Jammu Kashmir Chunav: कश्मीर में कैसे बनेगी अगली सरकार? इस रणनीति पर काम कर रही है बीजेपी!

Jammu Kashmir Chunav: बीजेपी लगातार दूसरी बार जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। पार्टी की रणनीति जम्मू और कश्मीर के लिए अलग-अलग है। वह जम्मू में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना चाहती है और कश्मीर में निर्दलीयों और छोटी-छोटी स्थानीय पार्टियों के अच्छे प्रदर्शन के भरोसे बैठी है।

टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के शीर्ष नेताओं का अनुमान यही है कि कांग्रेस समेत इंडिया ब्लॉक में उसकी सहयोगी तमाम पार्टियां (नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी) इस बार केंद्र शासित प्रदेश में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होगी और न ही उनकी इतनी सीटें आने की संभावना है कि वे सरकार बनाने में कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की ही स्थिति में आ सकें।

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निर्दलीय और स्थानीय दलों के भरोसे भाजपा!
भाजपा नेताओं का यह अनुमान सात स्थानीय पार्टियों और चुनाव लड़ रहे 32 निर्दलीय प्रत्याशियों के बेहतर प्रदर्शन की संभावनाओं के भरोसे टिका है, जो उनके मुताबिक चुनाव मैदान में काफी मजबूत स्थिति में हैं। सूत्रों की मानें तो जम्मू और कश्मीर की अगली सरकार इन्हीं निर्दलीय और स्थानीय पार्टियों पर निर्भर करेगी।

जम्मू कश्मीर में सबसे बड़ी पार्टी बनना बीजेपी का पहला लक्ष्य!
इनके अनुसार भाजपा नेताओं को यकीन है कि जम्मू क्षेत्र में पार्टी का दबदबा विधानसभा चुनावों में भी कायम रहेगा, जिसके दम पर वह पहली बार यहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। पार्टी नेताओं को लगता है कि अगर वह सबसे बड़ी पार्टी बन गई तो वह लगातार दूसरी बार सरकार बनाने की स्थिति में आ सकती है।

इंजीनियर राशिद से तालमेल की अटकलों को किया खारिज
हालांकि, सरकारी सूत्र ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है कि भाजपा का बारामूला के निर्दलीय सांसद इंजीनियर राशिद के साथ किसी भी तरह से 'आपसी तालमेल' है। अब उनकी पार्टी अवामी इत्तेहाद पार्टी ने जमात-ए-इस्लामी समर्थित उम्मीदवारों से तालमेल भी कर लिया है।

सूत्र ने कहा, 'इंजीनियर राशिद के साथ तालमेल का कोई सवाल ही नहीं है, वह यूएपीए के एक आरोपी हैं और उनकी जमानत की सरकार की ओर से जोरदार विरोध किया गया।' सूत्र का कहना है कि उन्हें जो जमानत मिली है, वह अरविंद केजरीवाल को पहले इसी तरह के केस (चुनाव प्रचार के लिए) में सुप्रीम कोर्ट से मिल चुकी जमानत पर आधारित है।

जमात से प्रतिबंध हटने की संभावना नहीं- सूत्र
वहीं जमात-ए-इस्लामी से जुड़े लोगों के चुनाव लड़ने और उसपर लगे प्रतिबंध हटाए जाने की चर्चाओं को लेकर सूत्र ने पूछे जाने पर बताया कि दोनों अलग-अलग चीजें हैं। सूत्र का कहना है, 'जमात पर प्रतिबंध उसके अलगाववादी एजेंडे की वजह से है....और यह प्रतिबंध कायम रहने वाला है।'

जम्मू में 43 और कश्मीर में 47 सीटें हैं। जम्मू की सभी सीटों पर बीजेपी अपने दम पर चुनाव मैदान में है, जबकि कश्मीर में पार्टी 19 सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है।

पार्टी को लगता है कि जम्मू में अधिकतर सीटें जीतकर और कश्मीर से चुनाव जीतने वाले निर्दलीय और छोटी पार्टियों के समर्थन से 46 सीटों का जादुई आंकड़ा पार कर सकती है। जम्मू कश्मीर में 18, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को चुनाव है और 8 अक्टूबर को मतगणना होनी है।

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