बंपर जीत के बावजूद चार विधायकों के इलाकों में पिछ़ड़ी भाजपा, कटेगा टिकट!

रांची। लोकसभा चुनाव की गहमा-गहमी खत्म होने के साथ ही झारखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारी भी शुरू हो गयी है। लोकसभा चुनाव में मोदी की सुनामी पर सवार भाजपा ने 14 में से 11 और उसकी सहयोगी आजसू ने एक सीट पर कब्जा जमा लिया, लेकिन मुख्यमंत्री रघुवर दास के सामने अब विधानसभा में यही प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है। वह खुद और भाजपा भी इसके लिए तैयार हो गयी है। झारखंड भाजपा की सबसे बड़ी चिंता पार्टी के वे चार विधायक हैं, जो अपने क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशियों को बढ़त दिलाने में नाकामयाब रहे। अब राजनीतिक हलकों में यह चर्चा होने लगी है कि इन चार विधायकों का पत्ता विधानसभा चुनाव में साफ हो सकता है। राज्य में विधानसभा का चुनाव इसी साल के अंत में होना है।

4 विधायकों के इलाके में पिछड़ी बीजेपी

4 विधायकों के इलाके में पिछड़ी बीजेपी

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, चुनाव प्रभारी मंगल पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ और मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पार्टी के विधायकों से साफ कह दिया था कि यदि उनके क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशियों को बढ़त नहीं मिली, तो विधानसभा चुनाव में उनका टिकट काटा जा सकता है। अब भाजपा के भीतर ही यह सवाल उठने लगा है कि क्या पार्टी विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव, मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा और बिमला प्रधान तथा विधायक शिवशंकर उरांव का टिकट काटेगी, क्योंकि यही वे चार विधायक हैं, जिनके क्षेत्रों से भाजपा प्रत्याशियों को लोकसभा चुनाव में बढ़त नहीं मिली। विधानसभा अध्यक्ष प्रो दिनेश उरांव सिसई के और शिवशंकर उरांव गुमला के विधायक हैं। ये दोनों विधानसभा क्षेत्र लोहरदगा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा खूंटी से और बिमला प्रधान सिमडेगा से विधायक हैं। ये दोनों क्षेत्र खूंटी संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। लोहरदगा से भाजपा प्रत्याशी सुदर्शन भगत और खूंटी से अर्जुन मुंडा लोकसभा का चुनाव जीते हैं। इन दोनों की जीत का अंतर बहुत कम रहा। अर्जुन मुंडा तो 1445 वोटों से ही जीते, जबकि सुदर्शन भगत करीब 10 हजार वोटों के अंतर से जीत सके। राज्य की दूसरे सीटों पर जहां जीत का अंतर लाखों में रहा, वहीं इन दो सीटों पर जीत के कम अंतर ने भाजपा के भीतर खलबली मचा दी है।

चार विधानसभा क्षेत्र, कोलेबिरा, तोरपा, खरसावां और तमाड़ विपक्ष के पास

चार विधानसभा क्षेत्र, कोलेबिरा, तोरपा, खरसावां और तमाड़ विपक्ष के पास

खूंटी में अर्जुन मुंडा की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक स्थानीय दिग्गज कालीचरण मुंडा से उनका मुकाबला था। इतना ही नहीं, संसदीय सीट के छह विधानसभा क्षेत्रों में से केवल दो, खूंटी और सिमडेगा ही भाजपा के कब्जे में हैं। बाकी चार विधानसभा क्षेत्र, कोलेबिरा, तोरपा, खरसावां और तमाड़ विपक्ष के पास हैं। इनमें से खूंटी सीट से भाजपा के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा हैं, जो कांग्रेस प्रत्याशी कालीचरण मुंडा के सगे भाई हैं। सिमडेगा से बिमला प्रधान भाजपा विधायक हैं। खूंटी के चुनाव परिणाम पर नजर डालने से साफ हो जाता है कि अर्जुन मुंडा को अपनी पार्टी के कब्जे वाले विधानसभा क्षेत्रों में कम मत मिले। खूंटी विधानसभा क्षेत्र से अर्जुन मुंडा को 51 हजार 410 मत मिले, जबकि कालीचरण मुंडा ने यहां से 77 हजार 812 वोट हासिल किये। इस तरह अपने सगे भाई की सीट से कांग्रेस उम्मीदवार ने 26 हजार 402 वोटों की बढ़त ले ली। इसी तरह सिमडेगा से अर्जुन मुंडा को 66 हजार 122 मत मिले, जबकि कालीचरण मुंडा को 71894 वोट मिले और यहां से कांग्रेस को 5772 वोटों की बढ़त हासिल हुई।

