रिंकू सिंह: अलीगढ़ में पोछा लगाने की नौकरी से IPL में पहुँचने तक

आम तौर पर लोग जीवन में या फिर काम धंधों में विकल्पों की बात करते हैं, लेकिन जिनके पास कोई विकल्प नहीं होता वे क्या करते हैं?

वे ख़ुद को उसी काम में झोंक देते हैं और फिर एक दिन ऐसा आता है कि अलीगढ़ के मामूली परिवार का कोई लड़का आईपीएल का स्टार बन जाता है.

जी हाँ, महज़ 24 साल में रिंकू सिंह की कामयाबी बताती है कि अगर आपके इरादे पक्के हों और हौसले बुलंद तो आसमान का सीना भी चीर सकते हैं.

Journey of Rinku Singh From wiping to IPL

रिंकू सिंह की पूरी कहानी सुनकर आपको ऐसा ही लगेगा.

लेकिन पहले बात सोमवार को खेले गए मुक़ाबले की. आईपीएल में राजस्थान रायल्स के ख़िलाफ़ रिंकू सिंह जब बल्लेबाज़ी करने के लिए उतरे तो उनकी टीम के सामने 44 गेंदों पर 61 रन बनाने की चुनौती थी.

ये चुनौती मुश्किल नहीं थी लेकिन पिच पर गेंद घुमकर आ रही थी और रिंकू सिंह का ये आईपीएल में महज़ तीसरा मुक़ाबला था. लेकिन बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ ट्रेंड बोल्ट की पहली गेंद पर बाउंड्री जमाकर रिंकू सिंह ने अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए थे.

उनके साथ तब दूसरी छोर पर नीतीश राणा 31 रन बनाकर खेल रहे थे. लेकिन यहाँ से राणा सहयोगी भूमिका में आ गए और रिंकू सिंह ने इस मौक़े को अपने जीवन को बदलने वाला मौक़े में तब्दील कर दिया.

अपनी तेज़ गति से ख़ासे प्रभावित करने वाले कुलदीप सेन की गेंद पर पैडल फ्लिक करके लगाया छक्का हो या फिर युजवेंद्र चहल की लगातार दों गेंदों पर बाउंड्री, रिंकु सिंह ने सुनील गावस्कर सहित तमाम कमेंटेटरों को अपना दीवाना बना लिया.

राणा-रिंकु की साझेदारी

पाँच गेंद पहले कोलकाता ने मैच भले नीतीश राणा के छक्के से जीता हो लेकिन क्रिकेट फैंस का दिल रिंकू सिंह ने जीता. उन्होंने महज 23 गेंदों पर छह चौके और एक छक्के की मदद से नाबाद 43 रन ठोके.

कोलकाता की टीम में रिंकू सिंह की नितीश राणा ही सबसे नज़दीकी है और इसका फ़ायदा उन्हें इस पारी में ख़ूब मिला. मैच के बाद रिंकू सिंह ने कहा भी, "भैया मुझे लगातार कहते रहे कि रुक कर मैच फिनिश करते हैं."

आईपीएल प्रसारक स्टार स्पोर्ट्स पर सुनील गावस्कर ने उनके शॉट्स से लेकर दबाव के पलों पर नियंत्रण रखने की क़ाबिलियत का इशारा किया वहीं कोलकाता के कप्तान श्रेयस अय्यर ने रिंकू सिंह के बारे में बताया, "उन्होंने दबाव के पलों में शानदार खेल दिखाया. निश्चित तौर पर वे भविष्य के सितारे है. पहले मैच से ही नहीं लगा है कि वे न्यू कमर हैं."

रिंकू सिंह को इस मुक़ाबले में शानदार खेल दिखाने के लिए मैन ऑफ़ द मैच भी आंका गया. मैन ऑफ़ द मैच के बाद हर्षा भोगले के सामने रिंकू सिंह हिंदी में बोले. उनका आत्मविश्वास कहीं से डगमगता नज़र नहीं आया. उन्हें मालूम था कि भोगले को उनकी बल्लेबाज़ी पर बात करने के लिए अंग्रेजी से हिंदी पर आना होगा.

पाँच साल से केकेआर का साथ

उन्होंने हर्षा भोगले से कहा, "पाँच साल हो गया है, खेलते-खेलते, इंतज़ार करते-करते." तो हर्षा भोगले कहते हैं, "अब कप्तान श्रेयस के कमरे में जाकर कहोगे कि नाम रिंकू सिंह है याद रखो." तो रिंकू सिंह कहते हैं कि ज़रूर कहूँगा.''

ये रिंकू सिंह का वो भरोसा है जो किसी तुक्के में नहीं आया है. ये लगातार संघर्ष के बूते आया है और इसमें उनकी क़ाबिलियत भी शामिल है, जिसके चलते साल 2018 से ही वे कोलकाता नाइटराइडर्स के साथ बने हुए हैं. इस सीज़न से पहले उन्हें 10 मैचों में मौक़ा भी मिला लेकिन वे कुछ ख़ास नहीं कर सके थे. इसके बाद भी कोलकाता की टीम ने उन्हें नीलामी में 55 लाख रुपए में ख़रीदा था.

लेकिन इस बार गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ पहले ही मुक़ाबले में 35 रन बनाने के साथ साथ चार कैच लपक कर उन्होंने अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए थे, इसके बाद राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ़ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में दबाव का बख़ूबी सामना किया.

