पूरी नहीं हुई सिंधिया की आस, जीतू पटवारी का तंज- 'मोदी जी, गद्दारी का ईनाम अलग-अलग क्यों?'

शिवराज सिंह चौहान की नई कैबिनेट को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है...

नई दिल्ली। सियासी उठापटक के एक लंबे दौर और कोरोना वायरस जैसी महामारी में 'बिना मंत्रियों की सरकार' के आरोप झेल रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आखिरकार बुधवार को अपने मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया। मध्य प्रदेश की सरकार में फिलहाल पांच ही विधायकों को मंत्री बनाते हुए उनके बीच विभाग बांटे गए हैं। इन पांच मंत्रियों में दो मंत्री वो हैं, जो पिछली कमलनाथ सरकार में भी मंत्री थे और बगावत करके भाजपा के पाले में आए हैं। हालांकि, 6 मंत्रियों समेत जिन 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर कमलनाथ की सरकार गिराई, उनमें से केवल दो तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को ही शिवराज की कैबिनेट में जगह दी गई है। यही नहीं, दोनों मंत्रियों को पहले की अपेक्षा हल्के विभाग दिए गए हैं।

सिंधिया खेमे के विधायकों को कम हल्के मंत्रालय

सिंधिया खेमे के विधायकों को कम हल्के मंत्रालय

दरअसल, तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत दोनों ही पूर्व की कमलनाथ सरकार में मंत्री थे। तुलसीराम सिलावट के पास स्वास्थ्य मंत्रालय और गोविंद सिंह राजपूत के पास राजस्व और परिवहन मंत्रालय जैसे अहम और बड़े विभाग थे। शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को जब विभागों का बंटवारा किया तो तुलसीराम सिलावट को जल संसाधन मंत्रालय और गोविंद सिंह राजपूत को को-ऑपरेटिव, खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्रालय का मंत्री बनाया। ये दोनों विभाग पहले की अपेक्षा कम महत्व वाले हैं। कयास इस बात के भी लगाए जा रहे थे कि शिवराज सिंह चौहान की नई सरकार में ज्योतिरादित्य सिंधिया के किसी खासमखास को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब मध्य प्रदेश कांग्रेस और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधा है।

'मोदी जी, गद्दारी का इनाम अलग-अलग क्यों'

जीतू पटवारी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'यदि बिकाऊ राम मिलावट और बैंगलोरी सिंह कपूत बगैर विधायक बने मंत्री बन सकते हैं, तो मिस्टर विभीषण- बगैर सांसद बने मंत्री क्यों नहीं बन सकते..? मोदी जी, गद्दारी का इनाम अलग-अलग क्यों..? "गलत बात"।' आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा थी कि शिवराज सिंह चौहान की नई सरकार में ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के सभी पूर्व मंत्रियों को पहले की तरह ही बड़े मंत्रालय दिए जाएंगे। चर्चा इस बात की भी थी कि खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद से नवाजा जाएगा। हालांकि भाजपा ने उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है, लेकिन कोरोना वायरस की महामारी के चलते राज्यसभा चुनाव फिलहाल स्थगित हैं।

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी साधा निशाना

वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी ट्वीट कर ज्योतिरादित्य सिंधिया को शिवराज सिंह चौहान की सरकार में दरकिनार करने का आरोप लगाते हुए कहा है, 'महत्वपूर्ण विभागों के 6 मंत्री, और 22 विधायक श्रीअंत के लिये कम थे। अब- महत्वहीन विभाग के 2 मंत्री और 0 विधायक से रुतबा खूब बढा है।' एक और ट्वीट करते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से कहा गया, 'बीजेपी सोच रही थी- उप मुख्यमंत्री जैसा छोटा पद देंगे, लेकिन श्रीअंत ने ताकत दिखाई- और जल संसाधन विभाग ले लिया..!'

क्या थी ज्योतिरादित्य सिंधिया की आस?

क्या थी ज्योतिरादित्य सिंधिया की आस?

मध्य प्रदेश की कैबिनेट में डिप्टी सीएम पद रहेगा या नहीं, अभी तक ऐसा कोई संकेत भाजपा की तरफ से मिलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। बीते दिनों, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली, तो पार्टी के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, 'ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम का पद ऑफर किया गया था, लेकिन वो अपनी तरफ से नामांकित किसी विधायक को इस पद पर बिठाना चाहते थे। कमलनाथ ने एक चेले को लेने से इनकार कर दिया।' ऐसे में कांग्रेस को अपने पुराने नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक बार फिर से घेरने का मौका मिल गया है।

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