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J&K:कोविड में ज्यादा युवाओं ने थामे हथियार, जानिए Article 370 के बाद आतंकवाद पर कितना फर्क पड़ा

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में बीते साल कोरोना वायरस (Coronavirus)के प्रकोप के बावजूद स्थानीय युवाओं के आतंकवाद (terrorism)की ओर खासा आकर्षण देखा गया। अगर एक साल पहले के मुकाबले देखें तो 2020 में कहीं ज्यादा स्थानीय युवा हथियार थामकर आतंकवादी संगठनों में शामिल हो गए। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि सुरक्षा बलों की ओर से सख्ती और कोविड-19(Covid-19) की वजह से जारी पाबंदियों के बावजूद जम्मू-कश्मीर के युवाओं में आतंकवाद की ओर बहुत ज्यादा आकर्षण रहा, बल्कि इसमें काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि इस मामले में हिजबुल मुजाहिदीन सबसे ज्यादा सक्रिय संगठन है, जिसने स्थानीय युवाओं को हथियार उठाने के भड़काया है।

पिछले साल 167 कश्मीर युवा आतंकवादी बने

पिछले साल 167 कश्मीर युवा आतंकवादी बने

अधिकारियों के मुताबिक पिछले साल जम्मू-कश्मीर में पहले के मुकाबले काफी ज्यादा संख्या में स्थानीय युवा विभिन्न आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए हैं। इनके मुताबिक 2020 में 167 कश्मीरी युवा हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और टेरिस्ट रेसिस्टेंस फ्रंट (Hizbul Mujahideen (HM), Jaish-e-Mohammad, Lashkar-e-Taiba and Terrorist Resistance Front) जैसे दहशतगर्दों के संगठनों में शामिल हुए हैं। जबकि, इससे पिछले साल यानि आर्टिकल 370 के खात्मे वाले साल में यह संख्या सिर्फ 115 ही रही थी। अधिकारियों के मुताबिक घाटी में सबसे ज्यादा सक्रिय आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन है, जो लगातार स्थानीय युवकों को बहला-फुसलाकर आतंकवाद में धकेल रहा है।

आतंकवादी बढ़े, आतंकवादी घटनाओं में आई कमी

आतंकवादी बढ़े, आतंकवादी घटनाओं में आई कमी

बता दें कि गृहमंत्रालय (home ministry)ने दावा किया था कि 2019 के 5 अगस्त को आर्टिकल 370 (Article 370)हटाए जाने के से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हिंसा में कमी आई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में एक साल पहले के 294 के मुकाबले पिछले साल हिंसक वारदातों की संख्या घटकर 265 रह गई है। अधिकारियों को यह भी लगता है कि इस वक्त घाटी में करीब 230 आतंकवादी सक्रिय हैं, जिनमें से 75 विदेशी हैं। अधिकारियों की मानें तो घाटी में आतंकवाद में शामिल होने वाले युवाओं की तादाद जरूर बढ़ गई है, लेकिन आतंकवादियों के सफाए के अभियान से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ये संगठन हथियार और गोला-बारूद की भारी किल्लत झेल रहे हैं।

आतंकवादियों को हो रही है हथियारों की किल्लत

आतंकवादियों को हो रही है हथियारों की किल्लत

बता दें कि असॉल्ट राइफल (assault rifles)की कमी दूर करने के लिए हिजबुल मुजाहिदीन ( (Hizbul Mujahideen)कमांडर रियाज नाइकू (Riyaz Naikoo) ने 2019 में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन डीएसपी देविंदर सिंह (deputy superintendent of police Davinder Singh) से भी संपर्क किया था। रियाज को तो सुरक्षा बलों ने पिछले साल एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। निलंबित डीएसपी देविंदर सिंह की साठगांठ पीडीपी के युवा इकाई केअध्यक्ष वहीद-उर-रहमान पारा से भी सामने आ चुकी है। गौरतलब है कि विवादित डीएसपी देविंदर सिंह को आतंकियों से संबंधों के चलत ही नौकरी से हटाया गाया है और उसके खिलाफ कार्रवाई हो रही है।

डीडीसी चुनाव के दौरान कई नेताओं को आतंकियों ने मारा

डीडीसी चुनाव के दौरान कई नेताओं को आतंकियों ने मारा

घाटी में आतंकवादियों की संख्या में इजाफा हुआ है तो उनके खिलाफ सेना (Army), जम्मू और कश्मीर पुलिस (Jammu and Kashmir police)और केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (Central Reserve Police Force)ने साझा अभियान चलाकर आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे 600 से ज्यादा लोगों को पकड़ा भी है। इनमें से कुछ सक्रिय आतंकवादी भी हैं। गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच हुए डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट चुनाव (DDC Polls) के दौरान आतंकवादियों ने बीजेपी के 9 नेताओं और कार्यकर्ताओं समेत विभिन्न दलों के 11 राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी थी। आतंकियों के हाथों मारे गए नेताओं में बीजेपी के पंचायत सदस्य भूपिंदर सिंह, इसके पिछड़ा वर्ग इकाई के जिलाध्यक्ष अब्दुल हामिद नजर और शेख वसीम बारी भी शामिल हैं।

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