36 की हुई भाजपा: जानें 2 से 335 सांसदों तक का सफर
नयी दिल्ली। आज से ठीक 36 साल पहले दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान में देश भर से आये 3500 प्रतिनिधियों की बीच एक ऐसी 'अटल' पार्टी की आधारशिला रखी गई जिसने 2 सांसदों से अपने सफर की शुरुआत की और आज वो पूरे संसद पर राज कर रही है। जी हां हम भारतीय जनता पार्टी की बात कर रहे हैं, जिसका आज स्थापना दिवस है।

इस सफर में भाजपा ने दो बड़ी सफलताएं हासिल कीं। पहली सफलता उसे 2014 में मिली, जब भाजपा ने 2 सांसदों से 335 सांसदों तक का सफर तया किया और दूसरा यह कि भाजपा आज दुनिया की सबसे अधिक सदस्यों वाली पार्टी बन चुकी है। दावा किया जा रहा है कि उसके सदस्यों की संख्या करीब 11 करोड़ पहुंच चुकी है। कहना गलत नहीं होगा कि सफलता की घोड़े पर सवार भाजपा ने सत्ता और संगठन दोनों ही जगहों पर कामयाबी की नई इबारत लिख रही है।
भाजपा के 2 से 335 तक का सफर
2 से 335 तक का सफर
जिस संगठन की शुरुआत 1980 में की गई उसी को 1984 में भयंकर हार का सामना करना पड़ा था, 543 लोकसभा सीटों में से वह सिर्फ 2 पर विजयी रही थी। जबकि इंदिरा गांधी की हत्या की सहानूभूति लहर पर सवार होने के कारण कांग्रेस ने 401 सीटें जीती थीं। 1984 में भाजपा का मत-प्रतिशत 7.4 था, लेकिन साल 2014 में अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए भाजपा ने 335 सीटें हासिल की। उस वक्त उनका मत प्रतिशत 30 से ऊपर है। असम में पहली बार भाजपा की सरकार के आसार, सर्वे में मिली पूर्ण बहुमत
11 से 11 करोड़ तक का सफर
भाजपा आज दुनिया की सबसे अधिक सदस्यों वाली पार्टी बन चुकी है। उसके सदस्य 11 करोड़ के आसपास हैं। वर्तमान पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के मुताबिक पार्टी की शुरुआत 11 सदस्यों के साथ हुई थी। सर्वे रिपोर्ट- असम में कम हुआ मोदी प्रेम, मुश्किल में भाजपा
जिम्मेदारी में बड़ा बदलाव
1984 में भाजपा की जिम्मेदारी अटल बिहारी वायपेयी के हाथों में दी गई, लेकिन 1984 लोकसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा की कमान 1986 में अटल जी से लाल कृष्ण आडवाणी के हाथों में आई और 1990 तक आडवाणी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के रुप में कार्य किया। जिसके बाद 1989 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 86 सीटें जीतीं जो कि 1984 की 2 सीटों की तुलना में एक सीधी उछाल थी। पीएम मोदी की क्लास में यूपी के भाजपा सांसद हुए फेल
1991 में यूपी में लहराया परचम
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 1991 में भाजपा ने जीत हासिल की, लेकिन इस जीत के सफर को वो एक साल तक भी चला नहीं पाई और एक साल में ही एक साल के भीतर की कल्याण सिंह की सरकार को दम तोड़ना पड़ा और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।
1995 का साल बेमिसाल
भाजपा के लिए साल 1995 बेमिसाल साबित हुआ जब भाजपा ने गुजरात में अभूतपूर्व सफलता हासिल की। गुजरात में 2001 में नरेन्द्र मोदी का नाम खूब गूंजा। लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के बाद उन्होंने सीधे 2014 में केंद्र का रुख किया और बहुमत के साथ एनडीए की सरकार बनाई। भाजपा का सफर गुजरात से होते हुए मध्य प्रदेश, गोवा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक तक चला।
पहनावे में बदलाव
भाजपा के इस सफर में बड़ा बदलाव उनके नेताओं के भेषभूषा में हुआ है। 1998 के पहले भाजपा नेता और कार्यकर्ता सादे कपड़ों में दिखते थे, वहीं अब सफारी सूट और कोट-पैंट में नजर आते हैं।
खामियां
जितनी बड़ी भाजपा सदस्यों की संख्या हैं उसनी ही समस्याएं भी हैं। जहां उसकी उपलब्धि है, वहीं कमजोरी भी है। जो लोग भाजपा से जुड़े हैं वो जरुरी नहीं कि सेवा भाव से जुड़े हों। भाजपा हाईकमान संस्कृति से जूझ रही है। भाजपा में जीत का सेहरा एक के सिर बंधता जा रहा है। भाजपा में अनुभवी और नए नेताओं के बीच तालमेल नहीं है। आडवाणी और जोशी जैसे बड़े नेताओं को दरकिनार कर दिया गया है।
और नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से जमीनी स्तर पर काम करने वाले भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा गैरहिंदुओं के प्रति भावनाएं भड़काने की बातें सामने आयी हैं, जो पार्टी के लिये बेहद नुकसानदेह हैं। पार्टी ही नहीं, अगर भाजपा गैरहिंदुओं को अपने साथ बांधने में नाकाम रही, तो 2019 में नरेंद्र मोदी के लिये मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।












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