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Jharkhand Assembly Elections 2019: अन्नदाता की खुशहाली के नाम पर रघुबर मांग रहे हैं वोट, क्या किसान बनेंगे उनके भाग्य विधाता?

By Ashok Kumar Sharma
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रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास दोबारा सत्ता पाने के लिए चुनाव मैदान में हैं। मुख्य विपक्षी दल झामुमो के नेता हेमंत सोरेन उन्हें हर मोर्चे पर फेल बता रहे हैं। दूसरी तरफ ऱघुवर दास अपनी और केन्द्र सरकार की उपलब्धियों के आधार पर वोट मांग रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में कृषि के विकास को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है। वे अपने चुनावी भाषणों में लोगों को बता रहे हैं कैसे राज्य ने खेती के मामले में लंबी छलांग लगायी है। रघुवर दास खेती और किसानों की बात कर गांव-गांव में पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। अब देखना है कि ऱघुवर दास किसानों को सरकार की उपलब्धियां गिना कर कैसे अपना किला बचा पाते हैं।

कृषि विकास दर में 19 फीसदी की बढ़ोतरी

कृषि विकास दर में 19 फीसदी की बढ़ोतरी

सीएम रघुवर दास का दावा है कि झारखंड ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान कृषि के क्षेत्र में काफी तरक्की की है। यहां कृषि का मतलब है खेती, बागवानी और पशुपालन का सम्मलित रूप। पिछले चार साल में फसल उत्पादन बढ़ा है तो पशुपालन, मछली पालन और सब्जी उगाने में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। झारखंड को दो बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिल चुका है। राज्य के किसान प्रशिक्षण के लिए विदेश जा रहे हैं। किसानों की मेहनत और सरकार के सहयोग से पिछले चार साल में कृषि विकास दर में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। चार साल पहले कृषि विकास दर माइनस 4.5 फीसदी थी जो अब बढ़ कर 14.29 फीसदी हो गय़ी है। आधुनिक तकनीक से खेती को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र और राज्य ने कई योजनाएं शुरू की हैं। प्रधाननमंत्री किसान सम्मान नीधि योजना और मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना इनमें सबसे महत्वपूर्ण है। इसके तहत राज्य के 35 लाख किसानों को न्यूनतम 11 हजार रुपये और अधितम 31 हजार रुपये मिल रहे हैं। 11 लाख किसानों के खाते में पैसा चला भी गया। अब किसानों को बीज और खाद के लिए कर्ज नहीं लेना पड़ता । सूदखोरों के जाल से किसान मुक्त हो रहे हैं। किसानों की आय दोगुनी करने की योजना पर काम चल रहा। वैसे तो झारखंड की पहचान खनिज संपदा के लिए लेकिन अब यह कृषि विकास में तेजी से आगे बढ़ रहा।

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धान उत्पादन के लिए राष्ट्रीय कृषि कर्मण पुरस्कार

धान उत्पादन के लिए राष्ट्रीय कृषि कर्मण पुरस्कार

झारखंड को 2016-17 में खरीफ (धान) उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार मिल चुका है। पुरस्कार के रूप में केन्द्र सरकार ने राज्य को दो करोड़ रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया था। 2016-17 के दौरान राज्य के 17.07 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हुई थी जिसमें कुल उत्पादन 48.48 टन हुआ। एक हेक्टेयर में 28.4 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ था। पिछले पांच साल के मुकाबले धान के उत्पादन मैं 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। धान की इस बंपर उपज से झारखंड ने खेती के क्षेत्र में भी विशेष पहचान बनायी। झारखंड के धान से तैयार चावल की देश भर में मांग है। मांग बढ़ने से उत्पाद भी बढ़ गया है। धान की आधुनिक खेती के प्रशिक्षण के लिए अब रघुवर सरकार किसानों को इजरायल भेज रही है। गोलान पहाड़ियों की वजह से इजरायल में भी खेती की परिस्थियां झारखंड जैसी हैं। इजरायल में विपरित परिस्थियों के बावजूद वहां के किसान विशेष बीज और तकनीक से खेती कर धान का अच्छा उत्पादन करते हैं। इस प्रशिक्षण का अब और बेहतर नतीजा सामने आएगा।

