अगले सप्ताह तक संसद में पेश हो सकता है न्यायिक नियुक्ति कानून

जज करतें हैं जजों की नियुक्ति
न्यायिक प्रणाली में फिलहाल जज ही जजों की नियुक्ति करते है। इससे यह भी पता नहीं चल पाता है कि किस जज के साथ न्याय हुआ है और किस जज के साथ भेदभाव हुआ है। इससे कई आशंकाएं भी उभरती हैं और भ्रष्टाचार होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। गौरतलब है कि गत दिनों भ्रष्टातार की न्यायिक प्रणाली में सेंध का खुलासा प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेरमैन मार्कंडेय काटजू ने किया है। जिसके बाद इस मुद्दे पर बहस भी शुरू हो गई है।
पारदर्शिता लाने का होगा प्रयास
अभी जो नया विधेयक लाने पर विचार हो रहा है। उसमें अधिक से अधिक पारदर्शिता लाने पर जोर दिया जा रहा है। हालाकि अंदरूनी रूप से इस पर भी कई बुद्धिजीवियों और नेताओं में मतभेद हैं। लेकिन देखना यह होगा कि इस नए विधेयक आने पर भी क्या न्यायिक प्रणाली में भ्रष्टाचार की सेंध को रोक पाने में सफलता मिल पाएगी।












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