कौन था जरनैल सिंह भिंडरावाले जिसके गांव में अमृतपाल सिंह ने किया सरेंडर?
जरनैल सिंह भिंडरावाले का जन्म पंजाब के मोगा में ही हुआ था, जहां पर भगोड़े अमृतपाल सिंह ने कथित तौर पर सरेंडर किया है। भिंडरवाले एक खालिस्तानी आतंकी था, जो ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारा गया था।

कट्टरपंथी सिख उपदेशक अमृतपाल सिंह ने एक महीने से ज्यादा समय तक पुलिस को चकमा देने के बाद आखिरकार पंजाब के मोगा में सरेंडर किया है। मोगा में सरेंडर करने की एक खास वजह मानी जा रही है। यह खालिस्तानी अलगवावादी और आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले का जन्मस्थान है।

भिंडरावाले के जन्मस्थान में अमृतपाल ने किया सरेंडर
कई दिनों से भगोड़ा रहे अमृतपाल सिंह के बारे में दावा किया जाता है कि वह आतंकवादी सरगना भिंडरावाले का अनुयायी है और अपने समर्थकों के बीच वह 'भिंडरावाले 2.0' के तौर पर कुख्यात है। दरअसल, भिंडरवाले खालिस्तानी आतंकवाद का बहुत ही खतरनाक चेहरा है।

जरनैल सिंह भिंडरावाले कौन था?
जरनैल सिंह भिंडरावाले के खिलाफ करीब 39 वर्ष पहले भारतीय सेना को अबतक का सबसे बड़ा घरेलू ऑपरेशन चलाना पड़ा था, जिसे ऑपरेशन 'ब्लू स्टार' का नाम दिया गया था। 1947 में जन्मे भिंडरवाले का मूल नाम जरनैल सिंह था।

भिंडरवाले ने स्वर्ण मंदिर को बनाया था ठिकाना
जरनैल सिंह कहने को तो धार्मिक नेता था, लेकिन वह आतंकवाद के दम पर अलग खालिस्तान बनाने का मंसूबा पाले बैठा था। सबसे बड़ी बात की उसने और उसके समर्थकों ने पवित्र हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) को ही अपना ठिकाना बना लिया था और उसकी पवित्रता नष्ट कर रहा था।

किसान परिवार में जन्मा था भिंडरवाले
भिंडरावाले का जन्म एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था। लेकिन, सिख धर्म में दिलचस्पी की वजह से उसने जल्द ही उसपर काफी पकड़ प्राप्त कर ली और लोगों के बीच इसके लिए जाना भी जाने लगा। ब्रिटैनिका डॉट कॉम के मुताबिक सिखो में उसके प्रभाव को देखते हुए पहले कांग्रेस ने ही शिरोमणि अकाली दल की काट के तौर पर उसका इस्तेमाल किया।

दमदमी टकसाल का प्रमुख था भिंडरवाले
इस घटना ने भिंडरवाले की महत्वाकांक्षा काफी बढ़ा दी और 1982 में वह हरमंदिर साहिब परिसर में प्रवेश कर गया और भारत विरोधी विचारधारा वाले सिखों और हथियारों का जखीरा जमा करना शुरू कर दिया। वह सिख धर्म के दमदमी टकसाल से जुड़ा था और 1977 में इसका प्रमुख बना था।

जून 1984 में शुरू हुआ ऑपरेशन ब्लू स्टार
धीरे-धीरे भिंडरवाले का आतंक इस कदर बढ़ गया कि वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन गया। वह सीधे भारत सरकार को चुनौती दे रहा था। आखिरकार जून, 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने भारतीय सेना को स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति देनी पड़ी।
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भारतीय सेना को भी जबर्दस्त नुकसान हुआ था
रिपोर्ट्स के मुताबिक आखिरकार करीब 2,000 लोगों की जान जाने के बाद भारतीय सेना के संयुक्त ऑपरेशन में भिंडरवाले का अंत हुआ। लेकिन, द प्रिंट के मुताबिक यह भारतीय सेना का पहला ऐसा घरेलू ऑपरेशन है, जिसमें महज 24 घंटे के अंदर 136 सैनिकों को भी जान गंवानी पड़ी।

राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए सिख धर्म का इस्तेमाल किया
कुल मिलाकर भिंडरवाले एक ऐसा आतंक था, जिसने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और निहित स्वार्थ के लिए सिख धर्म का ना सिर्फ गलत इस्तेमाल किया, बल्कि स्वर्ण मंदिर जैसे पवित्र स्थान को भी नुकसान पहुंचाने का काम किया।
उसने अपना पूरा साम्राज्या हिंसा, नफरत और देश-विरोधी मनसूबों पर खड़ा किया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार में उसकी तरह के विचारधारा वाले जो लोग बच गए,वही आज भी विदेशी धरती से भारत-विरोधी अभियान को अंजाम दे रहे हैं, जिन्हें वह खालिस्तान कहते हैं। (भिंडरवाले की पहली तस्वीर फाइल, बाकी यूट्यूब वीडियो के सौजन्य से)












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