जामताड़ा: 8वीं पास लड़के किसी जज या सांसद को कैसे देते हैं झांसा? अब होगा रिसर्च

कभी –कभी ज्ञान के स्वरूप और उसके स्तर पर बहुत अचंभा होता है। क्या डिजिटल ट्रांजेक्शन के मामले में आठवीं पास कोई लड़का प्रोफेशनल्स, सांसदों, जजों को मात दे सकता है ? जब इसका जवाब हां में मिलता है तो हैरान होना लाजिमी है। झारखंड के जामताड़ा को देश में साइबर क्राइम का कैपिटल कहा जाता है। इस जिले में डिजिटल ठगी एक उद्योग का रूप ले चुकी है। जामताड़ा के कम पढ़े-लिखे लड़के किस दिमाग से बुद्धिजीवियों को झांसा देने में सफल होते हैं ? अमेरिका जैसा विकसित देश भी यह जानना चाहता है। अमेरिका की एक एजेंसी जामताड़ा के साइबर अपराधियों के ब्रेन की स्टडी करने वाली है। जामताड़ा के साइबर ठगों ने पूरे भारत में ऐसा तहलका मचाया कि अमेरिकी ओटीटी फ्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स ने इस पर एक थ्रिलर वेबसीरीज बना डाली। जनवरी 2020 में नेटफ्लिक्स पर आठ एपिसोड वाला एक वेबसीरीज प्रसारित किया गया था जिसका नाम था 'जामताड़ा- सबका नम्बर आयेगा’। जामताड़ा गैंग के अपराधी पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पत्नी और सांसद परणीत कौर से 23 लाख रुपये ठग चुके हैं। ये अमिताभ बच्चन को भी पांच लाख रुपये का चूना लगा चुके हैं।

अमेरिका तक गूंज
हाल ही में दिल्ली में सभी राज्यों के पुलिस प्रधानों (डीजीपी स्तर) की एक बैठक हुई थी। इस बैठक में ये बात सामने आयी कि अमेरिका जामताड़ा के साइबर अपराधियों के आइटी ज्ञान पर रिसर्च करना चाहता है। आठवीं पास कोई लड़का बैंक मैनेजर बन कर किसी सांसद या इंजीनियर से फोन के जरिये उनका बैंक डिटेल्स कैसे हासिल करता है ? कोई पढ़ा लिखा आदमी क्यों नहीं इस बात को पकड़ पाता कि वह किसी स्कूल ड्रॉप आउट से बात कर रहा है ? इसी शातिर दिमाग पर अमेरिकी एजेंसी ने रिसर्च की दिलचस्पी दिखायी है। पुलिस अधिकारियों की बैठक में ये बात झारखंड के डीजीपी को बतायी गयी। अब जामताड़ा के एसपी का कहना है कि अगर अमेरिका की कोई रिसर्च टीम आयी तो उनकी नियमुनुकूल मदद की जाएगी। यानी सिलिकॉन वैली के लिए मशहूर अमेरिका अब आइटी ज्ञान की तलाश में जामताड़ा के गांवों की खाक छानेगा।

क्या से क्या हो गया करमाटांड
झारखंड के दुमका जिले को विभाजित कर 2001 में जामताड़ा को नया जिला बनाया गया था। जामताड़ा जिला में छह प्रखंड हैं जिनमें करमाटांड और नारायणपुर प्रमुख हैं। यहां करमाटांड और नारायणपुर की चर्चा इसलिए क्यों कि ये दोनों स्थान ही साइबर अराधियों का अड्डा हैं। वैसे अब ठगों का जाल गिरिडीह और देवघर जिले तक फैल गया है। ये बदकिस्मती ही कही जाएगी कि जो करमाटांड कभी महान शिक्षाविद और समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर की कर्मस्थली था अब वह डिजिटल अपराध के लिए कुख्यात है। ईश्वरचंद्र विद्यासागर 1873 में कोलकाता से करमाटांड चले आये थे। वे यहां के जंगल में आश्रम बना कर 18 साल रहे। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीब संथाल आदिवासियों के लिए समर्पित कर दिया था।

