'आतंकवाद का होता है महिमामंडन', UNGA में जयशंकर ने दिया कड़ा संदेश, पाकिस्तान को बताया ‘आतंकी अड्डा’
Jaishankar Speech at UNGA 2025: न्यूयॉर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर का भाषण पूरे सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। अपने 16 मिनट के संबोधन में उन्होंने वैश्विक मुद्दों पर भारत का रुख साफ किया और पाकिस्तान पर परोक्ष हमला किया। उन्होंने कहा कि दशकों से आतंकवाद की जड़ें एक ही देश से जुड़ी हैं।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद को केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा मानता है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ गहरे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है। उनके इस बयान पर सभा में जोरदार तालियां बजीं।

'आतंकवाद साझा खतरा है'
जयशंकर ने कहा कि भारत ने हमेशा अपने लोगों की रक्षा के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा की, बल्कि हमले के आयोजकों और अपराधियों को न्याय के कटघरे तक भी पहुंचाया।
ये भी पढ़ें: Asia Cup 2025 Final मुकाबले के लिए रिसर्व डे हैं या नहीं? बारिश से भारत-पाकिस्तान में किसे होगा फायदा!
पाकिस्तान पर परोक्ष हमला
विदेश मंत्री ने कहा, "दशकों से भारत को ऐसे पड़ोसी के साथ जीना पड़ा है, जो आतंकवाद का मुख्य अड्डा है। संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादी सूची में उस देश के कई नागरिक शामिल हैं।" इस दौरान उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, वे खुद इसके परिणाम भुगतते हैं।
आतंकवाद को राज्य नीति बताने वालों पर सख्त रुख
जयशंकर ने कहा कि जब कोई देश खुले तौर पर आतंकवाद को राज्य नीति बनाता है और आतंकियों की फैक्ट्री चलाता है, तो ऐसी हरकतों की कड़ी निंदा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंक के लिए फंडिंग रोकना ज़रूरी है और आतंकवाद के पूरे तंत्र पर लगातार दबाव बनाए रखना होगा।
आत्मनिर्भरता और वैश्विक व्यापार पर चिंता
विदेश मंत्री ने भारत की तीन बुनियादी सोच - आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा और आत्मविश्वास - पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में गैर-बाजार नीतियों और ऊंचे टैरिफ से अस्थिरता पैदा हुई है। यह संकेत अमेरिका की ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए आयात शुल्क की ओर था।
युद्ध और शांति पर भारत का संदेश
यूक्रेन और गाज़ा संघर्ष पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि इनके प्रभाव उन देशों पर भी पड़े हैं, जो सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं। भारत ने अपील की कि युद्ध को खत्म करने और शांति बहाल करने के लिए सभी पक्षों से बात करने में सक्षम देश आगे आएं।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर सवाल
अपने संबोधन में जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह संस्था सिर्फ युद्ध रोकने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि शांति और मानव गरिमा की रक्षा भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब संयुक्त राष्ट्र को 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए नेतृत्व दिखाना होगा।
ये भी पढ़ें: न्यूयॉर्क में मार्को रुबियो से मिले विदेश मंत्री जयशंकर, अमेरिकी टैरिफ 50% तक किए जाने के बाद पहली मुलाकात












Click it and Unblock the Notifications