Pahalgam Attack: 'सिद्ध हो गया कि आतंकवाद का धर्म होता है', पहलगाम हमले पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान!
Swami Avimukteshwaranand on Pahalgam Attack: 22 अप्रैल को कश्मीर की वादियों में जो नरसंहार हुआ, उसने भारत को सिर्फ झकझोरा नहीं - बल्कि उसकी रगों में बहते भरोसे को भी तोड़ दिया। धर्म पूछकर, कलमा पढ़वाकर, कपड़े उतरवाकर हत्याएं - क्या ये महज आतंकवाद था? या मजहबी क्रूरता का सबसे घिनौना रूप?
अब इस पर आया है एक ज्वालामुखी जैसा बयान - शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, 'अब सिद्ध हो गया है कि आतंकवाद का धर्म होता है।'

शंकराचार्य का बयान क्यों है इतना बड़ा?
भारत में जब भी कोई आतंकी हमला होता है, तो नेताओं और बुद्धिजीवियों का एक 'स्क्रिप्टेड बयान' तैयार रहता है - 'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।' लेकिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इस रटे-रटाए नैरेटिव को पलटते हुए कहा, 'इस घटना ने प्रमाणित कर दिया है कि आतंकवाद का धर्म होता है। जिनके धर्म के कारण उन्हें मारा गया, वह कोई संयोग नहीं- एक योजनाबद्ध मजहबी हत्या थी।' उन्होंने यहां तक कहा कि हमले से पहले आतंकियों ने खतना चेक किया और फिर गोलियों से भून दिया। यानी मजहब देख कर मारा गया - अब इससे ज्यादा सबूत और क्या चाहिए?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: जो कह देते हैं, वो झकझोर देता है
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सिर्फ संत नहीं, साफगोई की मिसाल हैं। चाहे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर राय हो या ज्ञानवापी विवाद, उन्होंने अपनी बात बेझिझक रखी है। 'हम मोदी विरोधी नहीं, बल्कि उनके प्रशंसक हैं। उन्होंने हिंदुओं को आत्म-जागरूक बनाया है।' यह लाइन बताती है कि वो विरोध नहीं, विवेक से बात करते हैं। आइए जानते हैं कब-कब विवादों में-
- महाकुंभ: हाल ही में, यूपी के प्रयागराज के महाकुंभ में घटी अप्रिय घटनाओं को लेकर भी मुखर हुए थे। उन्होंने महाकुंभ में वीवीआई एंट्री द्वार की कड़ी आलोचना भी की थी।
- राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा : इससे पहले, राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाए थे। उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा में जाने से भी मना कर दिया था। तर्क दिया था कि प्राण प्रतिष्ठा होती है तो पूरे मंदिर में जान फूंकी जाती है, राम मंदिर पूरी तरह तैयार नहीं।
कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वर्तमान में उत्तराखंड स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। वे अपने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विचारों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। उनकी जीवन यात्रा एक सामान्य ग्रामीण बालक से लेकर शंकराचार्य बनने तक की प्रेरणादायक कहानी है।
एक नजर में पूरा प्रोफाइल
- जन्म: 15 अगस्त 1969, ब्राह्मणपुर गांव, प्रतापगढ़, यूपी
- बचपन का नाम: उमाशंकर पांडेय
- पढ़ाई: संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी से आचार्य
- संन्यास: गुरु रामचैतन्य जी से दीक्षा
- वर्तमान में: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य
प्रमुख विवाद और सामाजिक सक्रियता
- रामलला प्राण प्रतिष्ठा पर आपत्ति (2024): स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अयोध्या में अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को शास्त्रों के विरुद्ध बताया।
- ज्ञानवापी परिसर में पूजा का प्रयास (2022): उन्होंने ज्ञानवापी परिसर में पूजा करने की घोषणा की, जिसे प्रशासन ने रोका। इसके विरोध में उन्होंने 108 घंटे का अनशन किया।
- गंगा और गाय संरक्षण: उन्होंने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने के लिए लंबे समय तक अनशन किया और गाय की रक्षा के लिए संसद तक मार्च निकाला।
- राजनीतिक बयान: उन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बयान दिया, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।












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