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65 की जंग लाहौर के डोगराई में पाक आर्मी को धूल चटाने वाले सूबेदार मेजर ने मनाया 100वां जन्‍मदिन

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नई दिल्‍ली। भारत को यूं ही वीरों की धरती नहीं कहा जाता है। इस धरती पर कई ऐसे योद्धा हुए हैं जिन्‍होंने दुश्‍मनों से देश की रक्षा की और आज तक यहां पर ऐसे वीरों को तैयार किया जा रहा है, जो दुश्‍मनों के छक्‍के छुड़ा सकते हैं। सूबेदार मेजर प्रताप सिंह, उन्‍हीं सूरमाओं में से एक हैं। सन् 1965 की जंग में पाकिस्‍तान को धूल चटाने वाले सूबेदार मेजर (मानद कैप्‍टन) प्रताप ने हाल ही में अपनी जिंदगी के 100 बसंत पूरे किए हैं। उनके इस खास जन्‍मदिन को जाट रेजीमेंट ने भी पूरे जोश के साथ मनाया।

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पलटन का अहम हिस्‍सा थे सूबेदार

जिस समय 65 की जंग हुई उस समय प्रताप सिंह 3 जाट के साथ बतौर सूबेदार मेजर तैनात थे जिसने डोगराई के युद्ध में अपने साहस का परिचय दिया था। सेना के इतिहास में ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं जहां पर किसी यूनिट को पहले यह आदेश दिया जाए कि उसने जिस पोस्‍ट पर कब्‍जा कर लिया है, उसे खाली कर दी और कुछ ही देर बाद उसी पोस्‍ट पर दोबारा कब्‍जे का आदेश दिया जाए। सूबेदार मेजर की यूनिट 3 जाट ने यही कारनामा किया था। हैंड-टू-हैंड बैटल में उनकी यूनिट ने दूसरी बार पोस्‍ट पर कब्‍जा किया था। डोगराई का युद्ध सेना का इतिहास वह सुनहरा अध्‍याय है जिसे जानने के बाद आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। यह युद्ध पाकिस्‍तान के पंजाब प्रांत में लाहौर के बाहरी हिस्‍से में स्थित डोगराई के गांव में लड़ा गया था।

दो दिनों तक चला था युद्ध

20 सितंबर 22 सितंबर तक वह युद्ध चला था। डोगराई, पाकिस्‍तान के लिए रणनीतिक तौर पर काफी अहम गांव है। यह गांव लाहौर से बस एक किलोमीटर दूर स्थित है। लाहौर के एकदम करीब होने की वजह से पाकिस्‍तान हमेशा यहां पर अलर्ट की स्थिति में रहता है। सूबेदार मेजर प्रताप सिंह की यूनिट के 86 सैनिक शहीद हो गए थे लेकिन उन्‍होंने 308 पाक सैनिकों को मार कर 108 सैनिकों को जिंदा पकड़ा था। सिर्फ इतना ही नहीं पाकिस्‍तान सेना की 16 पंजाब के कमांडिंग ऑफिसर को भी पकड़ लिया गया था। डोगराई पलटन को 4 महावीर चक्र, 4 वीर चक्र, 7 सेना मेडल और कई सैन्‍य पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया गया था। उस युद्ध में पलटन के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल हायड ने दूसरे हमले से पहले एक नारा दिया था, 'एक भी आदमी पीछे नहीं हटेगा, जिंदा या मुर्दा, डोगराई में मिलना है।'

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English summary
Jat regiment celebrates 100th birthday of Sub Maj Pratap Singh. He participated in 1965 India-Pakistan war.
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