J&K: क्या राज्य का दर्जा बहाल होने से विधानसभा की स्थिति बदल जाएगी? कानूनी जानकारों की राय जानिए
Jammu Kashmir Election Result: कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के केंद्र के संभावित फैसले का नवगठित विधानसभा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि विधानसभा को भंग करने की जरूरत नहीं होगी। एक अन्य वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सहमति जताते हुए कहा कि विधानसभा पहले से ही गठित होगी।
इनकी राय जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने की बढ़ती मांगों के बीच आई है, जो जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस का एक प्रमुख चुनावी वादा रहा है। राकेश द्विवेदी ने विस्तार से बताया कि विधानसभा बिना भंग हुए राज्य विधानसभा के रूप में जारी रह सकती है।

उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 370 के खत्म हो के बाद मौजूदा कानून में संसद द्वारा संशोधन ही पर्याप्त होगा। अगर जम्मू-कश्मीर को दो राज्यों में विभाजित भी कर दिया जाता है तो संविधान के अनुच्छेद 3 और 4 के तहत राज्य पुनर्गठन अधिनियम की आवश्यकता होगी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन ने 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के पहले चुनावों में महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। इस जीत ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को तेज कर दिया है, जो उनके मुख्य चुनावी वादों में से एक था। 8 अक्टूबर,2024 को 90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सबसे ज़्यादा सीटें हासिल की हैं।
11 दिसंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा था, लेकिन सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने का आदेश दिया और राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने का आग्रह किया था। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस आश्वासन की ओर ध्यान दिलाया कि केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा अस्थायी है और जल्द ही राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा।
इस सप्ताह की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया गया है, जिसमें दो महीने के भीतर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के निर्देश देने की मांग की गई है।












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