आठवीं पास बन गया बैंक मैनेजर !
झारखंड पुलिस ने 2019 में चरकू मंडल और अजय मंडल नामक दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया था। दोनों करमाटांड प्रखंड के सियाटांड गांव के रहने वाले थे। चरकू मंडल आठवीं पास था जब कि अजय मंडल मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होने वाला था। आठवीं पास चरकू बोलने में बहुत उस्ताद था। जब वह फोन पर किसी बात करता तो कोई पकड़ ही नहीं पाता था कि इतना कम पढ़ा लिखा है। चरकू फोन पर कभी बैंक मैनेजर बन जाता तो कभी ऑन लाइन शॉपिंग का प्रोमोटर बन जाता है। वह फोन पर तरह-तरह से बातें बना कर लोगों से बैंक डिटेल्स हासिल कर लेता। यहां तक कि वह कई बार ओटीपी नम्बर भी पूछने में कामयाब हो जाता। जब ये जानकारी मिल जाती तो अजय आइफोन से पैसे को अपने अकाउंट में ऑनलाइन ट्रांसफर कर लेता। चरकू ने जमशेदपुर के एक जज को झांसा दे दिया था। लेकिन वह इस मामले में पकड़ा गया और उसे जेल भी हुई। जेल से छूटने के बाद फिर वह अपने पुराने धंधे में लग गया। चरकू और अजय ने साइबर ठगी से करीब 10-12 लाख रुपये कमाये।

मैट्रिक फेल ने सांसद से ठगे 1.60 लाख रुपये
करमाटांड से तीन किलोमीटर दूर है एक गांव काशीटांड। काशीटांड गांव के पप्पू मंडल ने 2015 में एक दिन केरल के तात्कालीन सांसद एन के प्रेमचंद्रन को फोन लगा दिया। मैट्रिक फेल 22 साल के पप्पू ने दक्षिण भारत के एक सांसद से अंग्रेजी में कैसे बात की होगी, ये सोचने वाली बात है। दरअसर जामताड़ा के साइबर अपराधी अलग-अलग जरिये से ढेर सारा फोन नम्बर इकट्ठा करते हैं। उनके पास सिर्फ फोन नम्बर होता है। ये फोन नम्बर किसका है, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती। वे रोजाना कुछ नम्बर ट्राई करते हैं और झांसा देकर बैंक अकाउंट की जानकारी लेने की कोशिश करते। जिस दिन कोई शिकार फंस जाता उस दिन इनकी चांदी हो जाती। पप्पू मंडल ने सांसद प्रेमचंद्रन को फोन कर बताया कि वह रिजर्व बैंक का एक अधिकारी है। उसने झांसा दे कर सांसद से उनके बैंक खाता की जानकारी हासिल कर ली और 1 लाख 60 हजार रुपये का चूना लगा दिया। प्रेमचंद्रन कानून के टॉपर स्टूडेंट रहे थे। केरल में मंत्री भी रहे थे। फिर भी वे ये नहीं समझ पाये कि गांव के एक मैट्रिक फेल लड़के से बात कर रहे हैं। लेकिन पप्पू की बढ़ती लालच ने उसकी पोल खोल दी।

ऐसे पकड़ा गया शातिर
जब पप्पू ने एक बार सांसद को आसानी से ठग लिया तो उसे लगा कि कोई आसान शिकार फंस गया है। वह सांसद को अक्सर फोन कर उनसे ओटीपी नम्बर पूछने लगा। सांसद प्रेमचंद्रन अब सतर्क हो गये थे। उन्होंने दिल्ली पुलिस को इस बात की जानकरी दी। पुलिस ने सांसद से कहा कि जब उन्हें फोन आये तो वे इसे पुलिस कंट्रोल रूम को डाइवर्ट कर दें। आदत से लाचार पप्पू ने एक दिन फिर प्रेमचंद्रन को फोन किया और ओटीपी पूछा। ये फोन पुलिस के पास डाइवर्ट हो गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने फोन कॉल की जांच शुरू की। जांच का सिरा दिल्ली से जामताड़ा के काशीटांड तक जा पहुंच। पप्पू मंडल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ठगी की इस कमाई से पप्पू ने काशीटांड में दो-दो आलिशान घर बना रखे थे। पप्पू गिरफ्तार तो हुआ लेकिन तत्कालीन सांसद को उनका पैसा नहीं मिल पाया। जामताड़ा में ऐसी अनगिनत कहानियां हैं।












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