अमेरिका से तनातनी के बीच भारत का कूटनीतिक दांव, रूस और चीन के साथ अहम बैठकें तय!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald trump) द्वारा हाल ही में लगाए गए टैरिफ और ब्रिक्स के संस्थापक देशों के बीच बढ़ते जुड़ाव के बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर 21 अगस्त को मॉस्को (Moscow) में अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov) से मुलाकात करेंगे। वहीं, अगले सप्ताह चीनी विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) भारत आकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ सीमा विवाद पर बातचीत करेंगे।

भारत ने अभी तक दोनों दौरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हालांकि, बुधवार दोपहर रूसी विदेश मंत्रालय ने जयशंकर-लावरोव बैठक की घोषणा करते हुए कहा कि इसमें द्विपक्षीय संबंधों और 'अंतर्राष्ट्रीय ढांचे के भीतर सहयोग के पहलुओं' पर चर्चा होगी।

Jaishankar to visit Moscow

रूस-भारत शिखर सम्मेलन की तैयारी
यह बैठक इस साल के अंत में होने वाले रूस-भारत वार्षिक शिखर सम्मेलन की तैयारी का हिस्सा है, जिसके लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की संभावना है।जयशंकर और लावरोव की यह मुलाकात एनएसए अजीत डोभाल की हालिया रूस यात्रा के कुछ दिन बाद हो रही है, जिसमें उन्होंने अपने समकक्ष सर्गेई शोइगु से चर्चा की थी और पुतिन से विशेष भेंट की थी। इसके तुरंत बाद पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेलीफोन पर बातचीत की थी।

भारत-चीन सीमा वार्ता पर जोर
सूत्रों का कहना है कि वांग यी की भारत यात्रा जयशंकर की मॉस्को यात्रा से पहले होगी। इसमें भारत-चीन सीमा मुद्दे पर उच्च-स्तरीय बातचीत जारी रखने पर जोर रहेगा। वांग इस दौरान अजीत डोभाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे।

इस वार्ता पर खास ध्यान रहेगा क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के तीन महीने बाद हो रही है-जब भारत ने पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ा था। जुलाई में उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने कहा था कि चीन ने इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को 'लाइव इनपुट' दिए थे।

एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले की तैयारी
दिल्ली में वांग यी की बातचीत शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले की तैयारी का हिस्सा भी मानी जा रही है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के चीन के तियानजिन दौरे की संभावना है। हालांकि, पाकिस्तान से चीन के करीबी संबंधों के कारण भारत रिश्ते गहराने में सावधानी बरतेगा।

वैश्विक मंच पर सक्रिय रूस और चीन
भारत के साथ बातचीत के बीच, रूस और चीन अन्य वैश्विक एवं क्षेत्रीय देशों से भी संपर्क में हैं। रूसी एजेंसी TASS के मुताबिक, नई दिल्ली आने से पहले लावरोव, पुतिन के साथ अलास्का जाएंगे, जहां 15 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शिखर बैठक होगी। भारत ने इस कदम का स्वागत किया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बैठक को, जो रूस-यूक्रेन संघर्ष के तीन साल बाद हो रही है, संघर्ष खत्म करने की आशा भरा कदम बताया। 11 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से फोन पर बात की और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता दोहराई।

ट्रम्प द्वारा भारतीय रूसी तेल आयात पर बड़े शुल्क लगाने की घोषणा के बाद, भारत ने अपने साझेदारों और हितधारकों से लगातार बातचीत की है। पीएम मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा और 12 अगस्त को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति सावकत मिर्जियोयेव से फोन पर चर्चा की। इसमें कनेक्टिविटी और पारगमन परियोजनाओं पर जोर रहा, खासकर अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) पर, जो रूस के लिए भूमि मार्ग को आसान बनाने की योजना है।

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