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Happy new year 2020: विकसित देश बनने में कितना लंबा है भारत का सफर?

नई दिल्ली- पिछले 20 वर्षों में देश ने काफी प्रगति की है। विकास के ज्यादातर मापदंडों पर अपना देश उससे भी ज्यादा आगे बढ़ा है, जितना एपीजी अब्दुल कलाम के विजन-2020 में सोचा गया था। लेकिन, ये सच्चाई है कि जब हम इस सफर के 20 साल पूरे कर रहे हैं तब भी हम अपने लक्ष्य से वर्षों दूर हैं। देश ने इंफ्रास्ट्रक्चर, सोशल सेक्टर,इकोनॉमी सब दिशा में बहुत प्रयास किया, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। 2020 नहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने 2024 तक देश को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का सपना देखा है, लेकिन आज दावे के साथ यह कहने के लिए कोई तैयार नहीं होगा कि इस लक्ष्य को हासल करने में कितने पापड़ बेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में आइए देखते हैं कि लोकप्रिय पूर्व राष्ट्रपति कलाम का सपना पूरा करने में भारत को अभी और कितना वक्त लग सकता है?

कहां पिछड़ गए हम ?

कहां पिछड़ गए हम ?

इंसान को आधार में रखकर दुनिया में अपनी तरह के पहले वैज्ञानिक सर्वे में शिक्षा और स्वास्थ्य पर हुए निवेश की रैंकिंग में भारत का स्थान 158वां आया है। सूडान (157वां) जैसा देश भी भारत से ऊपर है और नाम्बिया (159वां) उससे ठीक पीछे है। वहीं, अमेरिका (27वें) और चीन (44वें स्थान पर है।) यानि, जो भारत पिछले 20 वर्षों में कलाम के विजन के मुताबिक विकसित नहीं हो सका, आगे उसकी कोशिशें जारी रखने के लिए कुछ मापदंडों पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। मसलन, ऐसी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं जो सबको आसानी से उपलब्ध हो, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक सबकी समान रूप से पहुंच हो, गरीबी से पूरी तरह छुटकारा मिल जाय, सैनिटेशन इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत काम हुआ है, लेकिन उसे लोगों की आदत में शामिल करने की अभी भी आवश्यकता है। एक चुनौती प्रदूषण पर नियंत्रण करने की भी आ खड़ी हुई है और कुपोषण आज भी हमारे लिए चिंता का विषय बना हुआ, जिसमें काफी काम हुआ है, लेकिन अभी और होना जरूरी है। जब तक इन चीजों पर ज्यादा निवेश नहीं किए जाएंगे, भारत को विकास के अगले पायदान पर ले जाना मुश्किल है।

गांव-शहर के अंतर को पाटना जरूरी

गांव-शहर के अंतर को पाटना जरूरी

किसी भी अर्थव्यवस्था के विकास का एक सबसे बड़ा संकेत तेज गति से शहरीकरण को माना जाता है। भारत की अधिकतर आबादी अभी भी गांवों में बसती है, खासकर पूर्वी भारत में। भारत में शहरी जनसंख्या अभी भी सिर्फ 35% है, जबकि 65% लोग गांवों में ही रह रहे हैं। अगर दुनिया के विकसित देशों से तुलना करें तो हम अभी उस अवस्था में आने से काफी पीछे हैं, क्योंकि ज्यादातर विकसित देशों में शहरी आबादी 50% या उससे भी अधिक है। यानि, इस 15% के फासले को पाटना जरूरी है, लेकिन शहरों में उनके लिए इतना इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। जो है, वह अभी ही पूरा नहीं हो रहा है। अर्बन मिशन और स्मार्ट सिटी योजना की गति बहुत ही धीमी नजर आती है।

2030 तक हासिल किया जा सकता है लक्ष्य

2030 तक हासिल किया जा सकता है लक्ष्य

प्रवासियों के प्रति बेरुखी और शहरी रोजगारों में कमी से श्रमिकों की अंतरराज्यीय आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में 2024 तक देश को 5 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यस्था बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के विजन को साकार करने के लिए ज्यादा समावेशी एजेंडे की आवश्यकता है। डिजिटिल इंडिया में बहुत ज्यादा काम हुआ है, लेकिन अभी भी उस तक सबकी पहुंच नहीं है। खासकर पिछले कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर जिस तरह से ब्रेक लगने की स्थिति पैदा हुई है, उससे विकसित भारत का सपना थोड़ा और दूर हो गया लगता है। अलबत्ता, दुनियाभर के एक्सपर्ट मानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अभी भी बहुत ही ज्यादा गुंजाइश है, लेकिन पूर्ण लक्ष्य प्राप्ति के लिए अभी कम से कम एक दशक तक लगातार कोशिश करते रहने की जरूरत है, ताकि 2020 न सही, 2030 तक शायद हम उस लक्ष्य को अवश्य प्राप्त कर सकते हैं। यूं समझें कि हम डॉक्टर कलाम के लक्ष्य से भटके नहीं हैं, लेकिन अभी हमें अपने प्रयास जारी रखने की आवश्यकता है।

अब तक क्या हो सका है?

अब तक क्या हो सका है?

सरकार के दावे के मुताबिक देश के हर गांव में बिजली पहुंच चुकी है। 2 करोड़ 62 लाख 84 हजार से ज्यादा घरों तक सौभाग्य योजना के तहत पिछले दो वर्षों में बिजली कनेक्शन लगाए गए हैं। 1,29,973 ग्राम पंचायत ऑप्टिकल फाइबर से जुड़ चुके हैं। स्वच्छ भारत अभियान के तहत देश भर के घरों में 10 करोड़ 76 लाख शौचालय बनाए गए हैं। देश के 5,99,963 गांव ओपन डिफेक्शन फ्री घोषित हो चुके हैं। 2014 तक देश में जो सैनिटेशन कवरेज 38% था, वह अब 99% को पार कर चुका है। पीएम आवास योजना के तहत 1 करोड़ 78 लाख घरों का निर्माण पिछले कुछ वर्षों में किया गया है। बच्चों का कौशल बढ़ाने के लिए देश के 8,878 स्कूल अटल टिंकरिंग लैब से जुड़ चुके हैं। जन-आरोग्य योजना के तहत 64 लाख लोगों का मुफ्त इलाज हुआ है और उसके दायरे में देश की करीब 50 करोड़ आबादी को लाने का दावा किया जा रहा है। ग्रीन एनर्जी के तहत उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 8 करोड़ 3 लाख से ज्यादा गरीब महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। सामाजिक सुरक्षा के तहत असंगठित क्षेत्र के 42 करोड़ से ज्यादा लोगों को पेंशन कवरेज से जोड़ा जा चुका है।

2022 तक का लक्ष्य क्या है ?

2022 तक का लक्ष्य क्या है ?

मौजूदा सरकार ने साल 2022 तक के लिए भी देश के विकास के मद्देनजर कई लक्ष्य तय कर रखे हैं। इसके तहत देश के हर परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराना है। इस योजना पर तेजी से काम चल भी रहा है। सरकार ने देश के किसानों की आय भी आजादी की 75वीं वर्षगांठ तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन, फिलहाल यह कार्य बहुत ही कठिन मालूम पड़ रहा है।

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