झारखंड चुनाव : चौथे चरण की 15 में से 12 सीटों पर भाजपा का कब्जा, क्या सुरक्षित रह पाएगा कमल का किला ?

नई दिल्ली। झारखंड विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में 15 सीटों पर 16 दिसम्बर को वोटिंग है। इस दौर का चुनाव भाजपा के लिए सबसे अहम है। अगर भाजपा अपना किला बचाने में कामयाब होती है तो वह मुकाबले में बनी रहेगी वर्ना सत्ता की बागडोर हाथ से फिसल भी सकती है। चौथे चरण की 15 सीटों में से 12 पर भाजपा काब्जा है। उसके सामने इन सीटों को बचाने की चुनौती है। दूसरी तरफ अगर विपक्षी महागठबंधन को मजबूत दावेदारी पेश करनी है तो उसे इस चरण में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

 देवघर

देवघर

बाबा बैद्यनाथधाम के रूप में मशहूर देवघर देश और दुनिया में चर्चित है। विधानसभा की देवघर सीट एससी के लिए सुरक्षित है। यह भाजपा की सीट है। पिछले चुनाव में भाजपा के नारायण दास जीते थे। उन्होंने राजद के सुरेश पासवान को हराया था। इस बार भी भाजपा के नारायण दास और राजद के सुरेश पासवान के बीच ही मुकाबला है। झामुमो नेता रहीं निर्मला भारती इस बार झाविमो के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। जब कि कांग्रेस के नेता रहे संतोष पासवान आजसू के उम्मीदवार हैं। संतोष, सुरेश पासवान के भतीजे हैं। महागठबंधन में बगावत से बाजपा की स्थिति बेहतर दिखायी दे रही है।

 मधुपुर

मधुपुर

यह सीट भाजपा की है। पिछले चुनाव में भाजपा के राज पलिवार ने झामुमो के हाजी हुसैन अंसारी को हराया था। 2019 में भी भाजपा के राज पलिवार और झामुमो के हाजी हुसैन अंसारी में ही मुकाबला है। राज पलिवार रघुवर सरकार में मंत्री भी हैं। गंगा नारायण के आजसू से लड़ने के कारण भाजपा को परेशानी हो रही है। दूसरी तरफ झाविमो प्रत्याशी साहिम खान ने झामुमो की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। इस सीट पर ओवैसी की पार्टी से मो. इकबाल भी चुनाव लड़ रहे हैं जो हाजी हुसैन अंसारी के वोट बैंक में सेंधमारी कर रहे हैं।

गांडेय

गांडेय

यह भी भाजपा की सीट है। मौजूदा विधायक और भाजपा उम्मीदवार जयप्रकाश वर्मा का मुकाबला झामुमो के सरफराज अहमद से है। दिलचस्प है कि सरफराज अहमद कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। जब उनके लिए महागठबंधन में सीट एडजस्ट नहीं हुआ तो वे झामुमो के टिकट मैदान में आ गये। सरफराज को झामुमो उम्मीदवार बनाये जाने से पार्टी में नाराजगी है। झाविमो से दिलीप वर्मा और भाकपा माले से राजेश कुमार मैदान में हैं।

कैसा है गिरिडीह, बोकारो और सिंदरी सी का हाल

कैसा है गिरिडीह, बोकारो और सिंदरी सी का हाल

गिरिडीह

2014 में इस सीट पर भाजपा के निर्भय शाहाबादी चुनाव जीते थे। 2019 में भी वे उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला झामुमो के सुदिव्य कुमार से है। झाविमो के चुन्नू कांत और लोजपा से उपेन्द्र शर्मा भी चुनौती पेश कर रहे हैं।

बोकारो

बोकारो सीट भाजपा की है। भाजपा के मौजूदा विधायक विरंची नारायण का मुकाबला कांग्रेस की श्वेता सिंह से है। श्वेता सिंह बिहार-झारखंड के दिग्गज नेता रहे समरेश सिंह की बहू हैं। झाविमो के प्रकाश कुमार और आजसू के राजेन्द्र महतो मुकाबले को चतुष्कोणीय बना रहे हैं।

