अपने फैसले से चिदंबरम और रतुल पुरी को बेचैन कर देने वाले कौन हैं जस्टिस गौड़?

अपने फैसले से चिदंबरम और रतुल पुरी को बेचैन कर देने वाले कौन हैं जस्टिस गौड़?

नई दिल्ली। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने आईएनएक्स मीडिया के केस में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। दिल्ली हाईकोर्ट के जज ने उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में तथ्यों से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि याचिकाकर्ता ही इस केस में मुख्य साजिशकर्ता है। चिदबंरम की याचिका खारिज करने वाले जस्टिस सुनील गौड़ ने इस मामले को 'मनी लॉन्ड्रिंग का क्लासिक केस' बताते हुए कहा कि अगर आरोपी को जमानत दी गई तो समाज में एक गलत संदेश जाएगा। जस्टिस सुनील गौड़ इस फैसले के 48 घंटे बाद यानी शुक्रवार को ही रिटायर हो रहे हैं।

1984 में शुरू किया था करियर

1984 में शुरू किया था करियर

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, जस्टिस सुनील गौड़ ने 1984 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से अपना करियर शुरू किया था और 1995 में दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा में शामिल हुए। जस्टिस गौड़ 2008 से उच्च न्यायालय में हैं। जस्टिस सुनील गौड़ ने मंगलवार को ही एक और हाई प्रोफाइल मामले, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भतीजे रतुल पुरी के बैंक धोखाधड़ी मामले में सुनवाई की। रतुल पुरी की अग्रिम जमानत याचिका को भी जस्टिस सुनील गौड़ ने खारिज कर दिया। रतुल पुरी की गिरफ्तारी के बाद जस्टिस सुनील गौड़ ने कहा कि एक सही और प्रभावी जांच के लिए उनसे कस्टडी में पूछताछ जरूरी है। (फोटो: साभार एनडीटीवी)

इससे पहले चिदंबरम को मिली हुई थी राहत

इससे पहले चिदंबरम को मिली हुई थी राहत

गौरतलब है कि यूपीए की सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम को इस मामले में इससे पहले हाईकोर्ट से गिरफ्तारी से राहत मिली हुई थी। चिदंबरम के ऊपर वित्त मंत्री रहते हुए आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी देने में अनियमित तरीके से मदद करने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय और CBI इस बात की जांच कर रहे हैं कि 2007 में पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने बोर्ड की मंजूरी कैसे मैनेज की थी। कार्ति को पिछले साल 28 फरवरी को आईएनएक्स मीडिया को FIPB निकासी की सुविधा देने के लिए कथित रूप से रकम स्वीकार करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। मीडिया कंपनी आईएनएक्स मीडिया के खिलाफ सीबीआई ने 15 मई 2017 को एक एफआईआर दर्ज की थी।

चिदंबरम पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी

चिदंबरम पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी

आपको बता दें कि अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद पी चिदंबरम पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। बुधवार को सीबीआई की टीम एक बार फिर चिदंबरम के घर पहुंची, लेकिन वो वहां नहीं मिले। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने चिदंबरम के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है। सीबीआई की एक टीम उनके आवास पर भी डेरा डाले हुए है। इससे पहले मंगलवार को सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की टीम दिल्ली के जोरबाग स्थित उनके आवास पर पहुंची थी लेकिन चिदंबरम नहीं मिले। चिदंबरम और उनके ड्राइवर का मोबाइल फोन स्विच ऑफ आ रहा है। इसके बाद सीबीआई की टीम ने उनके घर पर नोटिस चिपकाकर दो घंटे में सीबीआई दफ्तर में हाजिर होने को कहा था, लेकिन चिदंबरम सीबीआई दफ्तर नहीं पहुंचे।

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