'स्किन टू स्किन टच' का विवादित फैसला देने वाली जस्टिस गनेडीवाला को झटका, नहीं बनेंगी स्थायी जज- सूत्र

नई दिल्ली, 17 दिसम्बर। यौन उत्पीड़न के एक मामले में 'स्किन से स्किन' का विवादित फैसला देने वाली बॉम्बे हाईकोर्ट की जज पुष्पा वी गनेडीवाला को बड़ा झटका लगा है। एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि जस्टिस गनेडीवाला को हाईकोर्ट में स्थायी जज नही बनाया जाएगा। यह दूसरी बार है जब सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियन ने हाईकोर्ट जज के रूप में जस्टिस गनेडीवाला की पदोन्नति को खारिज कर दिया है।

Judge

पुष्पा गनेडीवाला वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में अस्थायी जज के रूप में नियुक्त हैं। सुप्रीम कोर्ट से दूसरी बार पदोन्नति खारिज होने का मतलब है कि अब फरवरी में कार्य विस्तार की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें वापस से जिला जज की पुरानी पोस्ट पर जाना होगा।

इसी साल केंद्र सरकार ने जस्टिस गनेडीवाला को कार्यविस्तार दिया था लेकिन इसकी अवधि दो साल की जगह एक साल कर दी थी।

केंद्र के फैसला लेने के एक महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने पैनल के एक दुर्लभ मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उनकी स्थायी नियुक्ति की पुष्टि करने के लिए सरकार को अपनी सिफारिश वापस ले ली थी। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों ने कहा था कि जस्टिस गनेडीवाला को ऐसे मामलों में अधिक एक्सपोजर की जरूरत है।

इस फैसले से आईं सुर्खियों में
जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला अपने कई फैसलों की वजह से सुर्खियों में रही थीं। इनमें सबसे चर्चित फैसला एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले का था। बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े पॉक्सो कानून की व्याख्या के दौरान की गई टिप्पणियों की पूरे देश में चर्चा हुई।

19 जनवरी 2021 को जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में फैसला देते हुए कहा था कि शरीर से शरीर (स्किन टू स्किन) का स्पर्श हुए बिना या कपड़ों के ऊपर से नाबालिग पीड़िता को स्पर्श करना पॉक्सो कानून के तहत यौन हमला नहीं माना जा सकता। फैसले में आगे कहा था कि पॉक्सो कानून के तहत अपराध करार देने के लिए यौन इच्छा के साथ ही शरीर का शरीर से सम्पर्क भी होना चाहिए।

क्या था मामला?
39 वर्षीय एक व्यक्ति पर साल 2016 में 12 साल की पीड़िता पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि आरोपी ने बच्ची को पकड़ा था जिस पर अदालत ने पाया कि यह पॉक्सो के तहत यौन महाल नहीं बल्की आईपीसी की धारा 354 के तहत महिला के साथ छेड़छाड़ का अपराध है। जज ने अपने फैसले के समर्थन में दलील दी थी कि पीड़िता कपड़े में थी और आरोपी का उससे स्किन टू स्किन संपर्क नहीं हुआ ऐसे में इसे यौन हमला नहीं माना जा सकता।

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