उनकी पारी ने कोलकाता नाइटराइडर्स की लगातार पाँच हार का सिलसिला तोड़ दिया है. अब आने वाले मैचों में उनसे उम्मीदें काफ़ी बढ़ गई हैं.

मामूली लड़के के स्टार बनने की कहानी

दरअसल, रिंकू सिंह की कहानी समाज के उस तबके के युवा की कहानी है, जिसने गुरबत के दिनों में यह भांप लिया था कि कोई एक चीज़ उनका मुकद्दर बदल सकता है, रिंकू सिंह को लगा कि क्रिकेट का खेल ही उनका मुकद्दर बदल सकता है.

अलीगढ़ में एक गैस वैंडर के पाँच बेटों में एक रिंकू सिंह को स्कूली दिनों से ही क्रिकेट खेलने में लुत्फ़ आने लगा था लेकिन कोलकाता नाइटराइडर्स की वेबसाइट पर मौजूद उनके एक वीडियो के मुताबिक़, "पिता बिल्कुल नहीं चाहते थे कि मैं खेल में समय बर्बाद करूं. तो बहुत पिटाई भी हो जाती थी. वे डंडा लेकर इंतज़ार करते थे कि कब आता है घर. लेकिन भाइयों ने साथ दिया और हर मौक़े पर क्रिकेट खेलता था. बॉल ख़रीदने तक के पैसे नहीं होते थे. लेकिन कुछ लोगों ने मदद भी की."

एक टूर्नामेंट ऐसा भी आया जब रिंकू सिंह को शानदार प्रदर्शन करने के लिए इनाम के तौर पर मोटरसाइकिल मिली. बेटे ने अपने पिता को वह मोटरसाइकिल गिफ़्ट कर दी. पिता को भी लगा कि अलीगढ़ के कारोबारियों और कोठियों में गैस सिलिंडर पहुँचाने के सालों के काम में वे जिस मोटरसाइकिल को नहीं ख़रीद सके, वो बेटे के क्रिकेट ने ला दिया, लिहाजा मार पिटाई तो बंद हो गई. लेकिन परिवार के सामने आर्थिक चुनौतियां बनी हुईं थीं.

https://twitter.com/KKRiders/status/1521201049138171904

ऐसे ही किसी दिन काम की तलाश में रिंकू सिंह को काम मिला. उन्होंने बताया है, "मुझे पोंछा लगाने की जॉब मिली. एक कोचिंग सेंटर में मुझे पोंछा लगाना था. उन्होंने कहा था कि सुबह-सुबह आकर हमारा काम कर जाया करो. भाई ने ही दिलाई थी. लेकिन मैं नहीं कर पाया. नौकरी छोड़ दी. अच्छा नहीं लगा था. पढ़ाई भी मेरे साथ नहीं थी. मुझे तभी लगा कि क्रिकेट पर ही फोकस किया. मुझे लगा कि क्रिकेट ही मुझे आगे ले जा सकता है, मेरे पास कोई दूसरा विकल्प ही नहीं था."

तीन लोगों का योगदान

लेकिन यहाँ से ही क्रिकेट का रास्ता नहीं खुला. रिंकू सिंह को मालूम नहीं था कि अंडर-16 ट्रायल में क्या करना चाहिए, दो बार वे पहले ही राउंड में छँट गए. ऐसे में अलीगढ़ के मोहम्मद ज़ीशान ने उनकी मदद करने सामने आए.

रिंकू सिंह के शुरुआती दिनों से अलीगढ़ में मसूद अमीन की कोचिंग मिली और वह आज भी उनके कोच बने हुए हैं जबकि मोहम्मद ज़ीशान से मिली मदद पर रिंकू सिंह कहते हैं कि उनकी मदद और मार्गदर्शन का अहम योगदान रहा. इन सबके अलावा शाहरुख़ ख़ान भी हैं जिनकी कोलकाता नाइटराइडर्स ने 2018 में उन्हें आईपीएल के लिए 80 लाख रुपए में अनुबंधित किया.

https://twitter.com/KKRiders/status/1519896758754574338

रिंकू सिंह के मुताबिक़, "अलीगढ़ से निकल आईपीएल पहुँचने वाला मैं पहला खिलाड़ी बना. इतने पैसे मिले थे कि घर परिवार में कभी किसी ने देखे नहीं थे. घर की सारी दिक़्क़ते दूर हो गईं. ज़मीन लेकर घर बनवाया, क़र्जे़ थे वो चुका दिए."

ये सब तो हो गया था लेकिन असली चमत्कार का होना बाक़ी था. ऐसा करते हुए सीज़न निकलते जा रहे थे जो मौक़े मिल रहे थे उसमें रिंकू बहुत ख़ास नहीं कर पाए रहे थे लेकिन ऐसा लग रहा है कि अब रिंकू सिंह वही चमत्कार कर दिखाने को तैयार हैं. उनका सपना एक दिन भारत के लिए क्रिकेट खेलना है, लेकिन इसके लिए उन्हें आईपीएल और घरेलू क्रिकेट की उपयोगी पारियों को धमाकेदार पारियों में तब्दील करना होगा.

रिंकू सिंह, 2016 से ही उत्तर प्रदेश की ओर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में हिस्सा ले रहे हैं और पाँच शतक और 16 अर्धशतक की मदद से अब तक 2307 रन बनाए हैं.

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