Joshimath Sinking के बीच हिमाचल में भी अलर्ट रहना जरूरी, विकास vs विनाश के बीच गांवों में खतरे की घंटी
उत्तराखंड के जोशीमठ में 700 से अधिक घरों को तोड़ा जा रहा है। इसी बीच हिमाचल में विकास परियोजनाओं के आसपास बसे गांवों में खतरे की आशंका पनपने लगी है। जानिए किस तरह के खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

Joshimath Sinking और Land Subsidence के कारण हजारों लोगों का भविष्य अंधकार में दिखने लगा है। उत्तराखंड के जोशीमठ में 700 से अधिक घरों को तोड़ने की कवायद के बीच एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश के गांवों में भी खतरे की घंटी बजने लगी है। पहाड़ी इलाकों में बने कंस्ट्रक्शन साइट के आसपास बसने वाले गांवों में रह रहे लोगों को जोशीमठ की दिल दहलाने वाली तस्वीरें देखकर डर सता रहा है कि कहीं उनके साथ भी ऐसा ही हश्र न हो जाए। (सभी तस्वीरें- जोशीमठ में नुकसान की हैं। साभार-पीटीआई)

हिमाचल प्रदेश के गांवों में खतरे की घंटी
जोशीमठ की पहाड़ियों पर बनी अट्टालिकाओं को गिराने के साथ ही पहाड़ी इलाकों में विकास परियोजनाओं को लेकर नए सिरे से बहस शुरू हो रही है। जोशीमठ के चिंताजनक हालात के बीच एक और पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के गांवों में खतरे की घंटी बजने लगी है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक किन्नौर जिले के मीरू गांव में दरारें आ गई हैं। कीरतपुर-मनाली राजमार्ग के साथ लगे कई गांवों के घरों में अचानक दरारें आने की शिकायत मिली है।

खतरे में ऐतिहासिक जगहें
उत्तराखंड की ही तरह हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम हो रहा है। धर्मशाला से मैक्लॉडगंज (निर्वासित तिब्बती सरकार की राजधानी) की ओर जाने वाली मुख्य सड़क कई जगहों पर धंसने लगी है। शिमला का लोकप्रिय रिज मैदान पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। असुरक्षा की आशंका के बीच डर इस बार का है कि ब्रिटिश युग के ऐतिहासिक स्थलों को भी खतरा हो सकता है।

जोशीमठ और हिमाचल में क्या समानता है ?
Joshimath Land Subsidence के बीच हिमाचल में त्रासदी की आशंका क्यों है ? इस पर न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया, यहां के पहाड़ी इलाकों में भी बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य देखा जा सकता है। कुछ दूरदराज के गांवों में पनबिजली परियोजना के लिए सुरंग बनाने का काम या उन जगहों पर सड़क चौड़ा करने का काम हो रहा है, जहां मिट्टी धंसने की आशंका है। भूवैज्ञानिकों ने धर्मशाला के मैक्लोडगंज के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। भूविज्ञानी एके महाजन कहते हैं कि आपदाओं को टालने के लिए छोटे पैमाने पर भूस्खलन से बचने के लिए मानचित्रण और खतरनाक जगहों की पहचान करने की जरूरत है।

खतरे पर चर्चा vs वैज्ञानिक प्रमाण
भूविज्ञानी एके महाजन के अनुसार "हमें पहाड़ी शहरों में जल निकासी व्यवस्था का भी अध्ययन करना चाहिए। सड़क बनाने के लिए पहाड़ा को काटने और सुरंग की जरूरत होने पर टनल बोरिंग वैज्ञानिक तरीकों से किए जाने की जरूरत है न कि बेतरतीब ढंग से क्योंकि यही विनाश का मुख्य कारण है। कांगड़ा के उपायुक्त निपुन जिंदल ने भी माना है कि मैक्लोडगंज पर खतरे के बारे में चर्चा हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अभी तक कोई वैज्ञानिक रिपोर्ट पेश नहीं की गई है।

क्यों गंभीर हो रहे हालात
कांगड़ा के उपायुक्त निपुन जिंदल के मुताबिक, प्रशासन ने मैक्लोडगंज में खतरों पर आधारित रिपोर्टों की सत्यता के बारे में नगर आयुक्त और टाउन एंड कंट्री प्लानर से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यदि स्थिति ऐसी है, तो हम वास्तव में विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ काम करेंगे। शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर और जाने-माने पर्यावरणविद् टिकेनबर सिंह पंवार ने इस पत्र को बताया कि किन्नौर जिले के मीरू गांव में लोग मकानों में दरारें आने की सूचना अधिकारियों को दे रहे हैं। उन्होंने कहा, आम धारणा है कि 1100 मेगावॉट वाला करछम-वांगटू परियोजना और राजमार्गों के निर्माण से हालात गंभीर हो गए हैं।

पहाड़ी राज्य में त्रासदी
पर्यावरणविद् टिकेनबर सिंह पंवार बताते हैं कि बिजली उत्पादन परियोजना के कारण, आसपास के क्षेत्र में सामाजिक-पारिस्थितिक दृष्टिकोण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। बकौल पवार, यही कारण है कि घरों में दरारें, भूस्खलन के अलावा खेती-किसानी के क्षेत्र में कम फसल उत्पादन होने की खबरें हैं। बेतरतीब निर्माण, जलविद्युत संयंत्रों जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और पहाड़ियों की असंवेदनशील कटाई के कारण आसपास की मिट्टी नरम हो गई। धीरे-धीरे घरों में दरारें उभरने लगीं।

हिमाचल के किन इलाकों में खतरे के संकेत
भूविज्ञानी एके महाजन के अनुसार, पहाड़ी राज्यों में आपदाओं को टालने के लिए छोटे पैमाने पर भूस्खलन मानचित्रण जरूरी है। हमें पहाड़ी शहरों में जल निकासी व्यवस्था का भी अध्ययन करना चाहिए। पहाड़ों की कटाई, सड़कों के धंसने और घरों में दरारों पर न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक;
- किन्नौर जिले के मीरू गांव में दरारें आ गई हैं। पास ही एक जलविद्युत इकाई है।
- कीरतपुर-मनाली हाईवे के किनारे के कई गांवों में भी घरों में दरारें आ गई हैं।
- धर्मशाला से मैक्लॉडगंज (निर्वासित तिब्बती सरकार की राजधानी) की ओर जाने वाली मुख्य सड़क कई जगहों पर धंस रही है।
- शिमला के रिज ग्राउंड पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। रिज को भारी नुकसान के बीच ब्रिटिश राज की ऐतिहासिक प्रॉपर्टी से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं भी सामने आई हैं।












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