मोदी को सलाम न ठोंकना पड़े इसलिए राम मांझी को नीतीश ने बनाया सीएम

दो दिन पहले ही नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद विधायक दल ने अगले मुख्यमंत्री का चुनाव करने की जिम्मेदारी उन्हीं को सौंपी थी। सोमवार शाम को नीतीश कुमार मांझी के साथ राज्यपाल से मिले।
नीतिश कुमार ने शनिवार को इस्तीफा दिया यानी शुक्रवार को जब लोकसभा चुनावों के रिजल्ट साफ हो गए। इन नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और अब नरेंद्र मोदी देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे।
देश के प्रधानमंत्री और किसी राज्य के मुख्यमंत्री के बीच होने वाली बैठकों में मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री के साथ हाथ मिलाना पड़ता है और उसका सम्मान करना पड़ता है। लेकिन शायद नीतिश ऐसा नहीं करना चाहते थे और इसलिए उन्होंने यह दांव खेला।
मांझी 2014 में लोकसभा चुनाव लड़े थे। उन्होंने गया सीट से चुनाव लड़ा और हार गए। वह तीसरे नंबर पर रहे थे। जीतन राम मांझी को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। जीतन राम मांझी नीतिश कुमार कैबिनेट में सामाजिक कल्याण मंत्री रहे हैं।
मांझी दलित हैं और काफी अर्से बाद कोई दलित बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बैठेगा। जब नीतीश कुमार पहली बार राज्य में सरकार बना रहे थे, तब भी जीतन राम मांझी का नाम मंत्रियों की सूची में शामिल था, लेकिन उन पर एक शिक्षा घोटाले के आरोप लगे थे, जिस कारण उनका नाम कट गया और उन्हें रातोंरात इस्तीफा देना पड़ा।
बाद में वह घोटाले के आरोपों से बरी हो गए और राज्य में मंत्री बने। इसके पहले जद-यू विधायक दल ने नीतीश को अपना नया उत्तराधिकारी चुनने का अधिकार दिया था।
बिहार प्रदेश जदयू अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने बताया कि जदयू विधायक दल ने नए नेता के चयन के लिए नीतीश कुमार को अधिकृत किया है। वहीं नीतिश ने भी सोमवार को मीडिया में आकर साफ कर दिया कि उन्होंने जो भी फैसला लिया वह भावावेश में आकर नहीं लिया हैं बल्कि यह एक सोचा-समझा फैसला है।












Click it and Unblock the Notifications