कांग्रेस को भरोसा दिलाने के लिए इस विधायक ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, क्रॉस वोटिंग का है आरोप
राज्यसभा चुनाव पर यूपीए खेमे में तकरार और बढ़ती ही जा रही है। MCC के विधायक अरूप चटर्जी लाख कहें कि राज्यसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस को वोट दिया और जेवीएम विधायक प्रदीप यादव ने भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की है, पर कांग्रेस को इस बात पर भरोसा नहीं है।
नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव खत्म हो चुका है लेकिन उसकी राजनीतिक तपीश अभी भी महसूस की जा रही है। एनडीए के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने का आरोप झेल रहे एक यूपीए के विधायक ने वोट को सार्वजनिक करने की मांग की है। झारखंड के निरसा से मार्क्सिस्ट कोऑर्डिनेशन काउंसिल (MCC) के विधायक अरुप चटर्जी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि उनका निर्दलीय वोट सार्वजनिक किया जाए ताकी पता चल सके कि उन्होंने वोट यूपीए उम्मीदवार को वोट किया है। अरुप चटर्जी ने कहा कि क्रॉस वोटिंग के आरोप बेबुनियाद हैं।

वोट सार्वजनिक करने की मांग
खबरों के मुताबिक अरुप चटर्जी ने यह पत्र बुधवार को लिखा था और विधायक का पत्र निर्वाचन अधिकारी को सौंप दिया गया है, जिसे आगे भेजा जाएगा। आपको बता दें कि 23 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव के वक्त एनडीए अपने दूसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए प्रर्याप्त मत नहीं जुटा पाई थी। हालांकि संगठन अपने दोनों उम्मीदवारों, समीर उरांव और प्रदीप सोंथालिया, के लिए 52 वोट जुटाने में कामयाब रहा था। बाद में आए चुनाव परिणाम में भाजपा के उरांव और कांग्रेस धीरज प्रसाद साहू को विजयी घोषित किया गया था, परिणाम करीब 15 घंटे की देरी के बाद सामने आए।

यूपीए खेमे में तकरार और बढ़ती ही जा रही है
राज्यसभा चुनाव पर यूपीए खेमे में तकरार और बढ़ती ही जा रही है। MCC के विधायक अरूप चटर्जी लाख कहें कि राज्यसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस को वोट दिया और जेवीएम विधायक प्रदीप यादव ने भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की है, पर कांग्रेस को इस बात पर भरोसा नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने गुरुवार को कहा कि धीरज साहू को प्रदीप यादव ने ही वोट दिया था, अरूप चटर्जी ने नहीं। कांग्रेस को प्रदीप यादव पर पूरा भरोसा है। अरुप चटर्जी गलत बयान दे रहे हैं।

कांग्रेस को नहीं है भरोसा
डॉ. अजय कुमार ने कहा कि अगले विधानसभा चुनाव को देख सिर्फ अपना फेस वैल्यू बचाए रखने के लिए अरूप चटर्जी ने राज्य निर्वाचन कार्यालय और विधानसभा के रिटर्निंग अफसर के पास ज्ञापन दिया है। अरूप को खूब पता है कि उनका वोट सार्वजनिक नहीं हो सकता। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कहना बचकाना है।












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