Jharkhand Polls: हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सरायकेला से उम्मीदवार! चंपाई पर कितनी मजबूत होगी JMM की रणनीति?

Jharkhand Chunav: चंपाई सोरेन बीजेपी में शामिल हुए तो झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से यह दिखाने की कोशिश की गई कि पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक ठाक है। यहां तक कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को कांग्रेस आलाकमान से भी मिले तो बताया जाता है कि वहां भी यही तस्वीर पेश की गई कि सिर्फ चंपाई ने पाला बदला है, कैडर जेएमएम के ही साथ है। लेकिन, पार्टी के अंदर से जो बातें छनकर आ रही हैं, उसमें पूर्व सीएम और दिग्गज नेता के निकलने को लेकर काफी भ्रम वाली स्थिति लग रही है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नया झारखंड भवन के उद्घाटन के लिए दिल्ली आए तो उन्होंने समय निकालकर कांग्रेस नेतृत्व से भी मुलाकात की और झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति साझा की। इस मुलाकात की अहमियत इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि पूर्व सीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता चंपाई सोरेन के बीजेपी में जाने के बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से उनकी यह पहली मुलाकात थी।

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हेमंत सोरेन ने कांग्रेस को सबकुछ ठीक होने का दिलाया भरोसा
इन नेताओं के बीच बातचीत की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि अपनी ओर से हेमंत ने कांग्रेस नेताओं को यही भरोसा दिलाने की कोशिश की कि चंपाई के जाने से गठबंधन के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ने वाला, क्योंकि पार्टी का कैडर उनके साथ है। हेमंत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की, जिसमें आने वाले असेंबली इलेक्शन का मुद्दा छाया रहा।

झारखंड में लोकसभा चुनावों के नतीजों से परेशान दिख रही है कांग्रेस
झारखंड में इंडिया ब्लॉक या महागठबंधन में सीटों के बंटवारे का मुद्दा फिलहाल बहुत बड़ा नहीं है, क्योंकि 2019 में भी जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी ने गठबंधन में ही चुनाव लड़ा था। अभी लोकसभा चुनावों में भी ये दल साथ-साथ रहे हैं। लेकिन, वहां के जो परिणाम आए हैं, उसने कांग्रेस के पैरों के तले से जमीन खिसका रखी है। आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों पर बीजेपी जरूर पिछड़ी है, लेकिन उसने फिर से साबित किया है कि झारखंड में वह सबसे बड़ी खिलाड़ी है।

कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात के बाद हेमंत ने कहा, 'राहुलजी और खड़गेजी के साथ बैठक बहुत दिनों से लंबित थी। हम बहुत ही मजबूती के साथ गठबंधन सरकार चलाएंगे और चुनावों में मिलकर लड़ेंगे।' इस मुलाकात की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि इस मीटिंग में चंपाई से मिले झटके से निपटने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

चंपाई के जाने का दोष बीजेपी पर डालने की रणनीति!
लोगों के मुताबिक योजना ये बनी है कि चंपाई के जाने का ठीकरा बीजेपी पर फोड़ा जाएगा और यह कहा जाएगा कि बीजेपी आदिवासी समाज को बांटना चाहती है। वहीं जेएमएम की ओर से यह रणनीति अपनाई जाएगी कि हेमंत या उनके परिवार की ओर से किसी भी सूरत में चंपाई पर सीधा निशाना नहीं साधा जाएगा।

चंपाई को बिना टारगेट किए सरायखेला में घेरने की योजना!
लेकिन, इसके ठीक उलट यह भी कहा जा रहा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की योजना है कि सरायकेला में चंपाई सोरेन के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारा जाए, ताकि उन्हें अपने ही चुनाव क्षेत्र में घिरे रहने को मजबूर कर दिया जाए। क्योंकि, 2019 में चंपाई यहां बीजेपी उम्मीदवार से भले ही 15 हजार से ज्यादा वोटों से जीते हों, लेकिन 2014 में वे मात्र 1,115 वोटों से ही जीते थे। इससे पहले भी उनकी जीत का मार्जिन तंग ही रहा है।

सरायकेला में चंपाई के खिलाफ कल्पना सोरेन हो सकती हैं उम्मीदवार
जेएमएम नेताओं को लग रहा है कि सरायकेला में चंपाई को घेरने के लिए हेमंत सोरेन पत्नी कल्पना सोरेन को उतार सकते हैं। हालांकि, अभी इस तरह का फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन, पिछली बार हेमंत दो सीटों से चुनाव लड़े थे और जिस तरह से जेल जाने के बाद उन्होंने कल्पना को राजनीति के अखाड़े में आगे किया है, उससे सरायकेला सीट से उन्हें टिकट देकर दो गोल सेट किए जा सकते हैं।

अगर चंपाई सोरेन हार गए तो कल्पना की झारखंड और जेएमएम की राजनीति में दावेदारी स्थापित हो जाएगी। भविष्य में अगर हेमंत को अपनी जगह किसी दूसरे नेता को फिर से विकल्प के तौर पर लाने की जरूरत पड़ी तो फिर से किसी 'चंपाई' को आगे बढ़ाने की मजबूरी से छुटकारा मिल जाएगा।

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