Bihar Elections: सुपौल से लगातार 8वीं जीत के लिए बिजेंद्र यादव मैदान में, 30 साल से कायम है बादशाहत
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के तीसरे और आखिरी चरण के लिए 7 नवम्बर शुक्रवार को वोट डाले जाएंगे। तीसरे चरण में ही सुपौल सीट (Supaul Assembly) पर भी मतदान होना है। सुपौल विधानसभा जेडीयू का गढ़ है। यहां से जेडीयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव (Bijendra Prasad Yadav) 30 साल से विधायक हैं और इस बार लगातार 8वीं जीत के लिए चुनाव मैदान में हैं।

सुपौल विधानसभा में जेडीयू के दिग्गज नेता और नीतीश सरकार में मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव की साख दांव पर है। सुपौल के गढ़ में बिजेंद्र प्रसाद यादव को हरा पाना किसी के लिए भी मुश्किल होगा लेकिन इस बार के जो समीकरण हैं उसमें हार-जीत का दावा कर पाना इतना आसान भी नहीं है। महागठबंधन में सुपौल सीट कांग्रेस के हिस्से आई है जहां से पार्टी ने मिनतुल्लाह रहमानी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं चिराग पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी ने प्रभाष चंद्र मंडल को उम्मीदवार बनाकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।
पिछला चुनाव बंपर वोट से जीते
2015 के विधानसभा चुनाव में यादव ने बीजेपी के किशोर कुमार को 37 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराकर सीट पर कब्जा किया था। हालांकि इसकी वजह थी कि पिछला चुनाव जेडीयू और राजद ने साथ मिलकर लड़ा था। उसके पहले के तीन चुनावों में बिजेंद्र प्रसाद को राजद के प्रत्याशी से अच्छी टक्कर मिली थी। इस बार समीकरण बदले हुए हैं। एक बार फिर जेडीयू और बीजेपी एक साथ हैं। वहीं लोजपा के जेडीयू की सीटों पर प्रत्याशी उतारने से कई सीटों पर समीकरण डगमगाते नजर आए हैं।
30 साल से बादशाहत
बिजेंद्र प्रसाद यादव ने निर्विवाद रूप से पिछले 30 साल से सुपौल विधानसभा सीट पर अपनी बादशाहत बरकरार रखी है। पहली बार 1990 में सुपौल से जीते तो इस सीट से उनका ऐसा नाता जुड़ा जो आज तक जारी है। 1995 के अगले विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की। 2000 के चुनाव में भी ये सीट उनके नाम रही। इसके बाद 2005 में फरवरी और अक्टूबर में हुए चुनाव, 2010 और 2015 के विधानसभा चुनाव में भी जीत मिली। इस बार बिजेंद्र प्रसाद यादव लगातार आठवीं बार सुपौल से जीत की उम्मीद में किस्मत आजमा रहे हैं। बिजेंद्र प्रसाद से पहले ये इलाका कांग्रेस का गढ़ रहा था। यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी सात बार चुनाव जीत चुके हैं।
सुपौल की 85 प्रतिशत आबादी ग्रामीण है। 2.9 लाख मतदाता 7 नवम्बर को होने वाले चुनाव में 295 मतदान केंद्रों पर अपना वोट डालेंगे। यहां पर लगभग 13 प्रतिशत मतदाता दलित हैं।












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