JPC for Waqf: वक्फ जेपीसी की बैठक में हंगामा, MP जगदंबिका पाल का बड़ा आरोप, कहा- कल्याण बनर्जी ने दी गाली
JPC meeting for Waqf Draft Law: वक्फ बोर्ड कानून संशोधन को लेकर प्रस्तावित मसौदा पर चर्चा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति की पहली बैठक विवादास्पद रही। विपक्षी सदस्यों ने तर्क दिया कि उन्हें मसौदा कानून की समीक्षा के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। बैठक के दौरान जमकर हंगामा हुआ। ऐसे में सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा।
बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, "दो बार हमें सदन स्थगित करना पड़ा। आज हमने जम्मू-कश्मीर के मीरवाइज उमर फारूक प्रतिनिधिमंडल को समय दिया, जो विपक्ष की मांग थी... पहली बार हमने औवेसी साहब को भी इसमें शामिल होते देखा, जो आमतौर पर संसद में बिलों में भाग नहीं लेते हैं बिल और जिस तरह से कल्याण बनर्जी ने असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल किया और मेरे साथ दुर्व्यवहार किया, मुझे लगता है कि यह जानबूझकर किया गया था।"

जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने आगे कहा, "कल्याण बनर्जी ने मेरे खिलाफ असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल किया और मुझे गाली दी, मैं उनसे अनुरोध करता रहा कि उन लोगों को बोलने दें, जिन्हें हमने आमंत्रित किया था।"
बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, "मैं उनसे अनुरोध करता रहा, लेकिन वह हंगामा करने के लिए तैयार थे और निशिकांत दुबे ने प्रस्ताव रखा कि उन्हें और अन्य लोगों को निलंबित कर दिया जाए।"
ये सदस्य हुए निलंबित
जिन सदस्यों को निलंबित किया गया उनमें कल्याण बनर्जी, मोहम्मद जावेद, ए राजा, असदुद्दीन ओवैसी, नसीर हुसैन, मोहिबुल्लाह, मोहम्मद अब्दुल्ला, अरविंद सावंत, नदीम-उल हक और इमरान मसूद शामिल हैं।
इन मुस्लिम सांसदों ने वक्फ कानून संशोधन का किया विरोध
सांसद इमरान मसूद ने कहा, " सबकुछ जल्दबाजी में हो रहा है, पहले दिन से ही ऐसा लग रहा था कि वे वक्फ संपत्तियों को हड़पना चाहते हैं। हम 25 और 26 जनवरी को बैठक करने पर सहमत हुए थे, लेकिन अब उन्होंने इसे 27 जनवरी तक के लिए टाल दिया है। वे मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं। वे बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं... वे सिर्फ वक्फ संपत्तियों को कुचलना चाहते हैं। हम सभी चाहते थे कि 27 जनवरी को होने वाली बैठक को 31 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया जाए। जेपीसी में स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।"
वहीं मुताहिदा मजलिस-ए-उलेमा के प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर जेपीसी की बैठक में जम्मू-कश्मीर, लेह और कारगिल के उलेमाओं के एक प्रतिनिधिमंडल की ओर से बात की। उन्होंने प्रस्तावित संशोधनों पर कड़ा विरोध व्यक्त किया और कहा कि वक्फ कानून में संशोधन जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए अस्वीकार्य है। इस कानून संशोधन का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को कमजोर करना है।
मीरवाइज ने कहा, "वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों के हित में नहीं हैं। यह समुदाय को कमजोर करने का एक प्रयास है और हम उम्मीद कर रहे थे कि विधेयक पर आगे बढ़ने से पहले लोगों की वास्तविक चिंताओं को समझने के लिए प्रतिनिधिमंडल कश्मीर का दौरा करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।"












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