Jharkhand Congress Crisis: झारखंड में अपने विधायकों की मांग मानने से क्यों डर रही कांग्रेस?

झारखंड में मुख्यमंत्री चंपई सोरेन सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से कांग्रेस विधायकों की नाराजगी खत्म होने का नाम नहीं ले रही। राज्य में कांग्रेस के 17 विधायक हैं, जिसमें से 12 सोरेन सरकार में कांग्रेसी कोटे से बने मंत्रियों को लेकर नाखुश हैं। इसके चलते उनमें पार्टी हाई कमान के प्रति भी भयंकर असंतोष है।

शुक्रवार को झारखंड के नए-नए मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने अपनी कैबिनेट का विस्तार किया और शनिवार रात कांग्रेस के नाराज एमएलए का जत्था शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी शिकायतें रखने दिल्ली पहुंच गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं होता, वे रांची लौटकर नहीं जाने वाले।

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कांग्रेस कोटे के मंत्रियों को बदलने की मांग
कांग्रेस के ये असंतुष्ट विधायक जेएमएम की अगुवाई वाली चंपई सरकार में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों को बदलने की मांग कर रहे हैं। इन विधायकों ने यहां तक धमकी दे रखी है कि अगर उनकी मांगें अनसुनी कर गईं तो वह 23 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र का भी बहिष्कार कर देंगे। ये अपनी पार्टी के मंत्रियों के खिलाफ नन-परफॉर्मेंस की भी शिकायतें कर रहे हैं।

पार्टी कह रही है कि विधायकों को मंत्री नहीं बदलने की दी थी जानकारी
बजट सत्र में सोरेन सरकार को धन विधेयक भी पास करवाना होगा, इसलिए सरकार की चिंता बढ़ गई है। इस विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुलाम अहमद मीर इस हफ्ते रांची जाने वाले हैं।

मीर ने ईटी को बताया है, 'झारखंड में नई कैबिनेट के गठन के समय हमने अपने विधायकों को बताया था कि पार्टी कोटे से पहले वाले मंत्रियों (हेमंत सोरेन सरकार में शामिल) को ही क्यों जगह दी गई है। अगर फिर भी उनका कोई मसला है, तो हम उनसे बात करेंगे। मुझे लगता है कि हमारे कुछ विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों और सरकार में शामिल मंत्रियों के साथ समन्वय का कुछ मुद्दा है।'

मंत्रियों के बदलने की उम्मीद में थे असंतुष्ट विधायक
दरअसल, लोकसभा चुनावों के कुछ महीने बाद ही झारखंड विधानसभा का चुनाव भी होना है। ऐसे में कांग्रेस के कुछ विधायक इस बार मंत्रिमंडल में कांग्रेस कोटे के मंत्री बदलने की उम्मीद कर रहे थे, जिससे उनको भी कुछ महीने के लिए ही मंत्री सुख भोगने का मौका मिल जाता।

लेकिन, कांग्रेस हाई कमान ने उन्हीं लोगों को फिर से मंत्री पद दिलवाया, जो हेमंत सोरेन सरकार में भी सत्ता सुख भोग रहे थे। इसी वजह से पार्टी के 12 विधायकों ने मोर्चा खोल रखा है।

मंत्री बदलने से इस वजह से डर गई कांग्रेस
उधर कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि हाई कमान ने उन्हीं मंत्रियों को फिर से चंपई सरकार में इसलिए जगह दिलवाई, क्योंकि उसे यह डर था कि अगर एक भी नया चेहरा लाया गया तो मंत्री बनाने की मांग करने वाले विधायकों की लाइन लग सकती है।

झारखंड के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा है, 'क्योंकि, कांग्रेस के अधिकतर विधायक पहली बार चुने गए हैं, वे झारखंड की राजनीति में मौजूदा परिवर्तन का भरपूर लाभ उठा लेने की जल्दीबाजी में हैं....'

चंपई सोरेन सरकार की भी धड़कनें बढ़ा रहे हैं कांग्रेसी विधायक
कांग्रेस के सामने यह संकट ऐसे समय में आया है, जब राज्य में लोकसभा चुनावों को लेकर सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है।

ऊपर से पार्टी विधायक जिस तरह से कांग्रेस के मौजूदा मंत्रियों को नहीं बदलने की सूरत में बजट सत्र से गैर-हाजिर रहने की बात कर रहे हैं, उससे चंपई सोरेन सरकार की भी दिल की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।

क्योंकि, बजट सत्र के दौरान सरकार समर्थक 12 विधायकों की गैर-हाजिरी का जोखिम लेने के लिए कोई भी सरकार नहीं तैयार हो सकती। इन्हीं हालातों के बीच मुख्यमंत्री चंपई सोरेन रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मिलने दिल्ली पहुंचे थे, जिसे शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है।

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