पत्रकार राणा अय्यूब को मिल रहीं बलात्कार और हत्या की धमकियां

राणा अय्यूब
Rana Ayyub @Facebook
राणा अय्यूब

साल 2002 के गुजरात दंगों पर किताब 'गुजरात फाइल्स: एनाटॉमी ऑफ़ अ कवर-अप' लिख चुकीं खोजी पत्रकार राणा अय्यूब का कहना है कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने इसका संज्ञान लेते हुए इस पर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि सरकार राणा अय्यूब की सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम करे.

राणा अय्यूब ने बीबीसी संवाददाता मानसी दाश को बताया कि उन्हें धमकियां तो हमेशा से मिली हैं लेकिन पहले धमकियों का सिलसिला ऑनलाइन माध्यमों पर चलता था लेकिन बीते कुछ वक़्त से अब उन्हें फ़ोन पर भी जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं.

गुजरात फाइल्स
Rana Ayyub @Facebook
गुजरात फाइल्स

पढ़िए क्या कहती हैं राणा अय्यूब

मेरे नाम का एक पॉर्न वीडियो बनाया गया है, जिसमें मॉर्फ करके मेरा चेहरा लगा दिया गया है. इसे फ़ोन पर, व्हॉट्सऐप के ज़रिए हिंदुस्तान में फैलाया जा रहा है.

मेरा फ़ोन नंबर और मेरा पता ट्विटर पर ट्वीट किया गया है जिसमें लिखा गया है, 'आई एम अवेलेबल' यानी 'मैं उपलब्ध हूं.' जिस तरह की गंदगी मैंने इस बार देखी वैसी पहले कभी नहीं देखी.

मेरे नाम से इस तरह के ट्वीट किए गए हैं कि मैं बच्चों के बलात्कारियों का समर्थन करती हूं और मैं भारत और भारतीयों से नफ़रत करती हूं.

मुझे सामूहिक बलात्कार की धमकियां मिल रही हैं. मैंने इस मामले में अपनी सफ़ाई भी दी है लेकिन फिर भी लोग मुझे मैसेज कर रहे हैं कि वो मेरे घर आकर मेरा बलात्कार करेंगे और मुझे मार देंगे.

मेरे नंबर पर लोग मुझे गंदी तस्वीरें भेज रहे हैं और मुझसे पूछ रहे हैं कि क्या आप देह व्यापार से जुड़ी हैं और हमें अपनी सेवाएं दे सकती हैं. माहौल बहुत बुरा बन गया है.


राणा अय्यूब के फेसबुक पन्ने का स्क्रीनशॉट
Rana Ayyub @Facebook
राणा अय्यूब के फेसबुक पन्ने का स्क्रीनशॉट

पुलिस में अप्रैल से दर्ज है शिकायत

मैंने 26 अप्रैल को दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है. पहले उन्होंने ये कहते हुए शिकायत लेने से मना कर दिया था कि ये उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. बाद में जब मेरे वकील ने फिर से एफ़आईआर दी तो पुलिस ने मेरी शिकायत दर्ज की.

जून का महीना आधा बीतने को है लेकिन अब तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है.

https://twitter.com/RanaAyyub/status/988430479530582016

गुजरात फाइल्स से जुड़ते हैं तार

इसके तार इस एक किताब से ही नहीं बल्कि गुजरात के मामले में मैंने जितनी रिपोर्ट्स की हैं उन सबसे जुड़ते हैं. ये एक तरह की नफ़रत है जो अलग-अलग वक्त पर सामने आ रही है.

ये पहले भी हो चुका है. मेरी किताब लॉन्च से पहले मैंने गुजरात में हुए फर्जी मुठभेड़ पर एक और खोजी रिपोर्ट की थी. ट्विटर पर उन लोगों ने 'राणा अय्यूब सेक्स सीडी' नाम से हैशटैग चलाया जिसके बाद मेरे नाम की गंदी तस्वीरें उन्होंने ट्विटर पर लगाईं.

हर बार ऐसा कुछ होता है. लेकिन इस बार तो इन धमकियों का स्तर बहुत गिर गया था.

पुलिस में की गई शिकायत का स्क्रीनशॉट
Rana Ayyub
पुलिस में की गई शिकायत का स्क्रीनशॉट

संयुक्त राष्ट्र ने लिया संज्ञान

संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल करने वालों के लिए हाल के वर्षों में माहौल ख़तरनाक हो गया है. इसी साल 24 मई को संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि भारतीय सरकार को राणा अय्यूब की सुरक्षा के लिए इंतज़ाम करने चाहिए.

लेकिन इस बात को लेकर अब एक महीना हो चुका है लेकिन मुझे लगता है कि ज़मीनी स्तर पर अब तक उसका कोई असर दिख नहीं रहा है. जो शिकायत दर्ज कराई गई थी उस पर कोई कार्रवाई होती भी नहीं दिख रही.

https://twitter.com/UNHumanRights/status/1003664023697674240

कुछ पत्रकारों ने मेरा काफी साथ दिया लेकिन एडिटर्स गिल्ड को भी बयान जारी करते-करते ढाई महीने लग गए.

अंतरराष्ट्रीय मीडिया और पत्रकारों ने मेरा बहुत साथ दिया. उनकी पहल से ही संयुक्त राष्ट्र तक ये समस्या पहुंची. अब बस मैं उम्मीद ही कर सकती हूं कि देश में पत्रकारों के लिए माहौल बेहतर बने.

गौरी लंकेश ने किया था राणा अय्यूब की किताब का अनुवाद

डॉक्टर एमएम कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश
MM KALBURGI, GAURI LANKESH/ FACEBOOK
डॉक्टर एमएम कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश

ग़ौरतलब है कि हाल में पत्रकार गौरी लंकेश ने राणा अय्यूब की किताब 'गुजरात फ़ाइल्स' का कन्नड़ में अनुवाद किया था.

गौरी लंकेश की बीते साल बेंगलुरू में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. कथित रूप से हिंदूवादी विचारधारा को चुनौती देने के लिए गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई थी.

इस हत्या की पड़ताल कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) केटी नवीन कुमार नाम के एक शख़्स को औपचारिक रूप से हत्या का आरोपी बनाया है. नवीन कुमार कथित तौर पर 'हिंदू युवा सेना' के संस्थापक हैं.

विशेष टीम ने कोर्ट को बताया है कि तीन साल पहले हुई डॉक्टर एमएम कलबुर्गी की हत्या और गौरी लंकेश की हत्या में एक ही देसी कट्टे का इस्तेमाल किया गया था. अगस्त 2015 में हिंदूवादी परंपराओं और अनुष्ठानों के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले डॉक्टर एमएम कलबुर्गी की हत्या कर दी गई थी.


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