अपने ही साथी की हत्या की साजिश के आरोप में संपादक गिरफ्तार
बेंगलुरू। जानेमाने कन्नड़ एडिटर व पत्रकार रवि बेलागेर को शुक्रवार को पुलिस ने अपने साथ काम करने वाले कर्मचारी की हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। रवि हाय बैंगलुरू नाम के टैबलॉयड के संपादक हैं। खबर के अनुसार रवि का नाम इस साजिश में तब आया जब पुलिस ने शॉर्पशूटर व कॉट्रैक्ट किलर ताहिर हुसने व शशिधर ने खुद रवि के इस साजिश में लिप्त होने की बात कही। दोनों का कहना है कि रवि अपने पूर्व सहयोगी पत्रकार सुनील हेग्गरवनहल्ली की हत्या की साजिश में लिप्त हैं। दोनों से पुलिस अवैध तरीके से हथियार रखने के मामले में पूछताछ कर रही थी, इसी दौरान शशिधर ने बताया कि रवि ने उसे सुनील की हत्या की सुपारी दी थी। रवि से सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने पूछताछ की थी और उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने शुक्रवार को पेश किया गया था, रवि को 18 दिसंबर तक के लिएे पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।

14 साल से एक दूसरे को जानते थे
बेंगलुरू के सिटी क्राइम ब्रांच ने इस जानकारी के मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की, जिसके बाद रवि को गिरफ्तार किया गया। न्यूज मिनट के अनुसार सुनील का कहना है कि उसे कभी भी इस बात का शक नहीं था कि उसके दोस्त ने मेरी हत्या की साजिश रची है। सुनील का कहना है कि हाय बेंगलुरू में मेरे और रवि के बीच कृछ मतभेद थे, जिसके बाद मैंने उसे छोड़ दिया था। जब गौरी लंकेश की हत्या हुई थी तो उन्होंने मुझे संपर्क किया था और कहा था कि आप टैबलॉयड के एडिटोरियल को लीड करें, मुझे लगा कि वह हमारे बीच के मतभेद को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। हम 14 साल से एक दूसरे के दोस्त हैं, मुझे कभी भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि मेरा इतना भरोसेमंद दोस्त इस तरह की साजिश करेगा।
इससे पहले भी फंस चुके हैं एक अन्य मामले में
यह एकलौता मामला नहीं है जिसमे रवि लिप्त हैं, इससे पहले जून में कर्नाटक विधानसभा स्पीकर केबी कोलीवाड़ ने दो पत्रकारों यलहंका वायस के पब्लिशर अनिल राज व रवि को एक साल के लिए जेल भेजने का फैसला सुनाया था, दोनों पर विधानसभा सदस्य के बारे में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का दोषी पाया गया था। कोलीवाड़ ने सदन में कहा था कि मैं प्रिविलेज कमेटी की सिफारिश को स्वीकृति देता हूं जिसमे दोनों ही पत्रकारों को एक साल के लिए जेलल व 10000 रुपए का जुर्माना देने को कहा गया है। अगर संपादक जुर्माना देने में विफल रहते हैं तो जेल की सजा को छह महीने के लिए और बढ़ा दिया जाएगा।
कोर्ट ने लगाई सजा पर रोक
द हिंदू के अनुसार कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि संपादकों के खिलाफ किसी भी तरह की गलत कार्रवाई नहीं की जाए, क्योंकि यह संवैधानिक मामला है, लिहाजा इस मामले पर कोर्ट को फैसला करना है, कोर्ट दोनों ही पक्षों की सुनवाई करेगी, जिसके बाद अपना फैसला देगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को चार हफ्ते के भीतर गलत भाषा के इस्तेमाल करने के मामले में अपना जवाब देने को कहा है।
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