कहां तक पहुंची जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तैयारी?
Jammu Kashmir Vidhan Sabha Election: जम्मू और कश्मीर में 30 सितंबर से पहले विधानसभा चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 21 जून को जब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर श्रीनगर पहुंचे थे, तो उन्होंने भी इस केंद्र शासित प्रदेश में जल्द चुनाव कराने का वादा किया था।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 11 दिसंबर, 2023 को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को 30 सितंबर, 2024 तक जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवाने के निर्देश दिए थे।

जम्मू कश्मीर में आने वाले हफ्तों में हो सकती है चुनाव तारीखों की घोषणा
पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इस केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव करवाने का वादा किया था, हालांकि उन्होंने इसके लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और प्रधानमंत्री की घोषणा के मुताबिक ही चुनाव आयोग की गतिविधियों ने संकेत दिए हैं कि वहां आने वाले हफ्तों में चुनाव तारीखों की घोषणा हो सकती है।
मतदाता सूची फाइनल करने पर जारी है काम
चुनाव आयोग ने जम्मू और कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से भी कहा है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण करें और विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू करें। इससे पहले चुनाव आयोग कह चुका है कि अंतिम मतदाता सूची 20 अगस्त तक जारी कर दी जाएगी।
जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव
जम्मू और कश्मीर में विधानसभा का आखिरी चुनाव दिसंबर 2014 में हुआ था। तब त्रिशंकु जनादेश के बाद महबूबा मुफ्ती की पीडीपी और बीजेपी ने मिलकर सरकार बनाई थी। यह 'बेमेल' गठबंधन की सरकार करीब साढ़े तीन साल चली। बीजेपी ने महबूबा सरकार से समर्थन वापस ले लिया तो सरकार गिर गई।
अनुच्छेद 370 खत्म होते ही बदल गई जम्मू कश्मीर की राजनीति
पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर राज्य में तब संवैधानिक संकट के बीच राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। लेकिन, 5 अगस्त, 2019 को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को खत्म करके यहां की राजनीति ही बदल दी। जम्मू और कश्मीर के राज्य का दर्जा खत्म हो गया। उससे जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।
विधानसभा चुनावों के साथ राज्य का दर्जा बहाली की उम्मीद
जम्मू और कश्मीर में 10 साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद इसके राज्य के दर्जा वापस होने की भी पूरी उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के केंद्र के फैसले पर मुहर लगाते हुए राज्य का दर्जा बहाली की प्रक्रिया तेज करने को कहा है। वहीं पीएम मोदी ने भी ऐसा जल्द किए जाने का विश्वास दिलाया है।
राजनीतिक दलों ने भी चुनाव के लिए कस ली है कमर
राज्य में किसी भी वक्त चुनाव तारीखों की घोषणा की संभावनाओं को देखते हुए राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। औपचारिक रूप से इसकी शुरुआत सबसे पहले सज्जाद लोन की पीपुल्स कांफ्रेंस करती हुई नजर आई। इसने पिछले हफ्ते ही इस सिलसिले में पार्टी कोर ग्रुप की बैठक की है।
बाद में नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में भी इसको लेकर एक बैठक होने की सूचना है।
लोकसभा चुनावों में बुरी तरह से हारी महबूबा मुफ्ती की पीडीपी ने भी गलतियों से सीखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों में पूरी तरह से जुट जाने को कहा है।
नेशनल कांफ्रेंस ने मेनिफेस्टो कमेटी भी बना डाला
लोकसभा चुनावों में कश्मीर घाटी की दो सीटें जीतने के बाद नेशनल कांफ्रेंस अभी तक इसी मंथन में जुटा हुआ था कि उसके नेता उमर अब्दुल्ला को निर्दलीय प्रत्याशी राशिद इंजीनियर ने बारामूला में हरा कैसे दिया।
बहरहाल पार्टी विधानसभा चुनावों की रेस में सबसे आगे दौड़ने के लिए तैयार है। पार्टी ने इसके लिए 14 सदस्यीय एक मेनिफेस्ट कमेटी भी बना दी है, जिसमें जाने-माने अर्थशास्त्री के अलावा अन्य विद्यानों को भी जगह दी गई है।
बीजेपी ने जी किशन रेड्डी को बनाया चुनाव प्रभारी
भाजपा तो करीब दो हफ्ते पहले ही इसके लिए तेलंगाना में सिकंदराबाद के पार्टी सांसद और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी को प्रदेश का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। इन जैसे नेताओं ने दक्षिण के इस राज्य में भाजपा का विस्तार करने में बहुत ही अहम भूमिका निभाई है।
लोकसभा चुनावों में मतदान का रुख देखने से बढ़ गया हौसला
दरअसल, इस साल जम्मू और कश्मीर में लोकसभा का चुनाव जिस तरीके से संपन्न हुआ है, उसने चुनाव आयोग के साथ ही केंद्र सरकार का भी हौसला बढ़ाया है। वहां इस बार कुल 58.58% मतदान हुआ है, जो 35 वर्षों में सबसे ज्यादा है।












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