जम्मू में क्यों बढ़े आतंकी हमले? क्या पाकिस्तानी दहशतगर्दों को स्थानीय लोगों से मिल रही है मदद?

Jammu Terrorist attack 2024: जम्मू रीजन में आतंकी वारदातों में अचानक हुई बढ़ोतरी की वजह से विदेशी दहशतगर्दों को स्थानीय मदद मिलने की आशंका बढ़ती जा रही है। हालांकि, अभी तक यह पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि ऐसी मदद किसी लालच में दी जा रही है या फिर किसी दबाव की वजह लोग मजबूर हुए हैं।

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू शहर से दूर जंगल के इलाकों में दो गांव से हुई दो गिरफ्तारियों ने पाकिस्तानी आतंकियों को स्थानीय मदद मिलने का संदेह बढ़ा दिया है।

jammu terrorist attack

दो ओवर ग्राउंड वर्कर्स की गिरफ्तारी से बढ़ रहा संदेह
फिलहाल पुलिस ने दो स्थानीय नागरिकों की गिरफ्तारी पर जो संक्षिप्त बयान दिया है, उसके मुताबिक 'सावधानीपूर्वक छानबीन के आधार पर, आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों का समर्थन करने के लिए दो ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) की पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया।'

इसी बयान के अनुसार, 'वे लयाकत अली उर्फ पावू, कठुआ, बिल्लावार, कालन्हा धानु परोल वार्ड नंबर- 7 के रहने वाले गम्मी का बेटा और कठुआ जिले के ही मल्हार, बोवली मेहल्ला के उत्तम चंद का बेटा मूल राज उर्फ जेंजू हैं।'

अली और राज पर आतंकियों की मदद का क्यों बढ़ा शक?
अली और राज दोनों ही पीर पंजाल रेंज की घाटी वाली बस्तियों के निवासी हैं और दोनों की बस्तियां एक-दूसरे से बहुत ही दूर हैं। यह इतना दुर्गम इलाका है, जहां इंटरनेट या मोबाइल सेवाएं नहीं के बराबर काम करती हैं। लेकिन, तथ्य ये है कि इन दोनों का गांव उस जगह से ज्यादा दूर नहीं है, जहां 8 जुलाई को 22 गढ़वाल राइफल्स के दो पेट्रोलिंग ट्रकों पर आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया था, जिसमें 5 जवानों की शहादत हो गई थी।

दुर्गम इलाके और घने जंगलों में आतंकियों के मददगार?
दरअसल, माचेडी फॉरेस्ट बेल्ट का यह क्षेत्र एक सुदूर और ऊबड़-खाबड़ वाला बहुत ही दुर्गम इलाका है। यह गहरी घाटियों, घने जंगलों और पहाड़ी गुफाओं से घिरा क्षेत्र है, जो छोटे-छोटे ग्रुप में काम करने वाले आतंकवादियों के लिए बहुत ही माकूल ठिकाना बन रहा है। इलाके की इसी दुर्गमता की वजह से सुरक्षा बलों को तमाम ड्रोन, हेलीकॉप्टर और मिलिट्री डॉग की सेवाएं लेने के बावजूद दहशतगर्दों के खिलाफ अभियान को अंजाम देने में कड़ा संघर्ष करना पड़ा है।

पाकिस्तानी आतंकियों को क्यों मिल रही है स्थानीय मदद?
इलाके की इसी दुर्गमता ने सवाल उठाने को मजबूर किया है कि अगर आतंकी पाकिस्तान से आए हैं तो फिर वह इस क्षेत्र से इतनी अच्छी तरह से कैसे वाकिफ हो रहे हैं? क्या उन्हें स्थानीय स्तर पर सपोर्ट मिल रहा है? क्या वह बंदूक की नोक पर गांव वालों को मजबूर करने में सफल हो रहे हैं या फिर उनकी ओर से गांव वालों को किसी तरह से वित्तीय मदद मिल रही है?

बिना स्थानीय मदद के एक कदम भी नहीं बढ़ा सकते आतंकी- रिटायर्ड सैन्य अधिकारी
सेना के एक रिटायर्ड अधिकारी ने कहा है, 'विदेशी आतंकवादी जिन्हें टोपोग्राफी और सिक्योरिटी लेआउट का पता नहीं है, बिना स्थानीय सहायता के प्रभावी तौर पर सक्रिय नहीं हो सकते।' उनके मुताबिक, 'वे अपने ठिकाने से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा सकते। लेकिन, उन्होंने अपनी पसंद के निश्चित ठिकानों (हाल में जम्मू में जहां भी हमले हुए) पर हमला किया, जो कि बिना स्थानीय मदद और मार्गदर्शन के बिना संभव नहीं है।'

जंगल युद्ध में प्रशिक्षित हैं जम्मू में सक्रिय 60 से ज्यादा पाकिस्तानी आतंकी!
सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि अभी जम्मू क्षेत्र में 60 से ज्यादा विदेशी आतंकी मौजूद हैं, जो विशेष रूप से जंगल युद्ध में प्रशिक्षित हैं। जानकारी के मुताबिक इन पाकिस्तानी आतंकियों ने छोटे-छोटे ग्रुप बना रखे हैं और अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।

आतंकियों की एडवांस टेक्नोलॉजी ने सुरक्षा बलों की बढ़ाई चुनौती
इन आतंकियों के पास इरीडियम सैटेलाइट फोन और थर्मल इमेजरी जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी है और साथ ही साथ अमेरिकी एम4 कार्बाइन जैसे अत्याधुनिक हथियार भी।

इन अत्याधुनिक तकनीकों की उपलब्धता की वजह से आतंकियों का यह ग्रुप आपस में तालमेल बिठाने में सक्षम है, जिसकी वजह से सुरक्षा बलों की चुनौतियां बढ़ गई हैं। इसी का नतीजा है कि यह वारदात को अंजाम देने के बाद घने जंगलों में भी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकलने में सक्षम हो रहे हैं।

पहले भी ऐसे ही आरोपों में चार लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
अली और राज को आतंकियों को छिपाने और बिना पकड़े अपनी गतिविधियां जारी रखने में कथित रूप से मदद करने के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले पुलिस ने शौकत अली समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने डोडा जिले के देसा जंगल में 15 जुलाई के हमले से पहले तीन आतंकियों को कथित रूप से भोजन, पनाह और वाईफाई की सुविधाएं उपलब्ध करवाई थीं। उस हमले में चार जवान शहीद हो गए थे।

सेना के रिटायर्ड अधिकारी ने बताया कि 'विदेशी आतंकवादी स्थानीय लोगों को ढेर सारे पैसों की लालच देकर अपने लिए ओवर ग्राउंड वर्कर्स के तौर पर काम करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।' 'वे उन्हें लॉजिस्टिकल सपोर्ट और इंटेलिजेंस के बदले सुविधा और सुरक्षा के भरोसा का ऑफर दे सकते हैं।'

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+