तमाड़ विधानसभा क्षेत्र में विधायक विकास सिंह मुंडा का जादू फेल

तमाड़ विधानसभा क्षेत्र में विधायक विकास सिंह मुंडा का जादू फेल

इसके विपरीत तमाड़ विधानसभा क्षेत्र में विधायक विकास सिंह मुंडा का जादू पूरी तरह फेल कर गया। विकास चुने तो गये थे आजसू के टिकट पर, लेकिन कुछ दिन पहले ही वह बागी हो गये और तब आजसू ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। बाद में उन्होंने आजसू छोड़ दी और झामुमो के खेमे में दिखने लगे। तमाड़ में वह कालीचरण मुंडा को महज 44 हजार 872 वोट ही दिला सके, जबकि अर्जुन मुंडा को 86 हजार 252 वोट मिले। इस तरह भाजपा को वहां से 41 हजार 380 वोटों की लीड मिल गयी। यही कहानी खरसावां में दोहरायी गयी। खरसावां से कभी खुद अर्जुन मुंडा विधायक रहे थे और अभी यह सीट झामुमो के पास है। वहां अर्जुन मुंडा को 88 हजार 852 वोट मिले, जबकि कालीचरण मुंडा महज 55 हजार 971 वोट ही पा सके। तोरपा और कोलेबिरा में कांग्रेस को उम्मीद के अनुरूप बढ़त मिली, क्योंकि तोरपा सीट अभी झामुमो के पौलुस सुरीन के पास और कोलेबिरा सीट कांग्रेस के नमन विक्सल कोनगाड़ी के पास है।

लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में मुकाबला था रोचक

लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र में मुकाबला था रोचक

उधर लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र से सुखदेव भगत के मैदान में उतरने से मुकाबला रोमांचक हो गया था। वैसे भाजपा को भरोसा था कि कम से कम गुमला और सिसई में उसका प्रदर्शन अच्छा होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। भाजपा को उम्मीद थी कि दिनेश उरांव और शिवशंकर उरांव बेहतर करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ करिश्मा नहीं हो पाया। सिसई और गुमला की बात करें, तो दोनों सीटों पर भाजपा पिछड़ गयी। गुमला में भाजपा को 62,228 वोट मिले। वहीं सिसई में 61504 लोगों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया। दूसरी ओर इस क्षेत्र से कांग्रेस को क्रमश: 79313 और 71978 वोट मिले। वहीं दूसरी ओर गैर भाजपाई सीटों पर कमल ने खूब करिश्मा दिखाया। झामुमो की सीट विशुनपुर में भाजपा को 73255 मत मिले, वहीं कांग्रेस को यहां 59946 वोट मिले। दूसरी ओर लोहरदगा में 80698 वोट भाजपा को और 68577 वोट कांग्रेस को मिले।

इससे साफ हो जाता है कि खूंटी और लोहरदगा के जिन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के विधायक हैं, वहां से अर्जुन मुंडा और सुदर्शन भगत को बढ़त नहीं मिली, लेकिन जिन क्षेत्रों में विपक्ष का दबदबा है, वहां की जनता ने खुद मोर्चा संभाला और भाजपा को एकमुश्त वोट दिया। इतना ही नहीं, विपक्ष के कब्जे वाली सीट से मिली बढ़त ही अर्जुन मुंडा और सुखदेव भगत की जीत के लिए निर्णायक साबित हुई।

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