Kalka-Shimla Railway: 120 साल पुरानी ट्रेन का हो रहा है कायाकल्प, क्या बदलेगा? देखिए
Kalka-Shimla Railway: इस रूट पर सौ साल बाद अत्याधुनिक सुविधाओं वाली ट्रेनें चलाने की तैयारी हो चुकी है। अब इस यात्रा का आनंद और भी बढ़ जाएगा। पुरानी टॉय ट्रेनें भी चलती रहेंगी।

120 साल से आम जनता को दिलकश सफर करा रही ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे का पहली बार पूरी तरह से कायाकल्प हो रहा है। इस यूनेस्को हेरिटेज रेलवे लाइन पर अब स्वदेशी अत्याधुनिक कोच वाली ट्रेनें चलने वाली हैं। पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री में इसके लिए अत्याधुनिक कोच तैयार किए गए हैं।

कालका-शिमला ट्रेनों में अत्याधुनिक कोच लगेंगे
कालका-शिमला यूनेस्को हेरिटेज रेलवे की ट्रेनों में अब जिस तरह की कोच वाली ट्रेनें चलाई जाने वाली हैं, वह पैनोरमिक व्यू (विहंगम दृश्य) वाली होंगी। इन ट्रेनों में अब मिनी पैंट्री भी होगी और बायो-टॉयलेट की भी सुविधा दी जाएगी। अब इन ट्रेनों में एसी और नॉन-एसी दोनों तरह के कोच लगाए जाएंगे।

अत्याधुनिक स्वदेशी ट्रेनों की ट्रायल
मौजूदा समय में कालका-शिमला रेलवे की ट्रेनों में एसी कोच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला ने नैरो-गेज की चार अत्याधुनिक कोचें तैयार की हैं। इनमें एसी एक्जीक्यूटिव चेयर कार (12 सीट), एसी चेयर कार (24 सीट), नॉन एसी चेयर कार (30 सीट) और जेनरेटर/लगेज वैन शामिल हैं। इस नई ट्रेन का ट्रायल रन शुरू कर दिया गया है।

पुरानी टॉय ट्रेनें भी चलती रहेंगी
इस रूट पर अभी जो टॉय ट्रेनें चल रही हैं, वह भी चलती रहेंगी। उनके अतिरिक्त यह अत्याधुनिक कोच वाली ट्रेनें एक साल के अंदर चलाए जाने की संभावना है। इन ट्रेनों की छतों में भी शीशे लगाए गए हैं, जिससे रमणीक पहाड़ों और हिमाचल की प्रकृति को देखने का आनंद बढ़ना स्वाभाविक है।

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अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी नई ट्रेन
अत्याधुनिक कोचों में पावर विंडो और पावर डोर लगाए गए हैं। कुर्सियां पूरे 180 डिग्री तक घूम सकती हैं, जिससे यात्री को अपनी मर्जी से उसे घुमाने की सुविधा मिलती है। ट्रेन में सीसीटीवी और फायर अलार्म भी लगाए गए हैं। इन कोचों में कूलिंग के साथ-साथ सर्दियों में हीटिंग की सुविधा मिलेगी।

यात्रा का आपका अनुभव बढ़ा देगा- भारतीय रेलवे
कालका-शिमला रेल कॉरिडोर पर 762 मिलीमीटर गेज वाली ट्रैक बिछी हुई है। इसके लिए भारतीय रेलवे ने रेल कोच फैक्ट्री को अध्याधुनिक ट्रेन सेट की डिजाइन तैयार करने और निर्माण के लिए कहा था। रेल मंत्रालय ने इसके बारे में कहा है आरसीएफ ने जो कोच बनाए हैं वह 'शानदार सीटों, मंत्रमुग्ध कर देने वाली कांच की खिड़कियों और अन्य आधुनिक सुविधाओं' की वजह से यात्रा का आपका अनुभव बढ़ा देगा।

कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी से मिलनी है मंजूरी
इस हेरिटेज कॉरिडोर पर अभी जो एतिहासिक ट्रेनें चलती हैं, वह रेलवे के मोगलपुरा वर्कशॉप में बनी हुई हैं, जो कि अब पाकिस्तानी रेलवे का हिस्सा है। विस्टाडोम कोच वाली नई ट्रेन ट्रायल रन पूरा होने और कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी से मंजूरी मिलने के बाद चलने लगेगी। तारीख पर फैसला रेल मंत्रालय लेगा।

कालका-शिमला रेलवे का इतिहास
कालका-शिमला रेलवे उत्तर रेलवे के अंबाला डिविजन में आता है। यूनेस्को की ओर से इसे 10 जुलाई, 2008 को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था। अंग्रेजों ने 1864 में शिमला को भारत की गृष्मकालीन राजधानी घोषित किया था। इसी वजह से उसे भारतीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ा गया था। गिनीजी बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार देश की सबसे छोटी रेलवे का संचालन आम लोगों के लिए 9 नवंबर, 1903 से शुरूकिया गया था।













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