देश के लिए कुर्बान हुआ औरंगजेब, पिता ने कहा- 72 घंटों में बेटे की हत्या का बदला लें सरकार
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श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में गुरुवार की शाम से मातम छाया हुआ है। पहले एक जर्नलिस्ट शुजात बुखारी की आतंकियों ने हत्या कर दी और उसके बाद बहादूर जवान औरंगजेब को भी अगवा कर उसे गोलियों से भून दिया। औरंगजेब को छुट्टी मिली थी और वह अपने घर ईद मनाने के लिए जा रहा था, लेकिन आतंकियों ने उसके बदन गोलियों से छलनी कर आतंकी समीर टाइगर की हत्या का बदला लिया। देश के लिए कुर्बान हुए औरगंजेब के घर में ईद से एक दिन पहले मातम छाया हुआ है और गांव कलामपोरा में सन्नाट पसरा है। इधर औरंगजेब की मां अभी भी अपने बहादूर बेटे के आने के इंतजार में बैठी है, तो उधर बिलखते हुए पिता ने अपने बेटे के हत्यारों का बदला लेने के लिए 72 घंटों का अल्टीमेटम दिया है।

72 घंटों में बेटे की हत्या का बदला लें सरकार...
औरंगजेब के पिता ने कहा, 'मेरे बेटे के हत्यारों के खिलाफ भारत की सरकार क्या कर रही है। अगर सरकार अगले 72 घंटों में कोई एक्शन नहीं लेती है तो मैं खुद औरंगजेब की हत्या का बदला लूंगा।' औरंगजेब के पिता ने कहा कि उनके बेटे की मौत ना सिर्फ एक परिवार के लिए बल्कि पूरी सेना के लिए भी झटका है, जो जम्मू कश्मीर स्टेट के लिए सेवा कर रहा था। औरंगजेब के पिता ने जम्मू कश्मीर सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि 2003 से लेकर अब तक क्यों आतंकियों का सफाया नहीं हो पाया।

सोचा था मोदी सरकार में परिस्थितियां बदलेगी...
अपने बेटे के जाने के दुख में बिलखते हुए पिता ने कहा कि जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी, तब हमें लगा था कि परिस्थितियां बदलेगी, लेकिन कुछ नहीं हो सका। औरंगजेब के पिता ने कहा कि जो भी अलगाववादी और जो राजनीति कर रहे हैं, उन्हें कश्मीर से बाहर निकाल देना चाहिए। अपने बेटे की हत्या के खिलाफ गुस्सा निकालते हुए औरंगजेब के पिता ने कहा कि सेना और अन्य सिक्योरिटी एजेंसियों को घाटी में आतंकियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना चाहिए।

देश सेवा लंबा इतिहास है औरंगजेब का परिवार
औरंगजेब स्पेशल आर्मी टीम में शामिल था, जिसने पिछले माह हिजबुल कमांडर समीर टाइगर को गीदड़ की मौत मारा था। तभी से औरंगजेब आतंकियों के निशाना पर था और वे उसका बदला लेना चाह रहे थे। सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना औरंगजेब के परिवार का लंबा इतिहास रहा है। औरंगजेब का एक भाई पहले से ही इंडियन आर्मी में शामिल है, तो वहीं 2004 में उनके चाचा ने आतंकियों से लड़ते वक्त देश के लिए अपने प्राण त्याग दिए थे।












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