थ्री पिंपल कॉम्प्लेक्स को भी जीत लिया। इस ऑपरेशन में किसी भारतीय सैनिक की जान नहीं गई। इसके बाद लेफ्टिनेंट विक्रम बत्रा को प्रमोट कर कैप्टन बना दिया गया।

17 हजार फीट की ऊंचाई पर मोर्चा लेते हुए बत्रा शहीद

17 हजार फीट की ऊंचाई पर मोर्चा लेते हुए बत्रा शहीद

कैप्टन विक्रम बत्रा को अगले प्वांइट 4875 को जीतने की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह समुद्र सतह से 17 हजार फीट की ऊंचाई पर थी। 4 जुलाई 1999 की शाम 6 बजे उन्होंने ऑपरेशन शुरू किया। बत्रा और उनकी टीम प्वाइंट 4875 पर मौजूद दुश्मन के बंकरों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर रही थी। इसी बीच बत्रा की टीम के दो सैनिक घायल हो गए। इस पर बत्रा उन्हें उठाकर नीचे ले जा रहे थे। इसी बीच पाकिस्तानी सैनिकों ने बत्रा को गोली लग गई। जिसके बाद वो शहीद हो गए।

या तो बर्फीली चोटी पर फतह या फिर तिरंगा से लिपटकर आऊंगा

या तो बर्फीली चोटी पर फतह या फिर तिरंगा से लिपटकर आऊंगा

कैप्टन बत्रा कहा करते थे हमें हर हाल में बर्फीली चोटी पर तिरंगा लहराना है। चोटी पर जाने ने पहले उन्होंने ये कहा था कि या तो चोटी पर तिरंगा लहराएगा या फिर मैं तिरंगे में लिपटकर आऊंगा। बत्रा को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से देश ने उन्हें सम्मानित किया।

गर्लफ्रेंड ने अब तक नहीं की शादी

गर्लफ्रेंड ने अब तक नहीं की शादी

विक्रम बत्रा की लाइफ पर एक फिल्म बनी जिसका नाम है 'शेरशाह'। दरअसल सेना में यही उनका कोड नाम हुआ करता था। बत्रा से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य इसमें दिखाएं गए हैं जो उनकी लाइफ के अनछुए पहलू कहे जा सकते हैं। फिल्म शेरशाह में विक्रम की जो लव स्टोरी दिखाई गई है। उनकी पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान विक्रम की मुलाकात एक लड़की से हुई। पहले तो दोनों दोस्त थे, लेकिन बाद में वो एक-दूसरे से प्यार करने लगे। विक्रम की शहादत के बाद उन्होंने अकेले ही जिंदगी गुजारने का फैसला लिया। विक्रम के पिता के मुताबिक आज उनकी उम्र 40 साल से ज्यादा की हो गई है, लेकिन उन्होंने शादी नहीं की।

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