 यूं मिला खेतों को पानी और झारखंड बना नंबर एक

यूं मिला खेतों को पानी और झारखंड बना नंबर एक

मनरेगा के तहत खेती के ढांचागत विकास में झारखंड, देश भर में अव्वल है। केन्द्रीय ग्रामीण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक झारखेड ने मनरेगा आवंटन की 97 फीसदी राशि खर्च कर सिंचाई के लिए सबसे बेहतर इंतजाम किये। झारखंड ने अप्रैल 2019 से लेकर अक्टूबर 2019 तक मनरेगा में 841 करोड़ 19 लाख रुपये खर्च किये थे। छोटी- छोटी जल धाराओं के मिला बड़ी जलधारा बनायी गयी और उसे खेतों तक पहुंचाया गया। इससे पूरे साल सिंचाई के लिए पानी मिलता रहा। बारिश का पानी पहले खेतों से बह कर बाहर चला जाता था। लेकिन इस बार ट्रेंच खोद कर पानी को जमा किया। इससे जून के महीने में भी खेत में नमी बनी रही। इससे खरीफ की फसल को तो फायदा मिला ही सब्जी की खेती में जबर्दस्त उछाल आया। मनरेगा में इतना काम होने से राज्य के मजदूरों को भी रोजगार मिला। इससे किसानों और मजदूरों, दोनों को फायदा हुआ। किसानों की आमदनी बढ़ी को मजदूरों की क्रयशक्ति बढ़ी। वैसा तो मनरेगा भ्रष्टाचार के लिए बदनाम है लेकिन झारखंड में रघुवर सरकार ने योजनाओं के कार्यान्वयन में सख्ती दिखा कर बेहतर परिणाम हासिल किये। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत किसानों के डीप इरिगेशन या स्प्रींक्लर इरिगेशन के लिए 90 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। इसकी वजह से झारखंड के सिंचित क्षेत्र में काफी इजाफा हुआ है। 2015 में राज्य का कुल सिचिंत क्षेत्र जहां 91 हजार 323 हेक्टेयर था वहीं 2019 में यह बढ़ कर 2 लाख 10 हजार 720 ङेक्टेयर हो गया है। सिंचाई के लिए बिजली का अलग फीडर बनाया गया है। खेतों में पानी आया तो फसल भी लहलहाने लगी।

 महिलाएं मिट्टी की डॉक्टर, झारखंड की अनोखी पहल

महिलाएं मिट्टी की डॉक्टर, झारखंड की अनोखी पहल

झारखंड में खेती की उन्नति के लिए हर पंचायत में दो महिलाओं को मिट्टी का डॉक्टर बनाने का फैसला अपने आप में बिल्कुल अनोखा है। इस योजना के तहत झारखंड में अब तक 350 मिट्टी की डॉक्टर तैयार हो चुकी हैं। इन्हें उचित प्रशिक्षण दे कर मिट्टी जांच के लिए टेस्ट किट भी दिया गया है। ये महिलाएं अपनी पंचायत में मिट्टी की जांच कर किसानों को उसके मुताबिक फसल लगाने की सलाह दे रही हैं। राज्य की कुल 4367 ग्राम पंचायतों में दो- दो महिलाओं को मिट्टी का डॉक्टर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मिट्टी के मिजाज के हिसाब से फसल लगाने और खाद डालने से पैदावार में बढोतरी होगी। इस योजना तहत हर मिट्टी जांच के लिए संबंधित महिला को 140 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। अगर किसी मिट्टी की डॉक्टर दीदी ने 100 सेंपल का टेस्ट किये तो वह 14 हजार रुपये महीना कमा सकती है। इस योजना से खेती के तौर-तरीकों में जबर्दस्त बदलाव आया है। इस तरह रघुवर दास ने राज्य के अन्नदाता को अपना भाग्य विधाता बनाया है।

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English summary
Chief Minister Raghubar Das is contesting the polls from the Jamshedpur (East) seat, BJP released the party's manifesto for Jharkhand polls, promising a slew of measures for the farmers and a mobile handset.
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