CJI यौन शोषण मामले में जस्टिस लोकुर का बड़ा बयान

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ जिस तरह से यौन शोषण का आरोप लगा था, उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जज इस मुद्दे पर अपनी अलग-अलग राय के साथ सामने आ रहे हैं। जस्टिस मद बी लोकुर जोकि दिसंबर माह में रिटायर हुए हैं, उन्होंने कहा कि जिस तरह से पीड़ित महिला कर्मचारी के साथ बर्ताव किया गया वह सही नहीं है। बता दें कि जस्टिस लोकुर उन जजों में शामिल थे जिन्होंने जस्टिस रंजन गोगई और अन्य के साथ तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ केस के आवंटन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था।

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महिला के साथ भेदभाव

जस्टिस लोकुर ने कहा कि शिकायतकर्ता को भी इस पूरे मामले की जांच से अवगत कराना चाहिए था और उसे बी इस मामले की जांच की प्रति मुहैया कराई जानी चाहिए थी, उन्हो्ंने कहा कि महिला केे साथ इस मामले में भेदभाव हुआ। बता दें कि जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन शोषण के मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक कमेटी ने की थी। इसी कमेटी की रिपोर्ट को शिकायतकर्ता को मुहैया कराए जाने की बात जस्टिस लोकुर ने की है। जस्टिस लोकुर ने कहा कि इस प्रति को शिकायतकर्ता को मुहैया कराई जानी चाहिए थी, जिससे कि शिकायतकर्ता और अन्य लोगों को अपने सवाल का जवाब मिल सकता।

आंतरिक कमेटी पर खड़ा किया सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने आंतरिक जांच कमेटी की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने का फैसला लिया है, इसपर सवाल खड़ा करते हुए जस्टिस लोकुर ने कहा कि जिस वजह का हवाला इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों ने दिया है वह सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा जयसिंह बनाम सुप्रीम कोर्ट केस का हवाला देते हुए इस आंतरिक जांच कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया था। इसपर जस्टिस लोकुर ने कहा कि यह फैसला इस मामले से बिल्कुल अलग है और इसका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है।

जजों ने गलत समझा

जस्टिस लोकुर ने कहा कि पहली बात तो यह कि आंतरिक कमेटी इन हाउस नहीं थी, जिसे जजों ने गलत समझा है। दूसरी बात इस मामले में फैसला आधिकारिक इन हाउस जांच के तौर पर दिया गया था। हालांकि कोर्ट के फैसले में यह नहीं कहा गया है कि जांच की प्रति शिकायतकर्ता को नहीं दी जाएगी। जस्टिस लोकुर ने सवाल खड़ा किया है कि क्या इस जांच रिपोर्ट को संबंधित जज स्वीकार करेंगे, क्या इसका कोई असर होगा। उन्होने कहा कि हमे याद रखना चाहिए कि आंतरिकक कमकेटी का गठन ऐसे व्यक्ति ने किया जिसपर अवांक्षित तरह से महिला को छूने का आरोप है, खुद जज ने अपने खिलाफ जांच के लिए जजों को नियुक्त किया।

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