'संतुष्ट नहीं हूं, लेकिन...', हत्यारों के उम्रकैद पर क्या बोलीं पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की मां, ICU में पति
Journalist Soumya Vishwanathan: पत्रकार सौम्या विश्वनाथन के हत्यारों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की मां माधवी ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि, वह कभी भी अपनी बेटी के हत्यारों के लिए मौत की सजा नहीं चाहती थीं। उन्होंने कहा, "मैं चाहती थी कि वे परिवार से दूर वैसे ही पीड़ित हों जैसे हम पीड़ित हैं।"
सौम्या विश्वनाथन की मां का ये बयान दिल्ली की साकेत अदालत ने सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले में चार दोषियों को मौत की सजा से इनकार करने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद आई है। पांचवें दोषी को उस अवधि की सजा सुनाई गई, जो वह पहले ही जेल में काट चुका था।

अदालत ने कहा कि मौत की सजा नहीं दी जा सकती क्योंकि चारों दोषियों का अपराध 'दुर्लभ से दुर्लभतम' श्रेणी में नहीं आता है।
मृतक पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की मां माधवी ने कहा, "मुझे राहत है कि यह खत्म हो गया है, मैं कह सकती हूं कि न्याय से इनकार नहीं किया गया है। कम से कम मुझे बार-बार आने और इस प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं है। मुझे उम्मीद है कि यह अंत है।"
उन्होंने कहा, "मैं अपनी बेटी को वापस नहीं पाऊंगी लेकिन कम से कम यह खत्म हो गया है।" सौम्या की मां माधवी ने यह भी कहा कि, 'मैं फैसले से संतुष्ट नहीं हैं लेकिन यह एक 'अच्छी बात' है कि इंसाफ की लड़ाई खत्म हो गई है।'
सौम्या की मां माधवी ने कहा, "समाज को एक संदेश दिया गया है कि आप जो करेंगे उसके परिणाम आपको भुगतने होंगे।" जब अदालत ने पूछा कि क्या वह सजा सुनाए जाने से पहले कुछ कहना चाहती है, तो माधवी ने कहा कि, 'उसे उम्मीद है कि 15 साल बाद न्याय मिलेगा।
उन्होंने कहा कि उनके पति अस्पताल में आईसीयू में हैं और अपनी बेटी के लिए न्याय का इंतजार कर रहे हैं। अदालत से बाहर निकलते समय उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''एक तरह से हम भी आजीवन कारावास भुगत रहे हैं।
बता दें कि सितंबर 2008 में दक्षिण दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर सौम्या विश्वनाथन अपने कार में मृत पाई गई थीं। पांच लोगों पर उनकी हत्या का आरोप साबित हुआ है। सौम्या की हत्या के 15 साल बाद दोषियों सजा सुनाई गई। तब से, उनके हत्यारों को दोषी ठहराने और उन्हें सजा देने की प्रक्रिया कानूनी बाधाओं से भरी रही है और अभियोजन पक्ष को लगभग सारे सबूत कोर्ट के सामने पेश करने में 13 साल लग गए।












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