आतंकी संगठन जमात-ए-इस्लामी के प्रतिबंध पर सरकार के सूत्रों ने किया बड़ा खुलासा
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने आतंकी संगठन जमात ए इस्लामी (जम्मू कश्मरी) पर प्रतिबंध लगा दिया है। माना जा रहा है कि सरकार इसके बाद घाटी में अलगाववादियों को घेरने के लिए और बड़ा कदम उठा सकती है। लेकिन इस बीच जमात ए इस्लामी को लेकर सरकार के सूत्रों की ओर से बड़ी खबर सामने आई है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि जिस जमात ए इस्लामी को बैन किया गया है वह घाटी में मुख्य रूप से अलगाववादियों और हिंसका विचारधारा को आगे बढ़ा रही थी। इस आतंकी संगठन का जमात ए इस्लामी से कोई लेना देना नहीं है।

सरकार के सूत्रों की मानें तो वर्ष 1953 में जमात ए इस्लामी (जम्मू कश्मीर) ने अपना संविधान अपनाया था। यह वही संगठन है जो हिजबुल मुजाहिदीन के गठन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। यह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन को जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में मदद करता है यह आतंकी संगठन हिजबुल को नई भर्ती करने, फंडिग करने और हथियार आदि सामान मुहैया कराने में मदद करता है। सीधे तौर पर कहें तो हिजबुल मुजाहिदीन जमात ए इस्लामी का मिलिटेंट विंग है।
गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस संगठन पर पाबंदी लगाने का फैसला लिया गया। आरोप है कि इस आतंकी संगठन ने कई आतंकी गतिविधियों को घाटी में अंजाम दिया है। बैठक के बाद खुद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस फैसले का आदेश जारी किया। बता दें कि पिछले कुछ दिनों में 500 से अधिक जमात के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकार और भी सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है।
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