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'कंगना रनौत को इलाज की जरूरत'.....DCW चीफ स्वाति मालीवाल ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर की ये मांग

नई दिल्ली, 14 नवंबर: फिल्म स्टार कंगना रनौत की ओर से आजादी को लेकर की गई 'भीख' वाली टिप्पणी के मुद्दे में दिल्ली महिला आयोग भी आधिकारिक तौर पर कूद पड़ा है। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने इस मसले पर रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को आयोग के लेटरहेड पर एक चिट्ठी लिखकर कहा है कि, कंगना रनौत को मानसिक इलाज की जरूरत है। उन्होंने राष्ट्रपति से से उनका पद्म श्री पुरस्कार छीनने की मांग की है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि स्वाति मालिवाल को दिल्ली महिला आयोग की ओर से इस तरह की चिट्ठी लिखने की जरूरत क्यों पड़ी है ?

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    कंगना के खिलाफ दिल्ली महिला आयोग ने लिखी राष्ट्रपति को चिट्ठी

    कंगना के खिलाफ दिल्ली महिला आयोग ने लिखी राष्ट्रपति को चिट्ठी

    दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को आधिकारिक चिट्टी लिखकर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत से पद्म श्री वापस लेने की मांग की है। उन्होंने रनौत पर राष्ट्रद्रोह के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है, क्योंकि रनौत ने टिप्पणी की थी कि 1947 में आजादी 'भीख' में मिली थी। उनकी यह टिप्पणी बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है और कई राजनीतिक पार्टियों की ओर से उनसे पद्म पुरस्कार वापस लेने की मांग की गई है। मालीवाल ने पहले भी इस मुद्दे में कूदने की कोशिश की थी, लेकिन अब उन्होंने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष होने के नाते राष्ट्रपति को विस्तार से इसपर चिट्ठी ही लिखी है।

    '..कंगना रनौत की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है'

    '..कंगना रनौत की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है'

    मालीवाल ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी में कहा है कि 'ऐसा लगता है कि कंगना रनौत की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वह आदतन अपने ही देश के लोगों के खिलाफ जहर उगलती हैं और लगातार उन लोगों पर हमला करने के लिए नीच भाषा का इस्तेमाल करती हैं, जिनसे वह सहमत नहीं होती हैं।' स्वाति मालिवाल ने राष्ट्रपति से कहा है कि उनकी टिप्पणियों को तुरंत संज्ञान में लें, 'जिसकी प्रकृति राष्ट्रद्रोही है।' मालीवाल ने दावा किया है कि, 'अभिनेत्री के बयान से लगता है कि उनमें हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों जैसे कि महात्मा गांधी, भगत सिंह और अनगिनत लोगों के खिलाफ नफरत है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया।'

     'वो आजादी नहीं थी, वो 'भीख' थी.....'

    'वो आजादी नहीं थी, वो 'भीख' थी.....'

    दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने लिखा है कि 'रनौत के बयानों ने लाखों भारतीयों की भावनाओं को आहत किया है और जो देशद्रोह के जैसा है।' स्वाति मालिवाल को लगता है कि कंगना का बर्ताव देश के सर्वोच्च पुरस्कार को प्राप्त करने वाले की तरह नहीं है। उन्होंने राष्ट्रपति के सामने दावा किया है, 'उसका व्यवहार किसी भी तरह से देश के सर्वोच्च पुरस्कार पाने वाले के मुताबिक नहीं है।' दरअसल, हाल में कंगना एक इंटरव्यू वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'वो आजादी नहीं थी, वो 'भीख' थी........और जो आजादी मिली है वो 2014 में मिली है।' कंगना के इतना कहते ही तालियां बज उठीं।

    कंगना रनौत को इलाज की जरूरत- स्वाति मालीवाल

    ट्विटर पर अपनी चिट्ठी को शेयर करते हुए मालीवाल ने लिखा है, "कंगना रनौत ऐसी महिला है जिसे गांधी भगत सिंह की शहादत मजाक लगती है और लाखों लोगों की त्याग-तपस्या से हासिल आजादी भीख लगती है! इसको पुरस्कार की नही इलाज की जरूरत है! मैंने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है कि तुरंत रनौत का पद्म श्री वापस लेके उसपे राष्ट्रद्रोह की एफआईआर होनी चाहिए!" हालांकि, खासकर विपक्ष के नेताओं और भाजपा सांसद वरुण गांधी के हमलों से भी कंगना विचलित नहीं हैं और उन्होंने फिर से अपनी बातों को जायज ठहराते हुए कहा है कि 'अंग्रेजों के असंख्य अपराधों के लिए उनके खिलाफ भारत में मुकदमा क्यों नहीं चलाया गया.....बताइए मैं गलत कहां हूं.....'

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