जल संसाधन मंत्री का दावा- चमोली के कई इलाकों में 'केदारनाथ आपदा' से भी ज्यादा नुकसान
Chamoli Glacier Burst: उत्तराखंड में रविवार सुबह एक भीषण आपदा आई, जहां चमोली के तपोवन इलाके में ग्लेशियर टूट गया। इस घटना के बाद से चमोली के कई इलाकों में भारी नुकसान की खबर सामने आ रही है। साथ ही ऋषिगंगा प्रोजेक्ट पूरी तरह से तबाह हो गया है। घटना के तुरंत बाद ITBP, NDRF, SDRF, भारतीय सेना और वायुसेना ने रेक्स्यू ऑपरेशन शुरू किया, जो अभी भी जारी है। इस बीच केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बड़ा बयान दिया है।

गजेंद्र सिंह शेखावत के मुताबिक रविवार सुबह अचानक से ग्लेशियर टूट गया। जिस वजह से नदी के आसपास बसे कई गांव इसकी चपेट में आ गए। कई इलाकों में ये 2013 (केदारनाथ आपदा) से बड़ी घटना मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि रेणी गांव में पॉवर प्लांट का जो काम चल रहा था, उसे भी काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा इलाके में अन्य विकास कार्यों को भी आपदा ने प्रभावित किया। ऐसे में केंद्र सरकार उत्तराखंड की हर संभव मदद करेगी।
शेखावत ने आगे कहा कि सेन्ट्रल वाटर कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक ये चमोली की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। शुरू में निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन अब हरिद्वार, ऋषिकेश में पानी का बहाव सामान्य हो रहा है। जिस वजह से वहां पर नुकसान नहीं होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने NDRF, ITBP, सेना, वायुसेना समेत तमाम बलों को राहत कार्यों में लगाया है।
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केदारनाथ आपदा की दिलाई याद
आपको बता दें कि 16-17 जून 2013 को केदारनाथ में भयानक आपदा आई थी। जिमसें 4400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। हालांकि स्थानीय लोगों को मानना है कि इस त्रासदी में 10 हजार से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई थी। केदरानाथ में भी त्रासदी वाले दिन सब कुछ सामान्य चल रहा था। तभी अचानक ऊपर से जल सैलाब आया, जिसने मंदिर को छोड़ पूरी केदारनगरी को तबाह कर दिया। इस आपदा ने केदारनाथ के अलावा रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिले में भी भारी तबाही मचाई थी।












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