सिंदरी

ये सीट भाजपा की है लेकिन इस बार सीटिंग विधायक का टिकट कटने का असर पड़ सकता है। 2014 में फूलचंद मंडल भाजपा से जीते ते। 2019 में वे झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने इस बार इंद्रजीत महतो को उम्मीदवार बनाया है। आजसू के सदानंद महतो और मार्क्सवादी समन्वय समिति के आनंद महतो मुकाबले को चतुष्कोणीय बना रहे हैं।

 कैसा है धनबाद, झरिया और चंदन क्यारी सीट का हाल

कैसा है धनबाद, झरिया और चंदन क्यारी सीट का हाल

चंदन क्यारी

इस सीट पर मौजूदा विधायक और भाजपा के उम्मीदवार अमर कुमार बाउरी का मुकाबला आजसू के उमाकांत रजक से है। अमर बाउरी 2014 में झाविमो से जीते थे और भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं। झामुमो के विजय रजवार मुकाबले को त्रिकोणात्मक बना रहे हैं।

धनबाद

इस सीट पर पुराने चेहरों के बीच ही फिर मुकाबला है। भाजपा के उम्मीदवार और मौजूदा विधायक राज सिन्हा का मुकाबला कांग्रेस के मन्नान मलिक से है। झाविमो के सरोज सिंह और आजसू को प्रदीप मोहन भी मैदान में हैं।

झरिया

झरिया सीट भाजपा की है। लेकिन मौजूदा विधायक संजीव सिंह, नीरज सिंह हत्याकांड में आरोपी होने की वजह से जेल में हैं। इस बार भाजपा ने संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह को मैदान में उतारा है। रागिनी सिंह को कांग्रेस की पूर्णिमा सिंह चुनौती दे रही है। पूर्णिमा, दिवंगत नीरज सिंह की पत्नी है। जेठानी देवरानी के बीच कांटे का मुकाबला है।

कैसा है इन सीटों का हाल

कैसा है इन सीटों का हाल

निरसा

ये मार्क्सवादी समन्वय समिति की सीट है। मामस उम्मीदवार और मौजूदा विधायक अरूप चटर्जी का मुकाबला भाजपा की अपर्णा सेनगुप्ता से है। अपर्णा ऑरवर्ड ब्लॉक छोड़ कर भाजपा में आयी हैं। झामुमो के अशोक मंडल भी यहां चुनौती पेश कर रहे हैं।

टुंडी

ये आजसू की सीट है। मौजूदा विधायक और आजसू उम्मीदवार राजकिशोर महतो का मुकाबला झामुमो के मथुरा प्रसाद महतो से है। भाजपा के विक्रम पांडेय और झाविमो के डॉ. सबा अहमद मुकाबले को चौतरफा बना रहे हैं। भाजपा ने दस साल बाद इस सीट पर प्रत्याशी दिया है।

बाघमारा

बाघमारा भाजपा की सीट है। भाजपा उम्मीदवार और मौजूदा विधायक ढुल्लू महतो का मुकाबला कांग्रेस के जलेश्वर महतो से है। ढुल्लू दबंग छवि के नेता हैं और वे तीन बार इस सीट पर जीत चुके हैं।

बगोदर

यह भाकपा माले का गढ़ रहा है लेकिन 2014 में भाजपा के नागेन्द्र महतो ने माले के विनोद सिंह को हरा कर ये सीट जीत ली थी। 2019 में भी भाजपा के नागेन्द्र महतो और भाकपा माले के विनोद सिंह में ही मुकाबला है। आजसू के अनूप पांडेय और झाविमो की रजनी कौर भी चुनौती पेश कर रही हैं।

जमुआ

ये भाजपा की सीट है। भाजपा उम्मीदवार और मौजूदा विधायक केदार हाजरा का मुकबला कांग्रेस की मंजू कुमारी से है। आजसू के सत्यनारायण दास और झाविमो के चंद्रिका महथा मुकाबले को चतुष्कोणीय बना रहे हैं।

डुमरी

ये झामुमो की सीट है। झामुमो के सीटिंग विधायक जगरनाथ महतो इस सीट पर हैट्रिक लगा चुके हैं। चौका मारने के लिए वे फिर मैदान में हैं। जगरनाथ महतो का मुकाबला भाजपा के प्रदीप कुमार साहू से है। आजसू की यशोदा देवी और जदयू के लालचंद महतो भी यहां चुनौती पेश कर रहे हैं।

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