फैसले से पहले जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी बोले- अयोध्या में कयामत तक बाबरी मस्‍ज‍िद ही रहेगी

नई दिल्ली: जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने अयोध्या केस में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि शरिया के मुताबिक बाबरी में मस्जिद थी और कयामत तक रहेगी। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 18 नवंबर से पहले कभी भी कोई फैसला सुना सकता है। ऐसे में उनका ये बयान काफी अहम है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला सुनाएगा वो हमें मंजूर होगा।

'सुप्रीम कोर्ट के फैसले का होगा सम्मान'

'सुप्रीम कोर्ट के फैसले का होगा सम्मान'

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था का बेहद सम्मान करते हैं और जो भी फैसला आएगा उसका भी सम्मान करेंगे। उन्होने इस मामले में मध्यस्थता की प्रक्रिया के विफल होने पर कहा कि दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी मागों पर अड़े रहे जिसकी वजह से यह विफल रही। हम राम चबूतरा को स्वीकार करने के लिए तैयार थे, भले ही विवादित वक्फ भूमि में राम चबुतरा, राम भंडारा और सीता रसोई हों।

'शरिया कानून के तहत मस्जिद'

'शरिया कानून के तहत मस्जिद'

अरशद मदनी ने आगे कहा कि हिंदू पक्ष गुंबद वाले हिस्से और उसके आंगन क्षेत्र पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं थे जहां बाबरी मस्जिद थी और जहां मुसलमान प्रार्थना करते थे। भारतीय वक्फ कानून हमें इसकी इजाजत नहीं देता कि हम इस जमीन पर अपना दावा छोड़ दें क्योंकि यहां पर शरिया कानून के तहत मस्जिद थी। हिंदू पक्ष अपने दावे पर अड़िग था नतीजन मध्यस्थता विफल रही। इसके बाद हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा और अब हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

बैठक में लिया हिस्सा

बैठक में लिया हिस्सा

गौरतलब है कि मदनी ये बयान अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के आवास पर मंगलवार को हुई मुस्लिम नेताओं, शिक्षाविदों, धार्मिक नेताओं और आरएसएस नेताओं के बीच बैठक के बाद दिया है। एनआरसी को लेकर मदनी ने गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार परल नागरिकता देना भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आगे कहा कि देश के गृह मंत्री को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने गृह मंत्री के रूप में शपथ लेते हुए संविधान की शपथ ली थी कि वे अब संविधान के विरुद्ध चल रहे हैं।

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