Jammu Attack: जम्मू में इस वजह से तैयार हो रही आतंक की नई पौध, 86 दिन में 10 आतंकी हमले, 12 जवान शहीद
Why are Terrorist Attacks increasing in Jammu: कश्मीर से लगभग खत्म हो चुका आतंकवाद जम्मू में सिर उठा चुका है। जम्मू रीजन में भारतीय सेना पर आतंकी हमले लगातार जारी हैं।
15 जुलाई 2024 की रात को ही जम्मू के डोडा इलाके में आतंकी हमले में कैप्टन ब्रजेश थापा व राजस्थान के झुंझुनूं के जवान अजय सिंह नरूका व बिजेंद्र सिंह दौराता शहीद हो गए।

डोडा से 55 किलोमीटर दूर डेसा के जिस धोरी गोटे इलाके में आतंकियों ने भारतीय सेना पर हमला किया, वहां पहाड़ के एक तरफ 200 वर्ग किलोमीटर का घना जंगल है। जम्मू में आतंकी हमले बढ़ने की एक वजह जंगल भी है।
जम्मू में आतंकी हमले में बढ़ने की एक वजह ये भी है कि कश्मीर में इतनी फोर्स तैनात है कि आतंकी हरकत करने पर अधिकतम दो घंटे में मार गिराए जाते हैं। जम्मू बीते 20 साल से शांत रहा, इसलिए यहां फोर्स कम ही रही। आतंकी इसी का फायदा उठा रहे हैं।
जम्मू में आतंकी हमलों के आंकड़ों पर गौर करें तो बीते 86 दिन में 10 आतंकी हमले हुए हैं, जिनमें 12 सुरक्षा जवान व 10 आम व्यक्ति जान गंवा चुके हैं। पांच आतंकियों को भी मार गिराया गया है। पांच हमलों में आतंकी फरार हो गए।
जम्मू में 86 दिन कहां-कहां आतंकी हमले
15 जुलाई: डोडा में जवानों पर आतंकी हमला। कैप्टन समेत चार जवान शहीद।
8 जुलाई: कठुआ में सेना पर आतंकी हमला। पांच जवान शहीद। आतंकी फरार हो गए।
7 जुलाई: राजौरी में सुरक्षा पोस्ट पर फायरिंग। आतंकी भाग गए।
26 जून: डोडा में बड़ी मुठभेड़ में 3 विदेशी आतंकी मार गिराए गए।
12 जून: डोडा में हमला। पुलिस जवान घायल। आतंकी फरार।
11 जून: कठुआ में एनकाउंटर में दो आतंकी मार गिराए गए। जवान शहीद।
9 जून: रायसी में श्रद्धालुओं की बस पर आतंकी हमला। 9 की मौत।
4 मई: पुंछ में वायुसेना जवान शहीद। पांच घायल। आतंकी फरार।
28 अप्रैल: उधमपुर में विलेज गार्ड की हत्या। आतंकी फरार।
22 अप्रैल: राजौरी में सरकारी कर्मचारी को गोली मारी।
जम्मू के लिए बनानी होगी अलग रणनीति
दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट में पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, नॉर्दन कमांड ले. जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा बताते हैं कि पिछले 86 दिन में जम्मू संभाग में कठुआ, पुंछ, डोडा और राजौरी में मैदान कम, जंगल ज्यादा है।
15 जुलाई 2024 को डोडा में भी आतंकी हमले वाली जगह 200 वर्ग किमी का जंगल है, जबकि भारतीय सेना की सर्चिंग सिर्फ 50 वर्ग किमी में चल रही है।
कश्मीर में जंगल कम, बर्फ के पहाड़ ज्यादा हैं, जहां आतंकियों पर दूर से भी नजर रखी जा सकती है। इसलिए जम्मू में हमे नई और आक्रामक रणनीति बनानी होगी, क्योंकि कश्मीर जैसी रणनीति जम्मू में नहीं चलेगी।












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